scorecardresearch

2025 तक पांच हजार डॉलर की अर्थव्यवस्था नहीं बन पाएगा भारत! अर्थशास्त्री ने गिनाए कारण

कोरोना महामारी के इस दौर में भारतीय अर्थव्यस्था शायद ही 2025 तक पांच हजार डॉलर तक पहुंच पाए। अर्थशास्त्री प्रोफेसेर वामसी वकुलभरणम ने इस मुकाम तक भारत को नहीं पहुंचने का अनुमान लगाया है।

indian economy
साकेंतिक तस्वीर

कोविड महामारी के इस दौर में शायद ही भारत 2025 तक पांच हजार डॉलर की अर्थव्यवस्था बन पाएगा। अर्थशास्त्री प्रोफेसेर वामसी वकुलभरणम की माने तो आर्थिक समस्याओं के कारण भारत 2025 तक इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएगा।

मैसाचुसेट्स के प्रोफेसेर वामसी वकुलभरणम का मानना है कि कोविड महामारी की वजह से आई आर्थिक नरमी के कारण भारत शायद ही 2024-25 तक 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन पाए। वकुलभरणम ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2019 में अपने आकार की तुलना में अगले वर्ष में काफी अवधि तक कम रही। उन्होंने कहा कि कोविड-19 स्पष्ट रूप से आर्थिक नरमी का सबसे महत्वपूर्ण कारण है। इसकी वजह से अन्य विकासशील देशों और वैश्विक अर्थव्यवस्था की तुलना में भारत की आर्थिक गिरावट बहुत तेज है।

वकुलभरणम ने कहा, “वर्तमान में भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 3,000 अरब डॉलर से कम है। यदि इसे चार वर्षों में 5,000 डॉलर तक पहुंचना है, तो अर्थव्यवस्था को औसतन 13 प्रतिशत से अधिक की दर से प्रतिवर्ष वृद्धि करनी होगी।” गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024-25 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है।

अर्थशास्त्री ने कहा कि भले ही सब कुछ भारतीय रिज़र्व बैंक और आईएमएफ द्वारा मौजूदा विकास अनुमानों के अनुसार हो लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था 2019 की तुलना में अगले वर्ष की काफी अवधि तक कम होगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और रिजर्व बैंक ने हाल में वृद्धि दर के अनुमानों को घटाया है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के ताजा अनुमान के अनुसार अर्थव्यवस्था में पिछले वित्त वर्ष में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आयी। आरबीआई के अनुसार चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत रहेगी।

बता दें कि पीएम मोदी ने 2019 में पांच हजार डॉलर की अर्थव्यवस्था का सपना देखा था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2019-20 बजट भाषण में पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था की बात कही थी। तब पीएम मोदी ने बीजेपी कार्यकर्तओं को संबोधित करते हुए इसी को देश के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य बताया था। तब कहा गया था कि भारत को 8 प्रतिशत के हिसाब से ग्रोथ रेट चाहिए, लेकिन कोरोना महामारी के दौर में यह कठिन लक्ष्य और कठिन बनता दिख रहा है। अमेरिका-चीन सहित कई देश इस मुकाम को काफी पहले हासिल कर चुके हैं।

 

पढें राष्ट्रीय (National News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.