अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले हफ्ते भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते की घोषणा की। ट्रंप ने दावा किया कि इस समझौते के तहत भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने पर भारत द्वारा लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को भी हटा दिया। इस सबके बीच सवाल यह है कि क्या भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है? क्या वह खरीद रोकेगा? डील के बाद भारत, अमेरिका दोनों ने इस मामले पर कोई स्पष्टता नहीं दी है। रूस की ओर से भी इस संबंध में कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं सामने आई है।

2 फरवरी को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की थी और दोनों नेता एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए, जिसके तहत अमेरिका भारत पर लगने वाले टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में यह भी दावा किया था कि पीएम मोदी रूसी तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका और वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं।

ट्रंप का दावा- भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कृषि और कोयले में 500 अरब डॉलर से अधिक के निवेश के अलावा, ज्यादा संख्या में अमेरिकी उत्पाद खरीदने के प्रति भी प्रतिबद्धता जताई है। शुक्रवार को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत रूस से ऊर्जा की खरीद पर भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत के टैरिफ को खत्म कर दिया गया है। अपने कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने इस दावे को दोहराया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा।

रूस से तेल खरीदने पर भारत का रुख

पिछले सप्ताह विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग के दौरान जब भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद पर रोक लगाने के बारे में आधिकारिक तौर पर पूछा गया तो प्रवक्ता रणधीर जायवाल ने कहा, “सरकार ने कई बार सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाजार की परिस्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्यों के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का मूल है। भारत के सभी निर्णय इसी बात को ध्यान में रखकर लिए गए हैं और आगे भी लिए जाएंगे।”

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि रिफाइनर कंपनियों को रूसी तेल खरीदना बंद करने के आधिकारिक आदेश नहीं मिले हैं लेकिन उन्हें अनौपचारिक रूप से खरीद कम करने के लिए कहा गया है। अधिकांश भारतीय रिफाइनर कंपनियां अपने मौजूदा ऑर्डर पूरे करेंगी लेकिन नए ऑर्डर नहीं देंगी। एचपीसीएल, एमआरपीएल और एचएमईएल जैसी कंपनियों ने पिछले साल अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया था। आईओसी और बीपीसीएल अपनी खरीद बंद करने की योजना बना रहे हैं। भारत की सबसे बड़ी खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज भी संभवतः 150,000 बैरल की अंतिम खेप प्राप्त करने के बाद खरीद बंद कर देगी।

‘भारत का रूसी तेल आयात घट रहा’

अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाने के बाद से भारत का रूसी तेल आयात घट रहा है। दिसंबर 2025 में आयात घटकर 12 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो मई 2023 में 21 लाख बैरल था। जनवरी में इसमें और गिरावट आई और यह घटकर 11 लाख बैरल रह गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह संख्या जल्द ही 10 लाख से नीचे आ जाएगी। हालांकि, रूसी तेल आयात की मात्रा में हाल ही में कमी के बावजूद, भारत द्वारा रूसी ऊर्जा खरीद को बंद करने के फिलहाल कोई संकेत नहीं हैं।

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