देश में सड़क गलियारों और उपरिगामी सेतुओं के बाद अब सुरंगों के जरिए जाम से राहत दिलाने की कवायद तेज होगी। केंद्र सरकार सुरंग बनाकर जाम वाले मार्गों को रफ्तार देने की तैयारी में है, क्योंकि देश में वाहनों के बढ़ते बोझ के कारण अब फ्लाइओवर पर भी जाम लगने लगे हैं।

सुरंगों के जाल के लिए केंद्र सरकार नार्वे की तकनीक का प्रयोग करेगी। इसके लिए भारत और नार्वे के बीच एक करार किया गया है। यह करार नार्वे के जियोटेक्निकल इंस्टिट्यूट (एनजीआई) के साथ हुआ है। इस पहल से भारत को जमीन के भीतर संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी मदद मिल सकेगी।

केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, देशभर में तेज रफ्तार गलियारे और फ्लाइओवर बनने के बाद भी जाम की समस्या बनी हुई है। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए अब जरूरी है कि देश में भूमि के नीचे कॉरिडोर बनाकर मार्गों को जाम से राहत दिलाई जाए।

उन्होंने बताया कि इसके लिए सरकार एक विस्तृत कार्य योजना (मास्टर प्लान) तैयार करने जा रही है। इस योजना के तहत देशभर के व्यस्त मार्गों पर भूमिगत मार्ग तैयार किए जाएंगे। जल्द ही सरकार इसका खाका सामने रखेगी।

दिल्ली-एनसीआर को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसी ही एक सुरंग महिपालपुर में शिव मूर्ति से नेल्सन मंडेला मार्ग तक तैयार की जाएगी। केंद्र सरकार यहां स्थायी तौर पर जाम से राहत दिलाने के लिए छह लेन वाली एक टनल बना रही है, जिस पर करीब सात हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।

नार्वे की ओर से भविष्य में सुरंग तैयार करने के लिए स्थल का विशिष्टीकरण, आगामी सुरंग परियोजनाओं का अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में मदद की जाएगी।

इनमें परिचालन सुरंगों का संरचनात्मक मूल्यांकन और सुरक्षा लेखा परीक्षा के साथ संभावित खतरों तथा उपयुक्त शमन प्रावधानों को भी शामिल किया जाएगा। आपात स्थिति में चेतावनी प्रणाली कैसे विकसित की जाएगी, इस कार्य में भी नार्वे की मदद ली जाएगी।

नार्वे को अत्याधुनिक सुरंग परियोजनाओं के लिए जाना जाता है

दरअसल, नार्वे को अत्याधुनिक सुरंग परियोजनाओं के लिए जाना जाता है। वहां समुद्र के नीचे बनने वाली रोगफास्ट सुरंग और तैरने वाली सुरंगें भी काम कर रही हैं। इसके अलावा ओस्लो सुरंग वहां की प्रमुख सुरंगों में शामिल है, जिसका उपयोग रेल कॉरिडोर के लिए किया जा रहा है।

देश के पहाड़ी राज्यों में टनल बनाकर यात्रा की दूरी कम की गई है, जहां कई अहम रेल परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। एजेंसियों का मानना है कि भूमिगत परिवहन योजनाओं का सबसे अधिक लाभ समतल क्षेत्रों को मिलेगा, जो लगातार जाम की समस्या से जूझ रहे हैं।

केंद्र सरकार भूमिगत परिवहन सेवाओं को रफ्तार देने में जुटी है। वहीं अत्यधिक जाम वाले सड़क क्षेत्रों और पहाड़ी इलाकों के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की जा रही है।

नार्वे की ओर से भविष्य में सुरंग निर्माण के लिए स्थल का विशिष्टीकरण, आगामी सुरंग परियोजनाओं का अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में तकनीकी सहयोग दिया जाएगा।

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देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से को जोड़ने वाली भारत माला योजना का करीब साढ़े चार हजार किलोमीटर का काम राज्य सरकारें पूर्ण नहीं कर पाई है। इस योजना को देश के सभी राज्यों के लिए शुरू किया था ताकि राज्यों के बीच के मार्ग का निर्माण कर आवागमन को आसान बनाया जा सके। केंद्र सरकार की रपट के मुताबिक, इस योजना का पहला चरण पूर्ण हो चुका है और इस चरण के लिए राज्यों के लिए जिन मार्गों को मंजूरी दी गई थी अब तक इन मार्गों को पूर्ण करने का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक