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3488 KM LAC के साथ-साथ समुद्री सीमा में भी बढ़ी मुस्तैदी, गठन के 19 साल बाद पहली बार अंडमान निकोबार कमांड को दी जा रही मजबूती

भारत लद्दाख में हुई चीनी सेना की घुसपैठ की कोशिश बाद से ही जमीन और हवा के साथ समुद्री क्षेत्र में भी चौकसी बढ़ा रहा है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: July 4, 2020 1:27 PM
India, China, Andaman and Nicobar Command, Navyभारत ने चीन का सामना करने के लिए अंडमान-निकोबार कमांड को किया एक्टिव।

India-China Tension: भारत ने लद्दाख सीमा के पास चीन की तरफ से अचानक हुई घुसपैठ के बाद चौतरफा तैयारियां शुरू कर दी हैं। जहां एलएसी पर पहले ही चीन का आमना-सामना करने के लिए आर्मी जवानों और हथियारों की तैनाती की गई है, वहीं वायुसेना ने भी विमानों और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के जरिए सीमा सुरक्षित करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस बीच भारत अब समुद्री जंग के लिए भी तैयारियां करने में जुटा है। सरकार अब अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के जरिए चीन को सीमित करने पर ध्यान दे रही है।

रिपोर्ट्स की मानें तो केंद्र सरकार ने 19 साल पहले गठित हुए अंडमान-निकोबार कमांड (ANC) को फिर से एक्टिव करने का निर्णय लिया है। सेना यहां चीन के विस्तारवादी नीति का सामना करने के लिए तेजी से सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में जुटी है। जानकारी के मुताबिक, एएनसी देश की पहली और एकमात्र कमांड है जिसमें थल, वायु और नौसेना तीनों का ही एक ऑपरेशनल कमांडर है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में इस कमांड की अनदेखी हुई है। कभी कम फंड मुहैया होने से या कभी पर्यावरण संबंधी कारणों से से इस कमांड को इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में कोई खास फायदा नहीं हुआ।

हालांकि, मौजूदा सरकार खतरे को देखते हुए चीन की नौसैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए इस कमांड को फिर से मजबूत करना चाहती है। गौरतलब है कि चीन दूसरे देशों से तेल का बड़ा हिस्सा हिंद महासागर में स्थित मलक्का जलडमरूमध्य से ही लाता- ले जाता है। इसके अलावा यह उसका बड़ा व्यापार रूट भी है। भारत एएनसी कमांड को मजबूत कर चीन के लिए यह मार्ग काफी कठिन बना सकता है। जंग की स्थिति में चीन की सप्लाई काटने में भी यह मार्ग अहम हो सकता है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि अंडमान-निकोबार कमांड को लद्दाख तनाव शुरू होने के बाद ही एक्टिव कर दिया गया, अभी इस कमांड के लिए कुछ योजनाओं पर विचार किया जा रहा है। पूर्वी अंडमान के शिबपुर में नेवल एयर स्टेशन आईएनएस कोहासा के रनवे को बढ़ाने और जमीन मुहैया कराने के लिए भी काम हो रहा है।

इसके अलावा भारत इस क्षेत्र में अतिरिक्त युद्धपोत, फाइटर जेट, मिसाइल बैट्री और थलसेना को तैनात कर सकता है। इसके लिए सरकार ने अंडमान पर 10 साल का इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू किया गया है। यह प्लान 5650 करोड़ रुपए का है और इसमें कमोरता द्वीप तक के लिए 10 हजार फिट का एयर एन्कलेव रनवे बनाने का भी प्रस्ताव है।

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