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आज 41 के होते मेजर उन्‍नीकृष्‍णन: पिता को ऐसे मिली थी मौत की खबर, मां से यह कह कर छिपाई बेटे की मौत की बात

संदीप के पिता के. उन्नीकृष्णन को एक वक्त में बेटे का फौजी बनना पसंद नहीं था। एक इंटरव्यू में वह कहते हैं, "मुझे पता था यही होने वाला है, मैं संदीप का सबसे अच्छा ऑब्जर्बर था, मैंने और उसकी मां ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं माना।"

मेजर संदीप उन्नीकृष्णन संदीप को शांति के समय में दिया जाने वाले सबसे बड़े अवॉर्ड अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

मेजर संदीप उन्नीकृष्णन आज (15 मार्च) अपना 41वां जन्मदिन मन रहे होते। लेकिन एनएसजी कमांडो का यह सुपर कमांडो आखिरकार एक शहीद का दर्जा पाकर भारत मां के सपूतों में शुमार हो गये। 26 नवंबर 2008 को मुंबई के ताज होटल पर हुए हमले में पाकिस्तानी आतंकियों का सामना करते हुए वह शहीद हुए थे। आज 41वीं जयतीं पर हिन्दुस्तान उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है। पिछले नौ सालों से देश ने उनकी जिंदगी, उनकी वीरता की कई कहानियां सुनी। उन्हें याद किया। कई मां-बाप ने संदीप जैसे लाल की कामना की। लेकिन संदीप के पिता के. उन्नीकृष्णन को एक वक्त में बेटे का फौजी बनना पसंद नहीं था। एक इंटरव्यू में वह कहते हैं, “मुझे पता था यही होने वाला है, मैं संदीप का सबसे अच्छा ऑब्जर्बर था, मैंने और उसकी मां ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं माना।” फौज के प्रति संदीप की दीवानगी को बताते हुए उनके स्कूल फ्रैंक एंथनी पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल कहते हैं, “स्कूल में भी वह अपने बाल कमांडो जैसा रखा करता था।” संदीप के संगीत शिक्षक कहते हैं कि वह अक्सर मुझे कहा करता था कि वह 30 साल से ज्यादा नहीं जिंदा नहीं रहने वाला है।

संदीप के पिता के उन्नीकृष्णन सीएनएन आईबीएन को दिये एख इंटरव्यू में उस मनहूस रात के बारे में बताते हैं जब उन्होंने अपने बेटे से आखिरी बार बात की थी। के उन्नीकृष्णन कहते हैं, ” 26 की रात को 11 बजकर 15 मिनट पर उसने मुझे कॉल किया, नॉर्मली वह कभी भी कॉल करता था, उसने-डैड बॉम्बे में कुछ हो रहा है, कुछ फायरिंग हो रही है, 10 मिनट के बाद मैंने देखा एटीएस चीफ के डेथ की खबर सुनी, मैं चकित रह गया था, मेरे दिमाग में उस समय ये नहीं आया कि मैं उससे पूछूं कि तुम जा रहे हो कि नहीं। इसके बाद हमलोग सो गये। 28 तारीख की सुबह हमलोगों ने फिर से टीवी स्विच ऑन किया। रीडर खबरें खत्म कर रही थी। वह खबर की अंतिम लाइन पढ़ रही थी- बुरी खबर ये है कि एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन शहीद हो गये हैं।” संदीप के पिता आगे कहते हैं, “मैंने इसे पूरा सुना, मुझे लगा कि मेरी ऊर्जा बाहर जा रही है, मुझे कुछ हो रहा है, मैंने अपनी पत्नी की ओर देखा वह किचन में थी, मैंने उसे कहा कि टीवी पर अभी संदीप उन्नीकृष्णन का नाम सुना वह चिल्लाने लगी, फिर मैंने उसे कहा- वह ऑपरेशन लीड कर रहा है, मैंने झूठ बोला”

बता दें कि मुंबई हमले के बाद ऑपरेशन ब्लैक टोरनेडो का मोर्चा संभालते हुए मेजर संदीप उन्नीकृष्णन अपने 10 कमांडो साथियों के साथ ताज होटल के छठे फ्लोर पर पहुंचे थे। यहां पर उन्होंने 14 बंधकों को आतंकवादियों के चंगुल से रिहा करवाया। इसी दौरान एक आतंकी से उनका सामना हुआ। इसी दौरान उनके एक सहयोगी को गोली लगी। वह उसे बचा रहे थे कि एक दूसरे आतंकी ने उन्हें पीछे से गोली मार दी। संदीप को शांति के समय में दिया जाने वाले सबसे बड़े अवॉर्ड अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। उनके प्रशस्ति पत्र में उनकी बहादुरी कुछ इन शब्दों में लिखी है, “ऑपरेशन के दौरान उनकी टीम फायरिंग के चपेट में आ गई, इसमें उनका एक साथी घायल हो गया, मेजर संदीप ने उस आतंकी को टारगेट किया और उसे ढेर कर दिया, और अपने साथी को सुरक्षित ठिकाने तक पहुचाया, इसी दौरान उन्हें दाहिन बांह में गोली लगी, अपने चोट के बावजूद वह आखिरी सांस तक लड़ते रहे।” एनएसजी के अधिकारी बताते हैं कि होटल ताज में तीसरे फ्लोर पर मेजर संदीप जब आतंकियों से भिड़े हुए थे, तब उनकी टीम के कुछ दूसरे कमांडो उनकी मदद के लिए वहां आना चाह रहे थे। लेकिन दिलेर संदीप ने उन्हें कहा, “उपर मत आना, मैं उन्हें संभाल लूंगा।” मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता एक इंटरव्यू में कहते हैं, ‘मुझे हमेशा लगता है कि मैं उसे थोड़ा और गाइड कर पता, मैं उसे स्वार्थी होने का भी मतलब समझा पाता।”

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