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नियंत्रण रेखा के उस पार से नहीं होगा कोई कारोबार

गृह मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला किया गया कि जम्मू और कश्मीर में सलमाबाद और चक्कन दा बाग के रास्ते नियंत्रण रेखा के आर-पार कारोबार को स्थगित किया जाएगा। इस बीच तमाम एजंसियों के साथ बातचीत कर कड़ी निगरानी के लिए एक तंत्र विकसित किया जाएगा।

भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा के उस पार से होने वाले सभी कारोबार पर 19 अप्रैल से रोक लगा दी है। गृह मंत्रालय ने गुरुवार शाम इस बाबत आदेश जारी किया।

भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा के उस पार से होने वाले सभी कारोबार पर 19 अप्रैल से रोक लगा दी है। गृह मंत्रालय ने गुरुवार शाम इस बाबत आदेश जारी किया। मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि सरकार को ऐसी सूचनाएं मिल रही थीं कि पाकिस्तान में बैठे अराजक तत्त्व और आतंकी अवैध हथियारों, मादक पदार्थों और नकली करंसी भेजने के लिए नियंत्रण रेखा के कारोबारी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे। गृह मंत्रालय ने आदेश में कहा कि राष्ट्रीय जांच एजंसी (एनआइए) के द्वारा की जा रही कुछ मामलों की जांच में इस बात का पता चला है कि इस रास्ते कारोबार करने वाले लोगों में पाकिस्तान की तरफ बड़ी तादाद उनकी है, जो आतंकवाद व अलगाववाद को भड़काने में शामिल प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से ताल्लुक रखते हैं।

गृह मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला किया गया कि जम्मू और कश्मीर में सलमाबाद और चक्कन दा बाग के रास्ते नियंत्रण रेखा के आर-पार कारोबार को स्थगित किया जाएगा। इस बीच तमाम एजंसियों के साथ बातचीत कर कड़ी निगरानी के लिए एक तंत्र विकसित किया जाएगा। समुचित इंतजाम किए जाने तक कारोबार पर रोक रहेगी। जम्मू और कश्मीर में नियंत्रण रेखा के उस पार से स्थानीय लोगों के बीच साझा इस्तेमाल की चीजों के आदान-प्रदान के लिए नियंत्रण रेखा से होकर कारोबार किया जाता है। यह कारोबार दो केंद्रों के जरिए होता है – सलमाबाद (उरी), जिला बारामूला और चक्कन दा बाग, जिला पुंछ। कारोबार हफ्ते में चार दिन होता है। यह वस्तु विनिमय प्रणाली पर आधारित है और कोई शुल्क भी नहीं लगता है।

नियंत्रण रेखा के आर-पार के लोगों की सहूलियत के लिए किए गए इस इंतजाम का गलत इस्तेमाल होने की खबरें आने लगी थीं। इस रास्ते से चोरी-छिपे विदेशी सामान भी भारत लाया जाने लगा था। साथ ही, हवाला के धन समेत अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं को भारत लाने के लिए यह रास्ता मुफीद साबित हो रहा था। एनआइए की जांच में पता चला कि कश्मीर के कुछ लोग पाकिस्तान चले गए, वहां आतंकी संगठनों में शामिल हो गए, कारोबारी कंपनियां खोल लीं और उन कंपनियों की आड़ में आतंकी मकसद को अंजाम देने लगे।

दरअसल, पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से तरजीही राष्ट्र का दर्जा वापस ले लिया। उसके बाद वहां से आने वाली वस्तुओं पर लगाया गया भारी कर चुकाने से बचने के लिए भी पाकिस्तानी कारोबारी नियंत्रण रेखा के दोनों रास्तों का इस्तेमाल करने लगे थे। खुफिया एजंसियों ने पाकिस्तानी कारोबारियों के इस रवैए के बारे में भी इनपुट दिए थे।

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