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कोरोनाः India TV के रजत शर्मा ने कहा- घर से निकलने से पहले 1 बार सोचें; PM-HM की रैली के फोटो-वीडियो शेयर कर बोले लोग- ये बात इन्हें कौन समझाए सर

इंडिया टीवी के पत्रकार ने लिखा "घर से निकलने से पहले एक बार सोचें, ऐसी कौन सी मजबूरी है जो ज़िंदगी से भी ज़्यादा ज़रूरी है।" इसपरन एक यूजर ने उन्हें ट्रोल करते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की रैली की तस्वीर शेयर कर लिखा लिखा " यह बात इनको कौन समझाए सर जी..."

India TV, Anchor, Rajat Sharma, Coronavirus, Twitter, Users, West Bengal Assembly Election 2021, Election Lover, Haridwar Kumbh, Election Commission, news and updates, news in hindiरजत शर्मा ने एक ट्वीट कर लोगों से घर में रहने की अपील की है। (source: twitter)

देश में कोरोना का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ और एंकर रजत शर्मा ने एक ट्वीट कर लोगों से घर में रहने की अपील की है। जिसके बाद यूजर्स उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की पश्चिम बंगाल की कुछ तस्वीरें दिखाकर ट्रोल कर रहे हैं।

इंडिया टीवी के पत्रकार ने लिखा “घर से निकलने से पहले एक बार सोचें, ऐसी कौन सी मजबूरी है जो ज़िंदगी से भी ज़्यादा ज़रूरी है।” इसपरन एक यूजर ने उन्हें ट्रोल करते हुए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की रैली की तस्वीर शेयर कर लिखा लिखा ” यह बात इनको कौन समझाए सर जी…” एक अन्य यूजर ने लिखा “कुंभमे 600 संतों को कोरोना हुआ इस का जिम्मेदार कौन? पश्चिम बंगाल में मोदीजी की रैली में हजारों लोग आए उन्हें कोरोना हुआ तो ज़िम्मेदारी किसकी।”

एक यूजर ने पीएम की रैलियों पर निशाना साधते हुए लिखा “प्रधानमंत्री का राज्यों के चुनाव में किसी भी पार्टी के लिए प्रचार करने जाना बैन होना चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री पूरे देश का होता है किसी एक दल या पार्टी का नहीं। आप अपनी राय अवश्य दें।” एक यूजर ने लिखा “दलाली करने से पहले एक बार सोचें, ऐसी कौन सी मजबूरी है जो इज्जत से भी ज़्यादा ज़रूरी है।”

मुन्ना पटेल एक यूजर ने लिखा “आज अगर कुछ पत्रकार दलाल नहीं हो गये होते सरकार के कमियों को समय समय पर उजागर किये होते तो यह हलात न होता हमे पत्रकार नहीं बनना पड़ता।” कुछ दिन पहले चुनावी रैलियां और कुंभ स्नान को लेकर रजत शर्मा ने एक ब्लॉग भी लिखा था।

एंकर ने सीधे तौर पर कुंभ के इंतजामों पर सवाल उठाते हुए कहा, “हरिद्वार कुंभ के दृश्य सभी देख सकते हैं। इस मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की जांच के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन की कोशिश नहीं की गई। आरटी-पीसीआर टेस्ट भी नहीं कराया गया। अब जबकि इतने सारे साधुओं और बड़े संतों की कोरोना रिपोर्ट पॉटिजिव आई है और कुछ ‘शाही स्नान’ बाकी हैं, तब उत्तराखंड शासन जनहित में मेला बंद करने का फैसला क्यों नहीं ले सकता?”

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