भारत ने बुधवार को पाकिस्तान के नारोवाल इलाके में सौ साल पुराने एक हिंदू मंदिर को कथित तौर पर ढहा दिए जाने की कड़ी निंदा की और पाकिस्तानी सरकार से मांग की कि वह इस घटना की तुरंत जांच करे और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को पूरी तरह जवाबदेह ठहराए।
पाकिस्तान के लाहौर से लगभग 130 किलोमीटर दूर नारोवाल के सिराज गांव में स्थित मंदिर को कथित तौर पर 21 अगस्त को ध्वस्त कर दिया गया था। इसे लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों ने कहा है कि सौ साल से अधिक पुराना यह मंदिर भारी बारिश के बाद ढह गया।
तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए- भारत
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इन रिपोर्टों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आगे यह भी कहा कि पाकिस्तान को “अपवित्र किए गए मंदिर” को बहाल करने के लिए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए और अपने सभी अल्पसंख्यक नागरिकों व उनकी सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा, संरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने की अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए।
सौ साल पुराने मंदिर को तोड़े जाने पर चिंता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमने पाकिस्तान के नारोवाल जिले के सिराज गांव में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर के तोड़े जाने की परेशान करने वाली खबरों पर गहरी चिंता जताई है। हम पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के सौ साल पुराने पूजा स्थल के साथ की गई तोड़-फोड़ की इस निंदनीय हरकत की कड़ी निंदा करते हैं।”
रणधीर जयसवाल ने कहा, “अधिकारियों की साफ तौर पर दिख रही बेरुखी और इस सदी पुराने मंदिर की सुरक्षा न कर पाना चिंताजनक है।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसी घटनाएँ पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की लगातार बनी हुई “कमजोरी” और उनकी धार्मिक आजादी व पूजा-स्थलों के “घोर उल्लंघन” की “साफ याद दिलाती” हैं।
कट्टरपंथियों ने जानबूझकर मंदिर को ध्वस्त किया
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (पीएमएमपी), हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया है कि कट्टरपंथियों ने जानबूझकर मंदिर को ध्वस्त कर दिया और बाद में उसकी जमीन का इस्तेमाल पास के मदरसे के निर्माण के लिए किया गया। पीएमएमपी के अध्यक्ष असलम परवेज सहोत्रा ने पाकिस्तान सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि उन्होंने 28 अगस्त को पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव से मुलाकात की और कथित तौर पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक लिखित शिकायत सौंपी।
असलम परवेज सहोत्रा ने आरोप लगाया कि प्रतिबंधित धुर दक्षिणपंथी इस्लामी राजनीतिक दल तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के सदस्य विध्वंस में शामिल थे। उन्होंने आगे दावा किया कि मंदिर के शिखर से धातु के फिटिंग, ईंटें और अन्य सामग्री संरचना को गिराए जाने के बाद हटा दी गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर से सटी जमीन पहले इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) द्वारा एक मदरसे के लिए पट्टे पर दी गई थी, लेकिन बाद में किराया न चुकाए जाने और संपत्ति का उसके निर्धारित उद्देश्य के लिए उपयोग न किए जाने के कारण पट्टा रद्द कर दिया गया था।
कागजों में इस मंदिर का कोई नाम नहीं- पाकिस्तानी अधिकारी
हालांकि पाकिस्तानी अधिकारियों का बयान इससे बिल्कुल उलट है। समाचार एजेंसी के अनुसार, ईटीपीबी के वरिष्ठ अधिकारी राणा इफ्तिखार ने कहा कि मंदिर भारी बारिश के कारण ढह गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह मंदिर एक सदी से भी अधिक पुराना था।
उन्होंने कहा, “हमारे कागजों में इस मंदिर का कोई नाम नहीं है। हालांकि, यह बहुत पुराना मंदिर है… 100 से 125 साल से भी अधिक पुराना।” इफ्तिखार ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि बगल की जमीन एक मदरसे के लिए पट्टे पर दी गई थी, लेकिन मंदिर की अपनी संपत्ति पट्टे पर नहीं दी गई थी।
उन्होंने कहा, “मंदिर की जमीन किसी को भी पट्टे पर नहीं दी जाती है,” और साथ ही यह भी कहा कि ईटीपीबी के वरिष्ठ अधिकारी यह तय करेंगे कि ऐतिहासिक संरचना का जीर्णोद्धार किया जाना चाहिए या नहीं।
अधिकारियों को पहले ही जानकारी दी गई थी
असलम परवेज ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों को पहले ही इस स्थल से जुड़ी समस्याओं के बारे में चेतावनी दी गई थी। उन्होंने 29 जनवरी 2026 को जारी ईटीपीबी के एक आदेश का हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर मदरसे के पट्टे के अधिकार रद्द कर दिए गए थे और अवैध कब्जेदारो को बेदखल करने और संपत्ति को सील करने का निर्देश दिया गया था।
असलम परवेज ने आरोप लगाया, “लेकिन इस आदेश का पालन नहीं किया गया।” उन्होंने डीएसपी नारोवाल द्वारा जारी 11 अप्रैल की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें दावा किया गया था कि स्थानीय पुलिस मंदिर से संबंधित सुरक्षा चिंताओं और उसे नुकसान पहुंचने की संभावना से अवगत थी।
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