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भारत की पाक को दो टूक- सीमापार आतंकवाद को समर्थन देने की बात से न करें इंकार

विदेश सचिव एस जयशंकर ने पाकिस्तान के विदेश सचिव के आमंत्रण का जवाब देते हुए एक बार फिर पाकिस्तान द्वारा उसके कब्जे वाले कश्मीर पर अवैध कब्जे को जल्द से जल्द समाप्त करने की जरूरत पर बल दिया।

Author नई दिल्ली | August 26, 2016 9:49 PM
भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर। (पीटीआई फाइल फोटो)

भारत और पाकिस्तान के बीच वाक्युद्ध और तेज होने के बीच भारत ने शुक्रवार (26 अगस्त) को पाकिस्तान से कहा कि सीमापार आतंकवाद को समर्थन देने की बात से वह लगातार ‘इनकार’ नहीं करता रहे। विदेश सचिव एस जयशंकर ने बातचीत के लिए पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी के गत 19 अगस्त के ताजा आमंत्रण का जवाब देते हुए एक बार फिर पाकिस्तान द्वारा उसके कब्जे वाले कश्मीर पर अवैध कब्जे को जल्द से जल्द समाप्त करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने साथ ही कहा कि केवल भारत ही नहीं व्यापक क्षेत्र इस बात से अवगत है कि पाकिस्तान वास्तव में आतंकवाद का एक ‘प्रमुख साजिशकर्ता’ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि विदेश सचिव ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत पाकिस्तान से उसके द्वारा प्रोत्साहित सीमापार आतंकवाद और हिंसा भड़काने पर रोक के एजेंडे के साथ एक परिणामोन्मुखी वार्ता चाहता है।

जयशंकर ने इन मुद्दों पर परस्पर रूप से सुविधाजनक समय पर वार्ता के लिए उपलब्ध होने की अपनी सहमति व्यक्त की। हालांकि साथ ही यह भी उल्लेख किया कि आतंकवाद को जायज ठहराना और भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप परिणामोन्मुखी वार्ता के लिए शायद ही गंभीर आधार हैं। दक्षेस बैठक में वित्त मंत्री के मौजूद नहीं रहने के बारे में पूछे जाने पर जो कि संबंधों में बढ़ते तनाव का संकेत है, स्वरूप ने कहा, ‘आतंकवादियों को समर्थन, सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराना और अच्छे और बुरे आतंकवादियों के बीच अंतर करने से क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता को काफी खतरा पैदा हुआ है।’ स्वरूप ने कहा, ‘पाकिस्तान के लिए यह जरूरी है कि उसे वास्तविकता का अहसास हो और वह द्विपक्षीय संबंधों पर सीमापार आतंकवाद के पड़ने वाले प्रभाव के बारे में इनकार नहीं करता रहे। पाकिस्तान जितनी जल्दी इस मुख्य एवं महत्वपूर्ण तथ्य को समझेगा, उतनी जल्दी भारत और पाकिस्तान के संबंध में प्रगति होगी।’ पत्र में विदेश सचिव ने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान सरकार अपने रुख पर पुनर्विचार करेगी और अच्छे पड़ोसी का धर्म निभाएगा और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को प्रोत्साहित करने की दिशा में ईमानदारी दिखाएगा।

जयशंकर ने अपने पत्र में लिखा है, ‘इससे ऐसे क्षेत्र में भी एक व्यापक संदेश जाएगा जो पाकिस्तान से उत्पन्न होने वाली नीतियों से काफी परेशान है।’ स्वरूप ने कहा कि विदेश सचिव ने यह भी दोहराया कि दोनों देशों के बीच और चर्चा का आधार 1972 का शिमला समझौता, 1999 का लाहौर घोषणापत्र और 2004 का संयुक्त बयान है।’ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने इस्लामाबाद में पी-5 देशों और यूरोपीय संघ के देशों के राजदूतों को घाटी में स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए कश्मीर पर बातचीत का पाकिस्तान का प्रस्ताव भारत द्वारा वस्तुत: खारिज किए जाने पर ‘अफसोस जताया।’  पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, ‘राजदूतों के साथ अपनी बैठक में अजीज ने ‘बेगुनाह कश्मीरी लोगों के खिलाफ भारतीय बलों द्वारा घातक बल प्रयोग की निंदा की और कश्मीर में रक्तपात पर गंभीर चिंता व्यक्त की जिसमें गत आठ जुलाई 2016 से 80 से अधिक बेगुनाह कश्मीरियों की जान गई है तथा सात हजार से अधिक व्यक्ति घायल हुए हैं।’

दाउद इब्राहिम के पतों पर संयुक्त राष्ट्र के बयान पर प्रवक्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी के बारे में यह सूचना उससे जुड़े रिकॉर्ड को संयुक्त राष्ट्र की 1267 समिति निगरानी टीम की ओर से नवीनतम अद्यतन करने का परिणाम है जो अपने डेटाबेस में वैश्विक आतंकवादियों के रिकॉर्ड समय समय पर अद्यतन करती रहती है। उन्होंने कहा कि दाउद नामित सूची में एक वैश्विक आतंकवादी के तौर पर बना हुआ है, 1267 निगरानी समिति उसका पाकिस्तानी पासपोर्ट एक वैध दस्तावेज के तौर पर बरकरार रखे हुए है। संयुक्त राष्ट्र ने यह भी पुष्टि की है कि वह पाकिस्तान में रहता है कि और उसकी पाकिस्तान में सम्पत्तियां हैं और यह कि संयुक्त राष्ट्र उस पर नियमित तौर नजर रखे हुए है।

इस तथ्य के अलावा कि उसके पाकिस्तानी पतों की पुष्टि हुई है, कुछ रिकॉर्ड को भारत की ओर से मुहैया करायी गई जानकारी के परिणामस्वरूप अद्यतन किया गया है जैसे उसकी पत्नी का नाम, उसके पिता का नाम और उसके कई उपनाम। उन्होंने कहा, ‘भारत का यह लगातार कहना है कि पाकिस्तान के लिए यह जरूरी है कि वह इस वैश्विक आतंकवादी को उसके कई अपराधों के लिए मुकदमों का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करे जिसे उन्होंने काफी लंबे समय से सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करायी है। हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय राय पर ध्यान देगा।’ यह पूछे जाने पर कि क्या भारत यूएनजीए या यूएनएचआरसी में बलूचिस्तान का मुद्दा उठाएगा स्वरूप ने स्पष्ट किए बिना कहा, ‘भारत का देश में मानवाधिकार का मजबूत रिकॉर्ड रहा है और हम उस क्षेत्र में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों को लेकर स्वभाविक रूप से चिंतित है जिसका उल्लेख आपने किया है। इसे हमारी कूटनीति में किस तरह से व्यक्त किया जाता है, कुछ ऐसा है जिसे आपको इंतजार करके देखना होगा।’

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