भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान और यूरोपीय यूनियन द्वारा संयुक्त बयान में जम्मू कश्मीर के जिक्र पर कड़ी आपत्ति जताई है, विदेश मंत्रालय ने कहा कि जिन लोगों को भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने का अधिकारी नहीं हैं, उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए।

सोमवार को यूरोपीय यूनियन की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काला कल्लास और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने यूरोपीय संघ-पाकिस्तान रणनीतिक वार्ता के आठवें दौर के तहत इस्लामाबाद में संयुक्त रूप से मीडिया को संबोधित किया।

पाकिस्तान और यूरोपीय यूनियन ने क्या कहा था?

काला कल्लास ने और इशाक डार ने मुख्य रूप से ईरान युद्द का जिक्र किया, जबकि पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री ने पिछले साल हुए भारत के साथ संघर्ष का जिक्र किया, जो स्पष्ट रूप से ऑपरेशन सिंदूर की ओर इशारा था और कश्मीर का मुद्दा भी उठाया।

पाकिस्तान और यूरोपीय यूनियन की ओर से संयुक्त बयान में कहा गया, “पाकिस्तान ने जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर जानकारी दी और यूरोपीय यूनियन ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध पर जानकारी दी। दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार संवाद और कूटनीति के जरिए से संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए समर्थन व्यक्त किया।”

विदेश मंत्रालय ने अनुचित मांगों को किया खारिज

मंगलवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हम भारत के आंतरिक मामलों में सयुंक्त प्रेस विज्ञप्ति में किए गए ऐसे अनुचित उल्लेखों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हैं। जम्मू कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं। जिन्हें ऐसे मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं, उन्हें ऐसा करने से बचना चाहिए।”

चीन और पाकिस्तान भी कर चुका ये हिमाकत

यह पहली बार नहीं है जब विदेश मंत्रालय ने जम्मू और कश्मीर के अनुचित संदर्भों पर प्रतिक्रिया दी है। 26 मई को चीन और पाकिस्तान की ओर से जम्मू कश्मीर का जिक्र करते हुए भी एक संयुक्त बयान जारी किया गया था, जिस पर एमईए ने कहा था, “भारत, चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू और कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश के अनुचित संदर्भों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।”

आगे रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत का रुख स्पष्ट है और संबंधित पक्षों को भली-भांति पता है। जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेंगे। किसी अन्य देश को इस पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।”

यह भी पढ़ें: ‘दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करें?’, विदेश मंत्रालय ने नॉर्वे के पत्रकारों को दिया करारा जवाब

नॉर्वे के ओस्ले शहर में भारतीय अधिकारियों की ओर से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें भारतीय विदेश सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने नार्वे के पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया। इस दौरान एक पत्रकार ने सवाल किया, “हम आप पर भरोसा क्यों करें? क्या आप भारत में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकने का वादा करते हैं” “क्या PM भारतीय प्रेस के मुश्किल सवालों के जवाब देंगे?” पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें