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डोकलाम में भारत ने नहीं कम किए सैनिक, चीन सीमा पर बंकर बनाने का काम शुरू

सेना का बंगाल इंजीनियरिंग ग्रुप बंकरों के निर्माण में बाकी लगा है। पुराने बंकरों की मरम्मत की जा रही है।

Author नई दिल्ली | August 3, 2017 02:02 am
चीन, भूटान व भारत की सीमा डोकलाम में मिलती है।

चीन के दावे को गलत बताते हुए भारत ने बुधवार को कहा कि उसने डोकलाम में अपने सैनिकों की संख्या नहीं घटाई है। चीन ने कहा था कि जिस स्थान पर तीनों देशों की सीमा मिलती है वहां भारतीय सुरक्षा जवानों की तादाद घटा दी गई है। भारतीय प्रवक्ता ने बुधवार रात जोर देकर कहा है बीते छह हफ्तों से डोकलाम में यथास्थिति बनी हुई है। इससे पहले बुधवार को चीन के विदेश मंत्रालय ने एक दस्तावेज जारी करते हुए कहा कि जुलाई के अंत में भारतीय सैनिकों की संख्या घटकर 40 रह गई जबकि जून में यह आंकड़ा 400 था। दस्तावेज में कहा गया, किसी समय लगभग 400 लोगों ने तीन तंबू ताने थे और चीनी क्षेत्र में 180 मीटर तक भीतर घुस आए थे। जुलाई माह के अंत तक भी लगभग 40 भारतीय जवान और एक बुलडोजर अवैध रूप से चीन के क्षेत्र में थे।

चीन के दावे के जवाब में यहां सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना के करीब 350 जवान बीते छह हफ्तों से डोकलाम में डटे हुए हैं, जब से चीन ने क्षेत्र में सड़क निर्माण की कोशिश की थी जिसके बाद तनातनी शुरू हुई थी। चीन ने यह भी कहा कि उसने भारत को अपने कड़े रुख की जानकारी दे दी है कि वर्तमान गतिरोध के समाधान के तौर पर भारत को तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे और डोकलाम से सैनिकों को वापस बुलाना ही होगा। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पिछले महीने कहा था कि किसी भी बातचीत से पहले दोनों पक्षों को अपने सैनिक वापस बुलाने होंगे।इस बीच भारत ने चीन की सरकार को बता दिया है कि सड़क निर्माण का मतलब है यथास्थिति में उल्लेखनीय बदलाव जिसके सुरक्षा संबंधी गंभीर प्रभाव हो सकते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पिछले महीने ब्रिक्स बाकी एनएसए बैठक में शामिल होने बेंिजंग गए थे।

उधर चीन का आरोप है कि भारत भूटान को एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। चीन और भूटान के विवाद में भारत न पड़े। इस मुद्दे को राजनयिक चैनल के जरिए बातचीत से हल करने पर भारत जोर देता रहा है। बुधवार को विदेश मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने डोकलाम को लेकर चीन, भारत और भूटान के बीच 2012 के समझौते की याद दिलाते हुए कहा कि तीनों देशों की जहां सीमाएं मिलती हैं, उस इलाके के बारे में किसी विवाद को लेकर तीनों देश बात करेंगे। एकतरफा फैसले को समझौते की अवमानना माना जाएगा।

 
चीन सीमा पर बंकर बनाने शुरू किए भारत ने

डोकलाम को लेकर भारत और चीन के बीच जारी तनातनी की खबरों के बीच भारत ने उत्तराखंड में चीन सीमा पर बंकर बनाने शुरू कर दिए हैं। उत्तराखंड के बाराहोती में चीनी सैनिकों द्वारा दो बार भारतीय सीमा में घुसपैठ करने और वहां भेड़ चरा रहे भारतीय चरवाहों को निकल जाने की धमकी दिए जाने के बाद सेना ने बंकर बनाने का फैसला किया है। सेना का बंगाल इंजीनियरिंग ग्रुप बंकरों के निर्माण में बाकी  लगा है। पुराने बंकरों की मरम्मत की जा रही है।

डोकलाम के अग्रिम मोर्चे पर पहले ही बंकर बनाए जा चुके हैं। इस इलाके में चीन ने सड़क निर्माण कार्य के नाम पर घुसपैठ की और यहांं पर भूटान की ओर बनाए गए पुराने बंकरों को नष्ट कर दिया था। भारतीय सेना के खाली पड़े दो बंकर भी नष्ट कर दिए थे। भारत ने घुसपैठ का विरोध किया, तो चीन ने मानसरोवर की यात्रा करने वाले यात्रियों के नाथुला दर्रे वाला मार्ग रोक दिया था। वहां चल रही खींचतान के बीच अब चीन ने उत्तराखंड के क्षत्र में घुसपैठ की। उत्तराखंड में 345 किलोमीटर लंबी सीमा चीन से लगती है। इसमें से 122 किलोमीटर उत्तरकाशी जिले में है। यह क्षेत्र समुद्रतल से 3800 से लेकर 4600 मीटर की ऊंचाई पर है।

चीन की हलचल को लेकर भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान नौ चैकियों के माध्यम से निगरानी करने में लगे हैं। चमोली के बाराहोती क्षेत्र में 25 जुलाई को चीनी सैनिकों घुसपैठ की थी। गौरतलब है कि वर्ष 1962 में इस क्षेत्र में दो गांव थे, जिनका नाम नेलांग व जादूंग था। सेना ने यहांं के हर्षिल, कारछा, नेलांग और अन्य स्थानों पर बंकर बनाए। सन 62 के बाद इन गांवों को विस्थापित किया गया था।

 

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