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चीन की सीमा तक पहुंचने के लिए सुरंग बनाएगा भारत

तिब्बत की सीमा तक पहुंचने के लिए गुवाहाटी से भालुकपोंग होकर तवांग तक 496 किलोमीटर का रास्ता तय करना होता है। सुरंग बन जाने से कई घंटे का समय बचेगा।

Author नई दिल्ली | July 24, 2017 12:31 PM
चीन, भूटान व भारत की सीमा डोकलाम में मिलती है।

अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा तक पहुंचने के लिए केंद्रीय रक्षा और गृह मंत्रालय के अधिकारी बड़ी-बड़ी सुरंगें तैयार करने की योजना पर काम कर रहे हैं। सीमाई क्षेत्रों में सड़क बनाने वाले संगठन सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को तवांग में दो लेन वाले एक सुरंग के निर्माण का काम सौंपा गया है।  इस सुरंग के बन जाने से 13,700 फीट ऊंचे सेला दर्रे के इस्तेमाल की जरूरत नहीं रह जाएगी और पहाड़ी यात्रा मार्ग की जगह सीमा तक की दूरी सात किलोमीटर घट जाएगी। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने इस काम के लिए अरुणाचल सरकार से जमीन मांगी है।  पूर्वी हिमालयी राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों वाले इलाके में इस सुरंग के बन जाने से दूरी तो कम होगी ही, समय भी कई घंटा बचेगा।
अभी हाल में बीआरओ से प्रोजेक्ट कमांडर आरएस राव ने पश्चिमी कामेंग की उपायुक्त सोनल स्वरूप से मुलाकात कर उन्हें जमीन की जरूरत के बारे में पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज सौंपे।  अभी तिब्बत की सीमा तक पहुंचने के लिए गुवाहाटी से भालुकपोंग होकर तवांग तक 496 किलोमीटर का रास्ता तय करना होता है। सुरंग बन जाने से कई घंटे का समय बचेगा। साथ ही, वाहन तेजी से चल सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार, सेला दर्रा का रास्ता तय न करना पड़े इसके लिए तवांग तक 12.37 किलोमीटर की सड़क का काम चल रहा है।

475 मीटर और 1.79 किलोमीटर लंबी सुरंगें इसी परियोजना का हिस्सा हैं।ये सुरंगें 11,000 और 12,000 फीट की ऊंचाई पर बनाई जाएंगी। मानसून के बाद इस इलाके में जमीन अधिग्रहण के लिए सर्वेक्षण किया जाएगा। उधर, बांग्लादेश से लगी असम की सीमा सील करने के वादे के साथ बीते साल सत्ता में आए मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने अब इस काम में सेना की मदद मांगी है। राज्य सरकार ने सूबे से संबंधित भारत-बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ लगाने में सेना के इजीनियरों को तैनात करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक पत्र भेजा है। राज्य की 262 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगी है, जिसमें से 208.85 किलोमीटर लंबी सीमा को पहले ही सील किया जा चुका है। बाकी बची सीमा में साढ़े छह किलोमीटर जमीन से जुड़ी है, जिस पर बाड़ लगाई जानी है। बाकी सीमा नदियों से जुड़ी है।

 

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