जब लाइव शो में विभाजन की पीड़िता ने सुनाई कहानी, याद कर आंखों से छलके आंसू

जिन लोगों ने बंटवारे का दर्द सहन किया है उनमें से ज्यादातर लोग आज जिंदा नहीं हैं। हालांकि जो कुछ लोग बचे हैं उनमें चाँद जेटली भी शामिल हैं। आज भी जब वह बंटवारे के समय की त्रासदी, मारकाट और मजबूरियों को याद करती हैं तो आंख से आंसू छलक जाते हैं।

तस्वीर भारत पाकिस्तान बंटवारे के दौरान की है। फोटो- एक्सप्रेस आर्काइव

प्रधानमंत्री मोदी ने ऐलान कर दिया है कि अब से हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। दरअसल जब भारत को आजादी मिली तो एक तरफ सदियों बाद स्वतंत्रता प्राप्त करने का जश्न था तो दूसरी तरफ वह त्रासदी भी थी जो कि बंटवारे की वजह से पैदा हुई थी। लोगों को अपनी मातृभूमि छोड़कर जाना था। अपना सबकुछ छोड़कर कहीं और जाना बहुत दर्दनाक होता है। ऊपर से दंगे भड़क गए और लाखों लोगों की जान चली गई।

जिन लोगों ने बंटवारे का दर्द सहन किया है उनमें से ज्यादातर लोग आज जिंदा नहीं हैं। हालांकि जो कुछ लोग बचे हैं उनमें चाँद जेटली भी शामिल हैं। आज भी जब वह बंटवारे के समय की त्रासदी, मारकाट और मजबूरियों को याद करती हैं तो आंख से आंसू छलक जाते हैं।

आजतक चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, ‘मैं उस वक्त केवल पांच साल की थी। फिर भी मुझे सब अच्छी तरह याद है। हम लोग सिर्फ चलते जा रहे थे। लाखों लोग केवल चल रहे थे। ये अजीब दृश्य था। ट्रेनों की छतों पर लोग बैठे हुए थे। जो मैंने देखा, वह अब तक नहीं भूलता। मैं अपने बड़ों का रोना आजतक नहीं भूलती।’ यह बात बताते हुए चांद जेटली की आंखें भर आईं। उनकी ज़बान लड़खड़ाने लगी।

उन्होंने आगे कहा, ‘जब हमारे रिश्तेदार आपस में मिले तो यही बात कर रहे थे कि किस तरह के दिन आ गए। लोगों के मारे जाने की कहानी मेरे ह्रदय में छप गई। हम अपने मां बाप के साथ महीनों तक कैंप में रहे।’

इसके बाद उन्होंने अपने पति के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, ‘मेरे पति उस कैंप के साथ थे जिसमें कई लोग नहीं बचे। कई लोगों को कालरा हो गया। हम जब भारत पहुंच गए तब भी वह दर्द भूला नहीं जा रहा था। हमें लग रहा था कि हम बिना किसी लक्ष्य के चल रहे थे। किसी के पास यह भी बताने का समय नहीं था कि आखिर यह क्या हो रहा है।’ उन्होंने कहा कि ऐसी घटना दुनिया में एक बार ही हुई है और यही प्रार्थन करती हूं कि इस तरह की घटना फिर कभी न हो। यह कहते-कहते फिर से उनकी आंखें नम हो गईं।

चांद जेटली ने कहा, हमारी आंखें भले ही नम हो गईं लेकिन हम लोग जब भी मिलते हैं तो हमेशा पुराने दिनों की बातें याद करते हैं। यह जरूर है कि जब ज्यादा बात करते हैं तो आंखें नम हो जाती हैं।

अपडेट
X