India, Russia ink new nuclear-deal; Moscow most important defence partner, says PM Modi - Jansatta
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भारत में 12 परमाणु रिएक्टर लगाएगा रूस

रूस ने 2035 तक भारत में न्यूनतम 12 परमाणु रिएक्टर लगाने और यहां अत्याधुनिक हेलिकॉप्टरों के निर्माण पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने अपने रणनीतिक सहयोग को और गति देने के लिए तेल, गैस, रक्षा, निवेश और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति […]

रूस ने 2035 तक भारत में न्यूनतम 12 परमाणु रिएक्टर लगाने और यहां अत्याधुनिक हेलिकॉप्टरों के निर्माण पर सहमति जताई है। (फोटो: एपी)

रूस ने 2035 तक भारत में न्यूनतम 12 परमाणु रिएक्टर लगाने और यहां अत्याधुनिक हेलिकॉप्टरों के निर्माण पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने अपने रणनीतिक सहयोग को और गति देने के लिए तेल, गैस, रक्षा, निवेश और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दोनों देशों की सालाना शिखर बैठक में दोनों देशों के संबंधों को नए धरातल पर ले जाने का संकल्प किया। दोनों ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग का एक नया दृष्टिकोण तय किया। भारत के लिए रूस को शक्ति स्तंभ बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत के लिए यद्यपि विकल्पों का दायरा बढ़ा है, बावजूद इसके भारत का रणनीतिक भागीदार रूस देश का सबसे महत्वपूर्ण रक्षा सहयोगी बना रहेगा।

पुतिन के साथ करीब साढ़े तीन घंटे चली बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन और मैंने विभिन्न नई रक्षा परियोजनाओं के बारे में चर्चा की। हमने इस बात पर चर्चा की कि हम हमारे रक्षा संबंधों को मेक इन इंडिया समेत भारत की अपनी प्राथमिकताओं के साथ कैसे जोड़ सकते है। मुझे खुशी है कि रूस ने अपने अत्याधुनिक हेलिकॉप्टरों में से एक के भारत में पूरी तरह से बनाने की पेशकश की है। इसमें भारत से निर्यात की संभावना शामिल है। इसका सैन्य और असैन्य दोनों इस्तेमाल हो सकता है। हम इस पर जल्दी ही कदम बढ़ाएंगे।

परमाणु क्षेत्र में सहयोग का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि दोनों पक्षों ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग का महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण तय किया है और इसमें कम से कम 10 और परमाणु रिएक्टरों का निर्माण किया जाएगा। इन रिएक्टरों में सुरक्षा के विश्वस्तरीय उच्चतम मानक अपनाए जाएंगे। इसमें उपकरणों और कल-पुर्जों का भारत में निर्माण भी शामिल होगा।

परमाणु सहयोग पर रणनीतिक दृष्टिकोण के दस्तावेज में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने उन परमाणु बिजलीघरों के तेजी से क्रियान्वयन का निर्णय किया है जिन पर सहयोग की सहमति बनी है। दोनों पक्षों ने कुल 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिसमें परमाणु ऊर्जा, तेल व गैस, स्वास्थ्य, निवेश, खनन, मीडिया और पवन ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की बात कही गई है।

बातचीत को ‘ठोस’ बताते हुए पुतिन ने कहा कि रूस संयुक्त उच्च प्रौद्योगिकी परियोजनाओं में सहायता करेगा और एक भारतीय मोबाइल दूरसंचार सेवा कंपनी की स्थापना को सुगम बनाएगा। साथ ही उन्होंने भारत को रूस यात्री विमान बेचने की भी पेशकश की। उन्होंने कहा कि रूस और भारत का रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालीन सहयोग रहा है और दोनों देश सैन्य हार्डवेयर के संयुक्त रूप से उत्पादन के स्तर पर पहुंच गए हैं।

पुतिन ने संकेत दिया कि रूस भारत में सैन्य साजो सामान बनाने को लेकर अनिच्छुक नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल कार्यक्रम को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है और एक लड़ाकू जेट व बहुआयामी भूमिका वाले परिवहन विमान के निर्माण कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं।

बातचीत के दौरान भारत रूसी डिजाइन वाले परमाणु बिजलीघरों के निर्माण के लिए कुडनकुलम के अलावा किसी नई जगह की तेजी से पहचान करने पर भी सहमति दी गई।

भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए ऊर्जा सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताते हुए मोदी ने कहा कि दोनों देश तेल व प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में सहयोग के लिए महत्वकांक्षी एजंडा तय करेंगे। भारत की एस्सार और रूस की रोजनेफ्ट ने भी कच्चे तेल की दीर्घकालीन आपूर्ति के लिए समझौते किए। समझौते के तहत भारत 10 साल तक तेल खरीदेगा। प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया और रूसी न्यूज एजंसी तास ने भी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत खबरों के आदान-प्रदान में सहयोग किया जाएगा।

बाद में जारी संयुक्त बयान के मुताबिक दोनों नेताओं ने जम्मू और चेचन्या में आतंकवादी हमलों में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की और उम्मीद जताई कि बिना किसी देरी के आतंकवादियों के लिए सभी सुरक्षित पनाहगाह और शरणस्थलों को समाप्त किया जाएगा और एक दशक में साझा क्षेत्र से आतंकवाद के पूरी तरह सफाया हो जाएगा।

दोनों नेताओं ने रेखांकित किया कि ‘अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ समय और माल ढुलाई लागत में कमी लाकर द्विपक्षीय व्यापार की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है। उन्होंने कहा कि गलियारा ईरान के रास्ते गुजरेगा। दोनों पक्षों ने भारत और रूस के बीच हीरे के सीधे व्यापार को बढ़ावा देने के मामले में हुई प्रगति पर संतोष जताया। मोदी और पुतिन आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए प्रयास तेज करने पर सहमत हुए और 2025 तक 30 अरब डालर के वस्तुओं व सेवाओं के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा। संयुक्त बयान में कहा गया है कि ऐसी उम्मीद है कि तब तक द्विपक्षीय निवेश दोनों तरफ से 15-15 अरब डालर से अधिक हो जाएगा।

दोनों देशों ने कहा कि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना दोनों देशों के हित में है। रूस ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की पूर्ण सदस्यता को लेकर अपने समर्थन की पुष्टि की। साथ ही प्रक्षेपास्त्र प्रौद्योगिकी नियंत्रण संधि और वासेनार संधि में भी भारत की सदस्यता के प्रस्ताव का समर्थन किया है। दोनों पक्ष कुछ प्रकार के व्यक्तियों के एक-दूसरे के यहां की यात्रा के लिए वीजा नियमों को आसान बनाने पर भी सहमत हुए हैं। इसमें व्यवसायियों के लिए वीजा भी शामिल है। इससे जनता के स्तर पर संपर्क और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

 

 

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