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मुद्रा कोष : भारत-बांग्लादेश की तुलना पर उठे सवाल

आइएमएफ की रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश ने अपना निर्यात तेजी से बढ़ाया है तो वहीं भारत के निर्यात की स्थिति उसके अपने ही पिछले रिकॉर्ड की तुलना में बहुत अच्छी नहीं है। इसकी वजह से जहां पिछले पांच साल बांग्लादेश की वार्षिक वृद्धि दर 9.1 फीसद रही तो वहीं भारत की वृद्धि दर केवल 3.2 फीसद ही रही।

आईएमएफ ने जीडीपी के अपने आकलन में भारत को बांग्लादेश से पीछे बताया है।

अर्थशास्त्रियों के आकलन के आंकड़े कई बार हैरान कर देते हैं। हाल में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने सकल घरेलू उत्पाद विकास(जीडीपी ग्रोथ) के आकलन जारी किए हैं, जिसके मुताबिक, प्रति व्यक्ति जीडीपी के मामले में इस साल बांग्लादेश से पिछड़ने वाला है। बांग्लादेश का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद का आंकड़ा चार फीसद बढ़कर 1888 डॉलर हो जाएगा, जबकि भारत का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 10.5 फीसद बढ़ कर 1877 डॉलर रह जाएगा।

आइएमएफ ने हाल में आंकड़े जारी किए, जिनके मुताबिक, भारत की जीडीपी में 10 फीसद से अधिक की गिरावट आएगी, जबकि कुछ माह पहले आइएमएफ ने भारत की जीडीपी में 4।5 फीसद की गिरावट का अनुमान लगाया था। जिस बात ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा है, वह है बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी का आंकड़ा। आइएमएफ के अनुमान के मुताबिक 2020 में एक औसत बांग्लादेशी नागरिक की प्रति व्यक्ति आय एक औसत भारतीय नागरिक की आय से अधिक होगी।

आमतौर पर, देशों की तुलना जीडीपी विकास दर या पूर्ण जीडीपी के आधार पर की जाती है। आजादी के बाद के अधिकांश बार इन दोनों गणनाओं पर भारत की अर्थव्यवस्था बांग्लादेश से बेहतर ही रही है। भारत की अर्थव्यवस्था बांग्लादेश से 10 गुना बड़ी है और हर साल तेजी से बढ़ी है। हालांकि, प्रति व्यक्ति आय में एक और कारक शामिल है। कुल जनसंख्या। कुल जनसंख्या लारा कुल जीडीपी को विभाजित करके जीडीपी निकाली जाती है। जहां तक आइएमएफ के ताजा आंकड़ों की बात है, बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में 2004 के बाद से तेजी से जीडीपी की वृद्धि दर देखी जा रही है। हालांकि, इस गति ने 2004 और 2016 के बीच दो अर्थव्यवस्थाओं के सापेक्ष बड़ा बदलाव नहीं किया क्योंकि भारत, बांग्लादेश की तुलना में और भी तेजी से बढ़ा।

दूसरा सबसे बड़ा कारण जनसंख्या वृद्धि दर है। 15 साल की अवधि में भारत की जनसंख्या 21 फीसद तेजी से बढ़ी है। इन दोनों कारकों के संयुक्त प्रभाव से समझा जा सकता है कि प्रति व्यक्ति जीडीपी का अंतर कोविड- 19 से पहले ही काफी हद तक तय था। 2007 में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत के मुकाबले आधी थी। यह 2014 में भारत की 70 फीसद थी और यह अंतर पिछले कुछ साल में तेजी से खत्म होता गया।

तात्कालिक कारक 2020 में अर्थव्यवस्था पर कोविड -19 का सापेक्ष प्रभाव रहा। भारत की जीडीपी में 10 फीसद की कमी आई है जबकि बांग्लादेश की चार फीसद बढ़ने की उम्मीद है। क्या पहले कभी ऐसा हुआ है? हां, 1991 में जब भारत एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा था तब केवल एक फीसद से अधिक की वृद्धि हुई, बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी भारत से आगे बढ़ गई फिर भी भारत ने दोबारा बढ़त बनाई।

सवाल यह उठता है कि क्या भारत को फिर से बढ़त हासिल करने की उम्मीद है? जवाब है, हां। आइएमएफ के अनुमानों से ही पता चलता है कि भारत में अगले साल प्रति व्यक्ति जीडीपी तेजी से बढ़ने की संभावना है। बांग्लादेश की कम जनसंख्या वृद्धि और तेज आर्थिक विकास को देखते हुए भारत और बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय के मामले में होड़ तेज होने की संभावना है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल वैश्विक वृद्धि की दर केवल 4.4 फीसद तक सिमट कर रह जाएगी और साल 2021 में यह 5.2 फीसद हो जाएगी। इस साल नेपाल और भूटान की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के आसार हैं, जबकि आइएमएफ ने पाकिस्तान के साल 2020 और उसके आगे के आंकड़ों का खुलासा नहीं किया है।

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