न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा है कि उन्हें अपने देश और भारत के बीच संबंधों की मजबूती और संभावनाओं पर पूरा विश्वास है। यह बयान ऐसे समय आया है जब नरेंद्र मोदी शुक्रवार को ऑकलैंड पहुंच रहे हैं। यह चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूज़ीलैंड की पहली यात्रा होगी।
द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक खास साक्षात्कार में, लक्सन ने भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों के तीन स्तंभ आर्थिक, रक्षा, सुरक्षा और लोगों के बीच आपसी संपर्क (पीपल-टू-पीपल टाइज़) का जिक्र किया। उन्होंने इसे वैश्विक भू-राजनीति के उस ‘इन्फ्लेक्शन पॉइन्ट’ (निर्णायक मोड़) के संदर्भ में रखा जहां दुनिया ‘नियम-आधारित व्यवस्था (rules-based system)’ से ‘शक्ति-आधारित व्यवस्था (power-based system)’ की ओर और ‘बहुपक्षीय व्यवस्था (multilateral system)’ से ‘बहुध्रुवीय व्यवस्था (multipolar system)’ की ओर बढ़ गई है।
दुनिया निर्णायक मोड़ पर खड़ी है
लक्सन ने कहा, ”हम एक ऐसे अमेरिका को देख रहे हैं जो ‘अमेरिका फर्स्ट’ की बात कर रहा है और जिसका ध्यान पश्चिमी गोलार्ध (Western Hemisphere) पर केंद्रित है। हम चीन को अपने हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने की इच्छा रखते हुए देख रहे हैं। हम यह भी देख रहे हैं कि रूस ने यूक्रेन जैसे एक संप्रभु राष्ट्र पर अवैध रूप से हमला किया है और वह यूरोप में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहता है। इसलिए यह स्वाभाविक है कि दुनिया वास्तव में एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है।”
उन्होंने आगे कहा, ”न्यूज़ीलैंड जैसे देश के लिए इसका लाभ यह है कि एक मुक्त व्यापार का समर्थक और एक छोटे देश के रूप में, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से हम नियम-आधारित व्यवस्था के बहुत बड़े लाभार्थी रहे हैं क्योंकि इस व्यवस्था में छोटे देशों के साथ भी बड़े देशों के समान व्यवहार किया जाता है और बड़े देश छोटे देशों पर धौंस नहीं जमाते।”
लक्सन ने कहा कि यहीं पर भारत के साथ संबंधों का महत्व सामने आता है। उन्होंने कहा, ”न्यूज़ीलैंड को भारत और अन्य समान विचारधारा वाले मित्र देशों के साथ मिलकर नियम-आधारित व्यवस्था के पक्ष में फिर से मजबूत तर्क प्रस्तुत करने की आवश्यकता है।”
उन्होंने इस व्यवस्था में सुधार की मांग का भी समर्थन किया और भारतीय दृष्टिकोण से सहमति जताई। लक्सन ने कहा, ”कई मामलों में, भारत और ब्राज़ील जैसे ग्लोबल साउथ के देश वास्तव में उस व्यवस्था का हिस्सा नहीं रहे जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनाया गया था। इसलिए हमें उस व्यवस्था के पक्ष में नए सिरे से तर्क पेश करने की जरूरत है।”
100 से ज्यादा वर्षों से मित्र भारत-न्यूजीलैंड
भारत और न्यूज़ीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों के बारे में उन्होंने कहा, ”हम 100 से ज्यादा वर्षों से मित्र रहे हैं। वास्तव में हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दो अलग-अलग छोरों पर स्थित हैं और हमारे बीच ऐसा बहुत कुछ नहीं रहा जो हमें भविष्य के साझा एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट करता। प्रधानमंत्री मोदी और मैंने इस बारे में बात की है कि हमारे दोनों देशों का दृष्टिकोण और वैल्यू काफी हद तक समान है। इसलिए हमें एक-दूसरे के साथ और अधिक काम करना चाहिए तथा हमारे संबंध कहीं अधिक व्यापक और गहरे होने चाहिए।”
न्यूज़ीलैंड में भारतीयों के लिए इमिग्रेशन पर, खासतौर पर अमेरिका में बदले हुए माहौल के संदर्भ में लक्सन ने कहा, ”हम इसे एक बहुत बड़ा अवसर मानते हैं। दुनिया भर में आप देख रहे हैं कि पश्चिम के देशों और लोकतंत्रों में आप्रवासियों के प्रति विरोधी झुकाव और भावनाएं बढ़ रही हैं। इससे न्यूज़ीलैंड के लिए अवसर पैदा होता है क्योंकि इसका अर्थ है कि वे प्रतिभाशाली लोग जो शायद पहले अमेरिका जाने का विचार कर रहे थे, अब हमारे शैक्षणिक संस्थानों का नए सिरे से मूल्यांकन कर सकते हैं। हम एक अंग्रेज़ी भाषी देश हैं, हमारी अर्थव्यवस्था एडवांस्ड है, हम एक बहुत सुरक्षित देश हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे पास बहुत अच्छे शैक्षणिक संस्थान हैं। हमने विभिन्न स्तरों पर भारतीयों का न्यूज़ीलैंड में हमेशा स्वागत किया है।”
इस प्रश्न पर कि न्यूज़ीलैंड में आप्रवासियों के प्रति विरोधी भावनाएं क्यों नहीं दिखाई दे रही हैं, प्रधानमंत्री लक्सन ने कहा, ”सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि न्यूज़ीलैंड में कानूनी इमिग्रेशन होता है, अवैध नहीं। दूसरा, इसे संचालित करने के लिए हमारे पास समझदारी, निष्पक्ष और टारगेटेड सिद्धांत हैं। हम अपनी आव्रजन नीति को अपनी आर्थिक जरूरतों के अनुरूप रखते हैं- जहां कौशल की कमी है और जहां बुनियादी ढांचे की ज़रूरतें हैं। हमारे पास यह सुनिश्चित करने की क्षमता है कि इस देश में आने वाले लोग सफलतापूर्वक बस सकें, उनके लिए पर्याप्त आवास, स्कूल, सड़कें और अस्पताल उपलब्ध हों।”
आपको बता दें कि लक्सन साल 2023 से न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री हैं और पिछले वर्ष मार्च में भारत की यात्रा पर आए थे। इससे पहले, 1990 के दशक में भी उन्होंने यूनिलीवर में काम करते समय भारत का दौरा किया था।
गौर करने वाली बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जुलाई को न्यूज़ीलैंड में रहेंगे।
