प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर भारत और इंडोनेशिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इन समझौतों में भारत और इंडोनेशिया के बीच सबांग पोर्ट को विकसित करने को लेकर समझौता शामिल है।
सबांग पोर्ट मलक्का जलमार्ग के पास है। यह भारत के ग्रेट निकोबार पोर्ट प्रोजेक्ट से 100 मील दूर है। मलेशिया और इंडोनेशिया के बीच स्थित मलक्का जलमार्ग जलमार्ग के जरिए चीन अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए 80% कच्चा तेल लेकर जाता है।
EVM बनाने में मदद करेगा और मिसाइलें भी देगा भारत
न्यूज एजेंसी ANI ने बताया कि भारत इंडोनेशिया को खास EVM बनाने में मदद करेगा। इसके अलावा इंडोनेशिया ने भारत से अस्त्र मिसाइलें खरीदने का फैसला भी किया है। इंडोनेशिया अपने ब्रह्मोस भंडार को बढ़ा रहा है और भारत उसे और बैटरी सप्लाई करके मदद करेगा।
इसके अलावा भारत और इंडोनेशिया के बीच जरूरी मिनरल सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए के लिए समझौते हो सकते हैं। ANI ने यह भी बताया कि भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकेल और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के मैन्युफैक्चरिंग में निवेश करेगा।
और क्या -क्या समझौते हुए?
- भारत का UPI इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम के साथ जुड़ने जा रहा है।
- भारत इंडोनेशिया के साथ अपनी मिड-डे मील और PDS प्रणाली के समाधान साझा करेगा।
- इंडोनेशियाई को भारत लिए उच्च गुणवत्ता वाली और सस्ती भारतीय दवाएं उपलब्ध कराएगा। भारत इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता बढ़ाने में भी मदद करेगा।
- दोनों देश टिकाऊ खेती और कृषि-तकनीक से जुड़े बेहतरीन तौर-तरीके भी साझा करेंगे।
- AI, टेलीकम्युनिकेशन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों भी सहयोग बढ़ाने पर समझौता हुआ।
- स्टार्टअप सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमति बनी।
- इंडोनेशिया में IIM बैंगलोर का एक कैंपस खोलेगा।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान, तकनीक साझा करने और क्षमता निर्माण से जुड़े अहम फैसले हुए।
पीएम नरेंद्र मोदी बोले- ये सुनहरे अध्याय की शुरुआत
भारत और इंंडोनेशिया के बीच समझौतों के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत-इंडोनेशिया की साझेदारी में एक सुनहरे अध्याय की शुरुआत हो रही है। इस सुनहरे अध्याय का 21वीं सदी की दुनिया और पूरी मानवता पर गहरा सकारात्मक असर पड़ेगा। हमारे देशों के बीच बढ़ता भरोसा हमारे रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग को मजबूत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के कोस्ट गार्ड अब हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के लिए मिलकर काम करेंगे। दो करीबी समुद्री देशों के तौर पर भारत और इंडोनेशिया ने ब्लू इकोनॉमी, बंदरगाह विकास और समुद्री व्यापार में आपसी सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया है।
यह भी पढ़ें: भारत के लिए क्यों अहम है ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट?
यह प्रोजेक्ट क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता कम करने की जरूरतों को पूरा करने के लिए शुरू किया गया है। सरकार का यह भी कहना है कि सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पर्यावरणीय मंजूरी ली गई थी। साथ ही, द्वीप का बहुत छोटा हिस्सा ही इस्तेमाल किया जाएगा और पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण मौजूदा नेवी एयरपोर्ट के विस्तार का विचार छोड़ दिया गया था। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
