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विवाद के बीच डिप्टी एयर चीफ मार्शल ने फ्रांस में उड़ाया राफेल, फाइटर प्लेन की आजमाई ताकत

भारतीय वायुसेना के डिप्टी एयर चीफ मार्शल रघुनाथ नंबियार ने 'टेस्टबेड' के तौर पर इस्तेमाल होने वाले 17 वर्ष पुराने राफेल विमान को उड़ाकर परीक्षण किया। उन्होंने तकरीबन 80 मिनट तक राफेल से उड़ान भरी।

Author September 21, 2018 1:34 PM
भारतीय वायुसेना के डिप्टी एयर चीफ मार्शल रघुनाथ नंबियार फ्रांस में राफेल विमान से उड़ान भरी। (Image Source: Facebook/Indian Military Photos)

अत्याधुनिक युद्ध तकनीक से लैस राफेल विमान का इंतजार भारतीय वायुसेना का बेड़ा बेसब्री से कर रहा है और देश में इसे लेकर सियासत भी चरम पर है। इसी बीच भारतीय वायु सेना के एक शीर्ष अधिकारी ने फ्रांस में इस लड़ाकू विमान से उड़ान भरी। गुरुवार (20 सितंबर) को भारतीय वायुसेना के डिप्टी एयर चीफ मार्शल रघुनाथ नंबियार ने ‘टेस्टबेड’ के तौर पर इस्तेमाल होने वाले 17 वर्ष पुराने राफेल विमान को उड़ाकर परीक्षण किया। उन्होंने तकरीबन 80 मिनट तक राफेल से उड़ान भरी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वायुसेना का एक दल इन दिनों फ्रांस में हैं, जिसमें पायलट और टेक्निकल अधिकारी शामिल हैं। भारत ने फ्रांस से 36 राफेल विमानों का सौदा किया है, यह दल उन्हीं विमानों को वायुसेना में शामिल करने की प्रक्रिया के तहत तैयारी में लगा है। उम्मीद की जा रही है कि इस साल के नवंबर से अप्रैल 2022 के बीच राफेल विमानों को भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किया जा सकेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक राफेल विमानों को पश्चिम बंगाल के हासीमारा और हरियाणा के अंबाला एयरबेस में शामिल करने की योजना है। भारत के लिए तैयार हो रहे राफेल विमानों में भारतीय तकनीक को जोड़कर 14 अपग्रेडेशन भी किए जाने की खबरें हैं। राफेल को टेस्ट करने वाले डिप्टी एयर चीफ मार्शल रघुनाथ नंबियार ने पिछले दिनों कहा था कि इन लड़ाकू विमानों से आसमान में भारत को गजब की ताकत मिलने वाली है। फ्रांस से तीन दर्जन राफेल विमानों की डील 59,000 करोड़ रुपये में बताई जा रही है। इसमें परमाणु हथियार और 14 अपग्रेड समेत रडार, इजराइली हेल्मेट वाला डिस्प्ले, लो बैंड जैमर, ठंडे इलाकों में इंजन स्टार्ट होने की क्षमता जैसे अपग्रेड में करीब 12,780 करोड़ रुपये का खर्च किए जाने की खबरें भी हैं।

2016 में मोदी सरकार के द्वारा की गई राफेल डील को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कई बार मंचों से कह चुके हैं कि मोदी सरकार ने इस डील में जरूरत से ज्यादा खर्च किया है। राहुल गांधी इस डील को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं। कांग्रेस का कहना है कि अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए मोदी सरकार ने रक्षा सौदे के नियमों का उल्लंघन किया है।

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