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कोरोना: आज भारत में 78,761 मामले, दुनिया भर में एक दिन में कहीं नहीं मिले इतने मरीज

भारत में अब तक कोरोना के कुल 35 लाख से ज्यादा केस हैं, संक्रमितों के मामले में देश अभी दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जबकि मौतों के मामले में चौथे स्थान पर।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | August 30, 2020 6:28 PM
India Coronavirus, COVID-19भारत में अब तक कोरोना के कुल 35 लाख केस आ चुके हैं, संक्रमितों के मामले में भारत अब सिर्फ अमेरिका और ब्राजील से ही पीछे है। (फोटो- अमित मेहरा/Indian Express)

भारत में शनिवार से रविवार के बीच कुल 78 हजार 761 केस सामने आए। यह दुनिया के किसी भी देश में एक दिन में नए मरीजों का रिकॉर्ड है। इसी के साथ अब दुनिया में कोरोना का केंद्र यूरोप और अमेरिका के बाद भारत की तरफ शिफ्ट हो गया है। दुनिया के दूसरे सबसे ज्यादा आबादी वाले देश में अब कोरोना के 35 लाख से ज्यादा केस हो गए हैं। संक्रमितों के लिहाज से अमेरिका और ब्राजील के बाद भारत का तीसरा नंबर पर है। बता दें कि भारत में पिछले चार दिनों से लगातार कोरोना के 70 से 80 हजार केस आ रहे हैं।

2020 में टल सकता है जनगणना और NPR
देश में कोरोनावायरस के चलते इस साल जनगणना और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) का संकलन टल सकता है। माना जा रहा है कि दोनों की प्रक्रियाओं को एक साल के लिए टाला जा सकता है। बता दें कि भारतीय जनगणना दुनिया में सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकी अभ्यास है। इसमें 30 लाख से भी ज्यादा अधिकारी देश के अलग-अलग हिस्सों में घर-घर जाकर लोगों की जानकारी इकट्ठा करते हैं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जनगणना फिलहाल आवश्यक नहीं है। अगर इसे एक साल के लिए टाल दिया जाता है, तो इसमें कोई समस्या नहीं है। गौरतलब है कि अभी एनपीआर और जनगणना को शुरू करने की तारीखों का ऐलान तक नहीं हुआ है। पहले इन दोनों को 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक कराए जाने की योजना थी। पर कोरोना की वजह से इन्हें टाल दिया गया।

रैपिड एंटीजन से बढ़ी टेस्टिंग, पर इनका भरोसा काफी कम
भारत में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, पर प्रति 10 लाख आबादी के मुकाबले देश में अभी भी टेस्ट्स की संख्या काफी कम है। वह भी तब जब जून से ही भारत में रैपिड एंटीजन टेस्टिंग शुरू की गई थी। इस टेस्ट में 50 फीसदी तक गलत नतीजे आ सकते हैं। ऐसे में भारत में कोरोना को रोकने की योजना लगातार सवालों के घरे में है। आईसीएमआर के निदेशक बलराम भार्गव के मुताबिक, देश में अभी रोज के 25 से 30 फीसदी टेस्ट रैपिड एंटीजन ही हैं।

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