पिछले साल 22 अप्रैल को पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने पहलगाम में आतंकी हमले को अंजाम दिया था। इसमें 26 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई थी। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की कोशिश कर पाकिस्तान भले ही दुनिया को मध्यस्थ देश के तौर पर खुद को दिखाने की कोशिश कर रहा है लेकिन भारत उसकी सच्चाई उजागर कर रहा है। पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर वाशिंगटन में भारतीय दूतावास ‘आतंकवाद की इंसानी कीमत’ थीम पर एक प्रदर्शनी लगाएगा।

अमेरिका में लगेगी प्रदर्शनी

सूत्रों के मुताबिक यह प्रदर्शनी अगले हफ्ते शुरू होगी और कैपिटल हिल के पास एक पब्लिक जगह पर होने की संभावना है। हालांकि प्रदर्शनी के बारे में अभी जानकारी सामने नहीं आई हैं। लेकिन इंडियन एक्सप्रेस को पता चला है कि यह प्रदर्शनी पिछले साल 22 अप्रैल को जान गंवाने वाले 26 लोगों पर फोकस करेगी। इसमें 25 भारतीय नागरिक और एक नेपाली नागरिक की मौत हुई थी। प्रदर्शनी में इस भयानक हमले के गुनहगारों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।पाकिस्तान में मौजूद इस्लामी UN-नामित आतंकवादी ग्रुप लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रॉक्सी, द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने शुरू में हमले की ज़िम्मेदारी ली थी, हालांकि बाद में अपना बयान वापस ले लिया।

पिछले साल हुआ था पहलगाम आतंकी हमला

22 अप्रैल 2025 को बंदूकों से लैस आतंकवादी, आस-पास के जंगलों से होते हुए एक मशहूर टूरिस्ट जगह बैसरन घाटी में घुस गए। इस हमले को 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में आम लोगों पर हुआ सबसे खतरनाक हमला माना जाता है। इस हमले ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा दिया। भारत ने सीमा पार आतंकवाद को सपोर्ट करने के लिए पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा और हमलों के बाद कई डिप्लोमैटिक कदमों के साथ, सिंधु जल संधि को रोक दिया। इसके अलावा व्यापार और वीज़ा पर रोक लगा दी। भारत ने अपने दावों को समर्थन करने के लिए कई उदाहरण दिए थे।

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को दिया था अंजाम

जवाबी कार्रवाई में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तानी इलाके में आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया। इसके बाद मिलिट्री में तनाव बढ़ गया, लेकिन तीन दिन बाद (10 मई को) पाकिस्तानी डायरेक्टर जनरल ऑफ़ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) के भारत से मिलिट्री एक्शन रोकने के आग्रह करने के बाद सीज़फ़ायर का ऐलान किया गया। मिलिट्री एक्शन के दौरान भारत ने पाकिस्तान में 9 टेरर लॉन्चपैड पर हमले किए और बड़ा नुकसान किया, जिसका सबूत सैटेलाइट तस्वीरों से मिला।

विदेश मंत्री एस जयशंकर, विदेश सचिव विक्रम मिसरी, और विदेश मंत्रालय (MEA) के दूसरे सीनियर अधिकारी दिल्ली में डिप्लोमैटिक ग्रुप और दुनिया भर में अपने समकक्षों के साथ सीमापार आतंकवाद और भारतीय ज़मीन पर हमलों को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की भूमिका पर बात की। वहीं भारत ने अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कई पार्टियों के पार्लियामेंट्री डेलीगेशन को विदेश भी भेजा।

क्या है प्रदर्शनी का मकसद?

असल में आने वाली प्रदर्शनी को तैयार करने वालों के मुताबिक, भारत का मकसद दुनिया को आतंक को बढ़ावा देने और फैलाने में पाकिस्तान की भूमिका की याद दिलाना है। भारत यह भी दिखाएगा कि कैसे न सिर्फ़ भारत, बल्कि पूरी दुनिया पाक आतंकी हमलों का शिकार हुई है। सिर्फ़ पहलगाम हमला ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान से भारत पर हुए दूसरे आतंकी हमलों को भी इस प्रदर्शनी में जगह मिलेगी।

पिछले साल 30 जून को पहलगाम के ठीक दो महीने बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र हेडक्वार्टर में ‘द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ़ टेररिज्म’ नाम की एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया था। संयुक्त राष्ट्र में भारत के परमानेंट मिशन द्वारा आयोजित इस प्रदर्शनी में विज़ुअल और टेक्स्ट डिस्प्ले के ज़रिए आतंकवाद के खतरनाक असर को दिखाया गया था। इसमें 1993 और 2008 के मुंबई बम धमाके, पुलवामा और उरी हमले, और कनिष्क एयर इंडिया बम धमाके जैसे बड़े हमले दिखाए गए थे।

प्रदर्शनी में साफ़ तौर पर आतंकी ग्रुप्स के नाम लिए गए, जिनमें पाकिस्तान में मौजूद और UN सिक्योरिटी काउंसिल द्वारा लिस्टेड ग्रुप्स भी शामिल थे। भारत ने स्टेट-स्पॉन्सर्ड आतंकवाद के मामलों में ग्लोबल अकाउंटेबिलिटी की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया। जयशंकर ने एकजुट होकर जवाब देने की अपील की और ज़ोर दिया कि कहीं भी आतंकवाद हर जगह शांति के लिए खतरा है।

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ईरान-इजरायल की जंग पिछले 18 दिनों से जारी है। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक इस युद्ध में अमेरिका ने अब तक 12 बिलियन डॉलर खर्च कर डाले हैं। पढ़ें पूरी खबर