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‘राम हमारे गौरव पुरुष, अयोध्या में उनका मंदिर बनना ही चाहिए’, बोले मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख ने ये बातें गुरुवार (18 अक्टूबर) को महाराष्ट्र के नागपुर में संगठन के विजयदशमी उत्सव के दौरान कहीं। कार्यक्रम में कैलाश सत्यार्थी और देवेंद्र फडणवीस भी शामिल हुए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत। (फोटोः टि्वटर/@RSSorg)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरआरएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि चाहे जो हो, अयोध्या में राम मंदिर बनना चाहिए। राम हमारे गौरव पुरुष हैं, उनका स्मारक होना ही चाहिए। सरकार इसे बनाने के लिए कानून लाए। संघ इस मसले पर साधु-संतों के फैसले के साथ हैं। उन्होंने ये बातें गुरुवार (18 अक्टूबर) को महाराष्ट्र के नागपुर में संगठन के विजयदशमी उत्सव पर कहीं।

संघ प्रमुख आगे बोले, “भारत जल्द ही विश्व गुरु बनेगा। भारत ही इकलौता देश है, जहां सत्य और अहिंसा की राजनीति होती है। पर देश को अपने शत्रुओं से सतर्क रहने और सेना व रक्षक बलों को संपन्न बनाने की जरूरत है। हम किसी से शत्रुता नहीं करते हैं। लेकिन हम इतने शक्तिशाली हैं कि कोई हम पर आक्रमण न कर सके। हम अपनी सुरक्षा के लिए किसी पर निर्भर नहीं है। मगर हमें सेना-सुरक्षाबलों का मनोबल घटने नहीं देना होगा। हमें सीमा और सेना को अधिक सुरक्षित व ताकतवर बनाना होगा।”

सुनें, कार्यक्रम में और क्या बोले भागवत-

आरएसएस मुखिया ने भाषण के दौरान पाकिस्तान पर भी निशाना साधा। कहा, “पड़ोस में भले ही सरकार बदल गई हो, मगर उन लोगों की नीयत में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।” उनके मुताबिक, भारत भी गोली का जवाब गोलियों से दे सकता है। पर हम बलवान होंगे, तो शांति भी होगी। कुछ लोग हमारे देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों का संबंध आतंकियों से है।

बकौल भागवत, “अनुसूचित जाति और जनजाति वर्गों के लिए बनी योजनाएं, उपयोजनाएं और कई तरह के प्रावधान लाए तो जाते हैं। लेकिन वे ठीक से लागू नहीं हो पाते, लिहाजा केंद्र और राज्य शासनों को इनके लिए अधिक तत्परता व संवेदना और पारदर्शिता दिखाने की जरूरत है।”

उन्होंने आगे कहा, “दृढ़ता से वन प्रदेशों और बाकी सुदूर इलाकों में दबाए गए हिंसात्मक गतिविधियों के कर्ता-धर्ता और पृष्ठपोषण करने वाले अब शहरी माओवाद के पुरोधा बनकर राष्ट्रविरोधी आंदोलनों में अग्रपंक्ति में दिखाई देते हैं।”

भागवत ने कहा कि समाज में हर किस्म की कमियों को दूर कर उसके शिकार हुए समाज के अपने बंधुओं को प्यार और सम्मान से गले लगाकर समाज में सद्भावपूर्ण और आत्मीय व्यवहार का प्रचलन बढ़ाना पड़ेगा। उन्होंने इसके अलावा कहा, “हमें अपनी भाषा, भोजन आदि में संस्कार देखने पड़ेंगे। घर के लोगों में हमें संस्कार डालने होंगे।”

भाषण के दौरान वह राम मंदिर के मसले पर भी बोले। कहा, “संघ इस मुद्दे पर साधु-संतों के साथ है। वे जो कदम उठाएंगे, हम उनके साथ हैं। राम हमारे गौरव पुरुष हैं। उनका स्मारक होना ही चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर जल्द से जल्द बनना चाहिए। उसमें किसी का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। चाहे जैसे हो मंदिर बनना चाहिए। सरकार कानून लाकर मंदिर बनाए।”

भाषण के दौरान उन्होंने पारिवारिक क्लेश जैसी चीजों से भी बचने की सलाह दी। कार्यक्रम में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी उपस्थित रहे।

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