भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सिंधु जल संधि अब अपने पुराने स्वरूप में काम नहीं करेगी। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ सीमा पार से जारी आतंकवाद को खत्म करने के कोई संकेत नहीं दिए हैं जबकि इस संधि के तहत सहयोग फिर से शुरू करने के लिए ऐसा करना जरूरी है।
सूत्रों ने कहा कि अगर नदी जल बंटवारे से जुड़े प्रावधानों को फिर से लागू करना है, तो किसी अलग स्वरूप में ऐसा करना होगा और यह तभी संभव होगा जब पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करे।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद मोदी सरकार ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला किया था।
पानी का प्रबंधन नहीं कर सका पाकिस्तान
पाकिस्तान यह झूठा प्रचार फैलाने की कोशिश कर रहा है कि भारत द्वारा संधि को स्थगित रखने के फैसले के कारण जल संकट पैदा हो रहा है। जबकि, पाकिस्तान को मिलने वाले पानी का बड़ा हिस्सा उसके वहां भंडारण ढांचे की कमी, बड़े पैमाने पर पानी का रिसाव और उसके राज्यों के बीच चल रहे जल बंटवारे के झगड़ों के कारण बर्बाद हो जाता है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान ने अब तक बड़े पैमाने पर पानी इकट्ठा करने की कोई भी परियोजना शुरू नहीं की और ना ही जल प्रबंधन को लेकर कोई बड़े कदम उठाए।
1960 में किए गए थे हस्ताक्षर
भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर, 1960 को विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। संधि के तहत, भारत का पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलुज पर नियंत्रण है जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब का ज्यादातर पानी मिलता है हालांकि भारत को पश्चिमी नदियों के पानी के सीमित उपयोग का अधिकार भी हासिल है।
भारत सरकार के अफसरों के मुताबिक, एक संप्रभु राष्ट्र होने के नाते भारत को ऐसी किसी भी संधि में बने रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जो उसके हित में नहीं है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने को एक तरफा और गैरकानूनी बताया और कहा कि ऐसा करने से उसके देश के करोड़ों लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा।
इस तरह, भारत ने पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि मौजूदा हालात में और पाकिस्तान के द्वारा आतंकवाद को समर्थन जारी रखने को देखते हुए इस संधि को पहले की तरह जारी नहीं रखा जा सकता।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा और सिंधु जल संधि को लेकर किया गया समझौता भारत को मंजूर नहीं है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
