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मसूद मुद्दे पर बाधा जारी रखी तो अन्य कदम उठाने पर मजबूर

सुरक्षा परिषद के एक राजनयिक ने चीन को असाधारण रूप से कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर चीन इस कार्य में बाधा पैदा करना जारी रखता है, तो जिम्मेदार सदस्य देश सुरक्षा परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं।

Author Published on: March 15, 2019 2:20 AM
मसूद अजहर। फोटो सोर्स : इंडियन एक्सप्रेस

आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव गिरने के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के राजनयिकों ने चीन को कड़ी चेतावनी दी है। चीन के वीटो से अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन का प्रस्ताव गिर गया। इसके बाद सुरक्षा परिषद के राजनयिकों ने चेताया कि अगर चीन इस मामले में बाधा पहुंचाना जारी रखता है तो जिम्मेदार सदस्य देश सुरक्षा परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं।
दूसरी ओर, इस मुद्दे पर चीन ने सफाई दी है कि इससे स्थाई हल तलाशने के लिए संबंधित पक्षों (भारत व पाकिस्तान) के बीच वार्ता में मदद मिलेगी। जबकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन के कदम पर निराशा जताई है और कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आतंकवाद के मुद्दे पर चीन को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने कहा कि हमारा फैसला समिति के नियमों के अनुसार है। चीन को उम्मीद है कि इस समिति के प्रासंगिक कदम संबंधित देशों की मदद करेंगे ताकि वे वार्ता एवं विचार-विमर्श करें और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए और जटिलता पैदा नहीं हो।  लु ने कहा कि संगठनों और व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित करने की प्रक्रियाओं को लेकर सुरक्षा परिषद 1267 समिति के स्पष्ट मानक हैं। चीन इन आवेदनों की पूर्ण और गहन जांच करता है और हमें अब भी और समय चाहिए इसीलिए हमने तकनीकी रोक लगाई है।

सुरक्षा परिषद के एक राजनयिक ने चीन को असाधारण रूप से कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, ‘अगर चीन इस कार्य में बाधा पैदा करना जारी रखता है, तो जिम्मेदार सदस्य देश सुरक्षा परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।’ एक अन्य राजनयिक ने कहा, ‘चीन ने सूची में अजहर को शामिल किए जाने के कदम को चौथी बार बाधित किया है। चीन को समिति को अपना वह काम करने से रोकना नहीं चाहिए, जो सुरक्षा परिषद ने उसे सौंपा है।’

संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में होने वाला विचार-विमर्श गोपनीय होता है और इसलिए सदस्य देश सार्वजनिक रूप से इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते। इस कारण दोनों राजनयिकों ने मीडिया से बातचीत में अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने का आग्रह किया। राजनयिकों के मुताबिक, ‘चीन का यह कदम आतंकवाद के खिलाफ लड़ने और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उसके स्वयं के बताए लक्ष्यों के विपरीत है।’ उन्होंने पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय आतंकवादी समूहों और उसके सरगनाओं को बचाने के लिए चीन पर निर्भर रहने को लेकर पाकिस्तान की भी आलोचना की।

चीन के वीटो पर अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शेरमैन ने कहा, ‘चीन ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र को उस जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने से रोक दिया, जिसने फरवरी में भारत में पुलवामा हमला किया था।’ हेरिटेज फाउंडेशन के जेफ स्मिथ, ‘द अमेरिकन इंडिया पब्लिक अफेयर्स कमेटी’ के अध्यक्ष जगदीश सेवहानी और अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सदानंद धूमे समेत अमेरिकी थिंक टैंक के कई सदस्यों ने भी चीन के इस कदम की निंदा की।

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