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करतारपुर कॉरिडोर के बहाने नजदीक आए भारत-पाकिस्तान, 5000 श्रद्धालुओं को जाने का अनुरोध मंजूर

पाकिस्तान की ओर से इस बात पर अभी कोई फैसला नहीं आया है कि वह खास मौकों पर कितने श्रद्धालुओं को करतारपुर साहिब गुरुद्वारा तीर्थयात्रा के लिए मंजूरी देगा।

Author Published on: July 14, 2019 7:05 PM
बैठक करते भारत और पाकिस्तान के अधिकारी। फाइल फोटो: ANI

बीते काफी समय से भारत-पाकिस्तान के बीच तमाम मुद्दों को लेकर गहमा-गहमी रही है लेकिन अब दोनों देश एक मुद्दे पर नजदीक आए हैं। पाकिस्तान ने रविवार (14 जुलाई 2019) को करतारपुर कॉरिडोर से रोजाना 5000 श्रद्धालुओं को दरबार साहिब जाने की इजाजत दे दी। इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल की तरह देखा जा रहा है या यू कहें कि पाकिस्तान एकबार फिर भारत के आगे झुक गया।

करतारपुर गलियारे के स्वरूप पर चर्चा के लिए अटारी-वाघा सीमा पर दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच हुई एक बैठक के दौरान भारत ने अपनी सुरक्षा चिंताओं को रखा। भारत ने कहा कि पाकिस्तान श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखे और उन्हें पूरे साल सुविधाजनक यात्रा मुहैया कराने के लिए हर संभव प्रयास करे। जिसके बाद दोनों पक्ष संपर्क बनाए रखने और करतारपुर साहिब गलियारे पर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए काम करने पर सहमत हुए हैं। इस्लामाबाद ने आश्वासन दिया कि भारत-विरोधी किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।

हालांकि पाकिस्तान की ओर से इस बात पर अभी कोई फैसला नहीं आया है कि वह खास मौकों पर कितने श्रद्धालुओं को करतारपुर साहिब गुरुद्वारा तीर्थयात्रा के लिए मंजूरी देगा। हालांकि भारत ने अपनी तरफ से इसका भी आंकड़ा बैठक में पड़ोसी देश के समक्ष रखा। पाकिस्तान से अनुरोध किया गया है कि 10,000 अतिरिक्त तीर्थयात्रियों को विशेष अवसरों पर जाने की अनुमति दे।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, ‘‘पाकिस्तान में कुछ व्यक्तियों या संगठनों के तीर्थयात्रा को बाधित करने और तीर्थयात्रियों की भावनाओं के साथ खेलने संबंधी चिंताओं को साझा किया गया। इस मामले से संबंधित चिंताओं को लेकर एक दस्तावेज पाकिस्तान को सौंपा गया है।’’

बयान में कहा गया है, ‘‘पाकिस्तानी पक्ष ने हमारे प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि किसी भी भारत-विरोधी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जायेगी।’’ भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने करतारपुर साहिब गुरुद्वारा में भी वाणिज्य दूत की उपस्थिति मांगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तीर्थयात्रियों को सहायता प्रदान की जा सके। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एस सी एल दास ने किया। इस प्रतिनिधिमंडल में गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय,रक्षा मंत्रालय, पंजाब सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रतिनिधि शामिल थे। इस परियोजना पर यह दूसरे दौर की वार्ता है।

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