मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड ट्रेन को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। जापान 2030 के शुरुआत में भारत को अपनी सबसे हाई-स्पीड ट्रेन उपलब्ध कराएगा। यह ट्रेन अभी भी जापान में बनाई जा रही है। इस बीच हाई-स्पीड ट्रेन को लेकर भारत और जापान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है।

दोनों देश भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन के साथ ऑपरेशन शुरू करने पर सहमत हुए हैं। इधर भारत के बुलेट ट्रेन को लेकर सरकारी सूत्रों ने कहा कि प्रोजेक्ट का काम हाई-स्पीड प्रोजेक्ट को जल्द शुरू करने के साझा लक्ष्य के अनुरूप हो रहा है। ऐसे में यह जानना बेहद अहम हो गया कि जापान की लेटेस्ट E10 हाई-स्पीड क्या है और इसी खासियत क्या है?

जापान में अभी चल रही कौन-सी हाई-स्पीड ट्रेनें?

जापान में अभी E5 हाई-स्पीड ट्रेनें संचालित हो रही है। वह 2030 तक E10 हाई-स्पीड ट्रेनें विकसित कर लेगा, इसके बाद वह अपने यहां सभी E5 ट्रेनों को E10 से बदलेगा। इसी कड़ी के दौरान वह 2030 के शुरुआती सालों में भारत में भी अपनी यह हाई-स्पीड ट्रेन सौंप सकता है। भारत ने पहले जापान की E5 शिंकांसेन सीरीज की ट्रेनें खरीदने की योजना बनाई थी, लेकिन प्रोजेक्ट में खासा देरी के कारण उसने E10 खरीदने का मन बनाया। हालांकि बुलेट ट्रेन शुरुआती दिनों में भारत में भी E5 सीरीज की ही टेस्ट की जाएगी।

क्या है इस ट्रेन की खासियत?

जापान की आगामी E10 सीरीज शिंकानसेन एक नई पीढ़ी की बुलेट ट्रेन है, जिसे चेरी-ब्लॉसम से प्रेरित होकर डिजाइन किया गया है। यह 320 किमी प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से चलती है। इसकी मुख्य विशेषताओं में भूकंप-रोधी डिरेलमेंट गाइड, बिना ब्लोअर वाली शांत मोटरें और पुराने मॉडल्स की तुलना में कम दूरी में ब्रेक लगने की क्षमता शामिल है।

  • यह ट्रेन भूकंप आने की दशा में भी अपनी पटरी से नहीं उतरती, क्योंकि जापान ने इसमें एल-आकार के व्हीकल गाइड लगाए हैं, जो ट्रेन को ट्रैक पर लॉक रखते हैं और जमीन हिलने पर भी ट्रेन को पटरी से नहीं उतरने देंगे। साथ ही इस ट्रेन में लगे लेटरल डैम्पर जोरदार झटकों को भी कम करते हैं, जिससे सफर आरामदायक रहता है।
  • इस ट्रेन में बेहतर ब्रेकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, इसमें डिजिटल ब्रेकिंग सिस्टम लगे हैं, जो ट्रेन को 3.4 किमी में रोक देते हैं जबकि जापान के पुराने ट्रेनों में 4 किमी पर रोकते थे।
  • इस ट्रेन में शांत और एडवांस इंजन लगाए गए हैं। जिससे ट्रेन का सफर शांत रहता है। इसके इंजन में पंखे का इस्तेमाल न करते हुए ब्लोअर लेस इंडक्शन मोटर का इस्तेमाल किया है, जिसका मतलब है कि कम पार्ट्स, कम वजन और शांत राइड।
  • इस ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए हर लाइन में दो सीटों वाला खुला-खुला लेआउट, इन बिल्ड वर्क डेस्क, सभी सीटों पर चार्जिंग आउटलेट और व्हीलचेयर के लिए जगह दी गई है।
  • इस ट्रेन में बनी मॉड्यूलर जगह की वहज से ट्रेन कम भीड़-भाड़ वाले समय में माल और पार्सल ले जा सकती है।

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स्वदेशी बुलेट ट्रेन बी-28 का उत्पादन बंगलुरु में किया जाएगा। इन ट्रेनों का निर्माण सवारी डिब्बा कारखाना (आइसीएफ), चेन्नई और भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीइएमएल) मिलकर करेंगे। इन ट्रेनों के निर्माण के लिए ‘आदित्य’ विशेष परिसर तैयार किया गया है। शनिवार को बीइएमएल के तिप्पासांद्रा कैंपस के दौरे के दौरान केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च गति रेल के निर्माण के लिए समर्पित इस विशेष परिसर का उद्घाटन किया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें