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पाकिस्तान को जाएगा न्यौता, इमरान खान की मेजबानी कर सकता है भारत, खुल सकता है द्विपक्षीय बातचीत का दरवाजा

भारत और पाकिस्तान 2017 में एससीओ सदस्य बने थे। भारत की ओर से SCO प्रमुखों की सरकारी बैठक में आम तौर पर विदेश या फिर रक्षा मंत्रियों को भेजे जाते रहे हैं।

Author नई दिल्ली | Updated: January 17, 2020 11:44 AM
देश में इस साल के अंत में होने वाली SCO Summit में पीएम नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष की मुलाकात हो सकती है। (फाइल फोटो)

भारत में इस साल के आखिर में Shanghai Cooperation Organisation (SCO) सदस्य देशों के शासन प्रमुखों की सालाना बैठक होगी। हिंदुस्तान से इसके लिए पाकिस्तान को भी न्यौता जाएगा। गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि समूह के सभी आठ सदस्य देशों, चारों पर्यवेक्षकों और संवाद साझेदारों को बैठक के लिए आमंत्रित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा, “प्रधानमंत्री स्तर पर हर साल बैठक होती है और इसमें एससीओ के कार्यक्रमों व बहुपक्षीय आर्थिक एवं व्यापार सहयोग पर चर्चा होती है।”

भारत की ओर से सभी एससीओ सदस्यों को न्यौता जाने का मतलब है कि पाकिस्तानी प्रतिनिधि भी (खुद पीएम इमरान खान या फिर उनका कोई मंत्री) इस इवेंट में हिस्सा लेने आएगा। ऐसे में उम्मीद है कि भारत अन्य नेताओं के साथ पाक पीएम इमरान खान की मेजबानी कर सकता है। साथ ही दोनों मुल्कों में तल्खी के बीच द्विपक्षीय बातचीत का दरवाजा भी खुल सकता है।

अगर पीएम खान इस बैठक के लिए भारत आएंगे तब यह 2018 में मोदी सरकार के पीएम (दोबारा) बनने के बाद पहला मौका होगा, जब भारत पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की मेजबानी करेगा। हालांकि, भारत इसी के साथ पाक को लंबे वक्त से यह कहता आया कि आतंक और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते हैं।

भारत और पाकिस्तान 2017 में एससीओ सदस्य बने थे। भारत की ओर से SCO प्रमुखों की सरकारी बैठक में आम तौर पर विदेश या रक्षा मंत्री भेजे जाते रहे हैं। हालांकि, पीएम मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस बैठक में पहले हिस्सा ले चुके हैं।

जून 2019 (बिश्केक में) में जब मोदी ने एससीओ प्रधानों की बैठक में हिस्सा लिया था तब इमरान खान भी वहां आए थे, पर तब मोदी और खान की द्विपक्षीय भेंट नहीं हुई थी। इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी अक्टूबर 2019 में ताशकंद में हुई एससीओ प्रमुखों की बैठक में शरीक हो चुके हैं।

बता दें कि SCO चीन के नेतृत्व वाला आर्थिक और सुरक्षा संबंधी संगठन है, जिसकी स्थापना 2001 में Russia, China, Kyrgyz Republic, Kazakhstan, Tajikistan और Uzbekistan ने की थी।

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