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पाकिस्तान दौरे के बाद नई दिल्ली आना चाहते थे चीनी विदेश मंत्री, भारत ने कर दिया मना

भारत का मानना है कि वह किसी और देश को भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर दखल नहीं देना चाहता और ऐसे प्रयासों से बचना चाहता है। इसका तात्पर्य यह है कि कोई भी विदेशी नेता संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश किए बिना, एक स्टैंडअलोन यात्रा पर नई दिल्ली आ सकता है।

इस्लामाबाद के दौरे के बाद वांग यी वहां से भारत आना चाहते थे लेकिन भारत की तरफ से उन्हें मना कर दिया गया। (PTI)

चीन के विदेश मंत्री वांग यी पाकिस्तान दौरे के बाद इस सप्ताह के अंत में नई दिल्ली आना चाहते थे लेकिन भारत ने विनम्रतापूर्वक उन्हें मना कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक उनसे अपनी भारत यात्रा को पुनर्निर्धारित करने को कहा है। जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीने जाने के बाद पाकिस्तान के चिल्लाहट के बीच वांग यी 7 सितंबर को इस्लामाबाद के दौरे पर हैं। इस्लामाबाद के दौरे के बाद वांग यी वहां से भारत आना चाहते थे लेकिन भारत को लगा कि इससे भारत-पाक के संबंध पर असर पड़ेगा जिसके बाद भारत ने उन्हें अपनी यात्रा को रिशेड्यूल करने को कहा। हालांकि सूत्रो का कहना है कि चीनी मंत्री के इस साल होने वाली यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

भारत का मानना है कि वह किसी और देश को भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर दखल नहीं देना चाहता और ऐसे प्रयासों से बचना चाहता है। इसका तात्पर्य यह है कि कोई भी विदेशी नेता संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश किए बिना, एक स्टैंडअलोन यात्रा पर नई दिल्ली आ सकता है। सूत्रों ने यह भी बताया कि कई अन्य देश के नेताओं की भी यात्रा को लेकर कहा गया है कि अगर पाकिस्तान दौरे के साथ उनकी भारत यात्रा है तो वह भारत आने की अपनी यात्रा टाल दें।

गौरतलब है कि पाकिस्तान भरपूर प्रयास कर रहा है कि जम्मू कश्मीर के मसले को अंतरराष्ट्रीय मसला बनाया जाए हालांकि ऐसा करने में पाकिस्तान विफल रहा है और ज्यादातर देशों ने इसे द्विपक्षीय मामला करार दिया है।हालांकि पाकिस्तान के साथ गलबहियां करता चीन एक बार कोशिश कर चुका है कि यूएन भारत-पाकिस्तान के कश्मीर मसले पर बयान जारी करे लेकिन यूएन सुरक्षा परिषद की तरफ से कोई भी आधिकारी बयान जारी करने से इनकार कर दिया गया है।

गौरतलब है कि भारत के विदेश मंत्री अगस्त में चीन यात्रा पर गए थे और वांग यी से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के मसले से भारत-चीन सीमा को लेकर बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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