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रिपोर्ट: भारत में ठेकेदार के जरिए काम करने वाले लोगों की संख्या में 3 साल में 12 लाख का इजाफा

आईएसएफ की ओर से मंगलवार को जारी रपट में कहा गया है कि भारत फ्लेक्सी स्टाफिंग के मामले में दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा बाजार है और 2021 तक देश में ऐसे कर्मियों की संख्या 61 लाख हो जाएगी।

Author नई दिल्ली | Published on: June 18, 2019 8:20 PM
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में ठेकेदार के जरिए काम करने वाले लोगों की संख्या 2018 में 33 लाख हो गई। (प्रतीकात्मक तस्वीर- एक्सप्रेस फाइल फोटो)

देश में ठेकेदार के माध्यम से एक ही समयावधि में लगज अलग नियोक्ताओं को सेवाएं देने वाले फ्लेक्जी स्टॉफ या छु्ट्टा कर्मियों की संख्या 2018 में बढ़कर 33 लाख हो गयी। जबकि 2015 में ऐसे स्टॉफ की संख्या 21 लाख थी। इंडिया स्टाफिंग फेडरेशन की एक रपट में यह जानकारी दी गयी है। फ्लेक्सी स्टाफिंग में इजाफे को कार्यबल के उत्तरोत्तर संगठित होने का संकेत माना जा रहा है। ऐसे छुट्टा कर्मियों को संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की तरह अपने ठेकेदार से सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी भविष्य निधि, समूह बीमा, स्वास्थ्य बीमा आदि का लाभ मिलेगा।

इस व्यवस्था के तहत कर्मचारियों की सेवाएं लेने वाले नियोक्ताओं के लिए 44 श्रम कानूनों का पालन करना आवश्यक नहीं रह जाता है। सभी कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की जिम्मेदारी छुट्टे कर्मचारी सुलभ कराने वाले ठेकेदार (फ्लेक्सी कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली कंपनियों) की होती है। आईएसएफ की ओर से मंगलवार को जारी रपट में कहा गया है कि भारत फ्लेक्सी स्टाफिंग के मामले में दुनिया में पांचवां सबसे बड़ा बाजार है और 2021 तक देश में ऐसे कर्मियों की संख्या 61 लाख हो जाएगी।

रोजगार सृजन के लिए विशेषज्ञों से बातचीत करेंगे प्रधानमंत्री:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आर्थिक वृद्धि को गति देने तथा रोजगार सृजन के लिये आर्थिक नीति की रूपरेखा पर चर्चा के लिये प्रमुख अर्थशास्त्रियों तथा विशेषज्ञों के साथ शनिवार 22 जून को बैठक करेंगे। सूत्रों के अनुसार बैठक का आयोजन नीति आयोग कर रहा है। इसमें विभिन्न मंत्रियों, नीति आयोग के अधिकारी, प्रमुख अर्थशास्त्री, क्षेत्र के विशेषज्ञ और उद्योगपति शामिल होंगे।

यह बैठक हाल में जारी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के आंकड़े जारी होने के बाद हो रही है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के आंकड़े के अनुसार कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन के कारण 2018-19 की चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घटकर 5.8 प्रतिशत रही जो पांच साल का न्यूनतम स्तर है। कमजोर आर्थिक वृद्धि दर के कारण भारत इस मामले में चीन से पीछे हो गया है।

सीएसओ के आंकड़े में यह भी कहा गया है कि 2017-18 में बेरोजगारी 45 साल के उच्च स्तर 6.1 प्रतिशत पर पहुंच गयी। वित्त वर्ष 2018-19 में आर्थिक वृद्धि दर (2011-12 की कीमतों पर) भी पांच साल के न्यूनतम स्तर 6.8 प्रतिशत रही। इससे पिछले वित्त वर्ष 2017-18 में यह 7.2 प्रतिशत थी। बैठक इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि यह बजट से पहले हो रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पांच जुलाई को बजट पेश करेंगी।

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