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भारत ने पाकिस्तान को दे दी उरी हमले से जुड़ी गलत जानकारी, NIA ने संशोधित की डिटेल्स

18 सितंबर को उरी सेक्टर में एक आर्मी कैम्प पर आतंकियों ने हमला कर दिया था, जिसमें 18 जवान शहीद हो गए थे।

Author नई दिल्ली | Published on: September 29, 2016 8:45 AM
कश्‍मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल के पास नौगाम सेक्‍टर में पेट्रोलिंग करते भारतीय सेना के जवान। ( file Photo:AP)

भारत ने उरी हमले से संबंधित जो जानकारी पाकिस्तान को दी है, उसमें एनआईए ने संशोधन किया है। भारत ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को उरी हमले में चार आतंकियों को आर्मी कैंप पर पहुंचाने वाले दो लोगों की जानकारी दी थी। लेकिन बाद में एनआईए को पता लगा कि उन दो लोगों से जुड़ी कुछ जानकारी गलती दी गई है। एनआईए इंस्पेक्टर जनरल आलोक मित्तल ने बताया कि फैसल हुसैन अवन, जिसे विदेश मंत्रालय द्वारा अब्दुल बासित को दिए गए नोट में मुजफ्फराबाद के पोथा जहांगीर का निवासी बताया गया था। लेकिन बाद में पता लगा कि वह पोथा जंडग्रान के नजदीक कूमी कोट गांव के पास हल्का 4 का रहने वाला है।

विदेश मंत्रालय के नोट में दूसरे युवक को यासिन खुर्शीद बताया गया है। नोट में उसे खिलियाना कलां के मोहम्मद खुर्शीद का बेटा बताया गया। जिसके बारे में मित्तल ने बताया कि वह चौधरी खुर्शीद का बेटा अहसान खुर्शीद है। वह मुजफ्फराबाद के हटियान बाला तहसील में खिलयाना खुर्द गांव के मोहल्ला किडरी गांव का रहने वाला है।

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सूत्रों ने बताया कि शुरुआत में इन लोगों से संबंधित जो जानकारी हासिल की गई है, उस वक्त ली गई थी, जब वे लोग 20 सितंबर से 26 सितंबर तक हिरासत में थे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरुप ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि संदिग्धों की जानकारी जांच अधिकारियों को दिए गए बयान के आधार पर जुटाई गई थी। स्वरुप ने साथ ही बताया कि कश्मीर के जिस हिस्से पर पाकिस्तान ने कब्जा कर रखा है, वहां की जानकारी की तुरंत पुष्टि करना भारतीय जांचकर्ताओं के लिए संभव नहीं है।

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फैसल अवान का छोटा सा गांव पोथा जंडग्रान मुजफ्फराबाद से दक्षिण में आधे घंटे की ड्राइव के बाद है। वहीं अहसान खुर्शीद का गांव चिनारी पुलिस स्टेशन क्षेत्र में पड़ता है जो कि एलओसी पर कमान पोस्ट से आधे घंटे के सफर पर है। विदेश मंत्रलाय ने गुरुवार को बताया था कि ये लोग स्थानीयों द्वारा पकड़े गए हैं, उसके बाद उन्हें सेना को सौंप दिया गया। एनआईए के अधिकारियों ने कहा कि वे अभी भी गवाही के ब्यौरे की पुष्टि करने के लिए काम कर रहे हैं।

बता दें, 18 सितंबर को उरी सेक्टर में एक आर्मी कैम्प पर आतंकियों ने हमला कर दिया था, जिसमें 18 जवान शहीद हो गए थे।

 

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