प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद में कहा कि भारत विकास का रास्ता अपनाता है, विस्तारवाद का नहीं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के विस्तारवादी रवैये को लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ती चिंताओं के बीच उनका यह बयान बेहद अहम माना जा रहा है।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और वरिष्ठ मंत्रियों सहित सांसदों को संबोधित करते हुए मोदी ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और बढ़ाने का आह्वान किया और कहा कि जब भारत के 140 करोड़ लोग और इंडोनेशिया के 29 करोड़ नागरिक मिलकर साझा समृद्धि के लिए आगे बढ़ेंगे तो दुनिया इतिहास बनते हुए देखेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ”भारत एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत का पुरजोर समर्थक है। भारत हिंद-प्रशांत में नौवहन की स्वतंत्रता में विश्वास करता है।” उन्होंने कहा, ”भारत एक ऐसा देश है जो विकास के रास्ते पर चलता है, विस्तारवाद के नहीं।”

अपने संबोधन में पीएम नरेंद्र मोदी ने 1950 के दशक से भारत-इंडोनेशिया संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर बात की, जिसमें यह भी शामिल था कि कैसे दोनों देशों ने 1955 के प्रसिद्ध बांडुंग सम्मेलन में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में दोनों पक्षों के लिए ‘असीमित अवसर’ मौजूद हैं।

इंडोनेशिया द्वारा आयोजित 1955 के बांडुंग सम्मेलन में विश्व शांति को बढ़ावा देने और नव-स्वतंत्र देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए 29 एशियाई और अफ्रीकी देशों के नेता एक साथ आए थे। इसे व्यापक रूप से शीत युद्ध के दौरान गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखने वाला माना जाता है।

आइए आपको बताते हैं पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण की बड़ी बातें:

  1. पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ”भारत और इंडोनेशिया के लिए, समुद्र कभी भी दूरी पैदा करने वाला नहीं रहा है। यह हमेशा हमारे देशों के बीच एक सेतु रहा है और हमारे साझा भविष्य के केंद्र में बना हुआ है।”
  2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ”जब भारत और इंडोनेशिया एक साथ खड़े होते हैं, तो वे दुनिया के इस विश्वास को मजबूत करते हैं कि लोकतंत्र अवसर पैदा करता है, लोकतंत्र विश्वास बनाता है और लोकतंत्र भविष्य को आकार देता है।”
  3. पीएम मोदी ने कहा कि भारत, इंडोनेशिया और हिंद महासागर ऐसे नाम हैं जो दोनों देशों को जोड़ने वाले गहरे संबंधों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, ”भारत और इंडोनेशिया के बीच जो सद्भावना और विश्वास है, उससे हमारे नागरिकों के लिए नए अवसर पैदा होने चाहिए।”
  4. प्रधानमंत्री ने संयुक्त कार्य समूह के मौजूदा ढांचे के तहत दोनों देशों के बीच आतंकवाद-रोधी सहयोग के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया साइबर खतरों, आतंकवाद के वित्तपोषण और कट्टरपंथ का मुकाबला करने के लिए सहयोग बढ़ाकर शांति-पसंद ताकतों को मजबूत कर सकते हैं।
  5. मौजूदा भूराजनीतिक माहौल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार में अब और देरी नहीं की जा सकती।

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