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प्रधानमंत्री नाराज होंगे या खुश, इसकी चिंता न कर बोलने वाले नेताओं की जरूरत: मुरली मनोहर जोशी

दिवंगत कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एस जयपाल रेड्डी की याद में आयोजित एक कार्यक्रम में जोशी ने ये विचार रखे।

नई दिल्ली | September 4, 2019 8:11 AM
तस्वीर में एमएम जोशी, सीताराम येचुरी, मनमोहन सिंह और राजा। (एक्सप्रेस फोटो: अनिल शर्मा)

बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने मंगलवार को कहा कि भारत को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो प्रधानमंत्री से सैद्धांतिक मुद्दों पर बहस कर सके और इस बात की चिंता किए बिना अपने विचार रखे कि पीएम नाराज होंगे या खुश। दिवंगत कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री एस जयपाल रेड्डी की याद में आयोजित एक कार्यक्रम में जोशी ने ये विचार रखे। बता दें कि 28 जुलाई को हैदराबाद में रेड्डी का निधन हो गया था।

90 की दशक की शुरुआत में रेड्डी से अपने जुड़ाव को मुरली मनोहर जोशी ने याद किया। उन्होंने बताया कि दोनों ही सांसद एक फोरम के सदस्य थे। जोशी ने कहा, ‘वह आखिर तक विभिन्न मुद्दों पर हर स्तर पर अपने विचार रखते थे। चाहे फिर वो फोरम के सदस्य के तौर पर हो, जनता पार्टी के सदस्य के तौर पर हो या फिर कांग्रेस पार्टी के सदस्य के तौर पर, उन्होंने इन मुद्दों पर कभी समझौता नहीं किया।’

बीजेपी नेता ने कहा, ‘मैं ऐसा समझता हूं कि आजकल ऐसी नेतृत्व की बहुत आवश्यकता है जो सिद्धांतों के साथ बेबाकी के साथ और बिना कुछ इस बात की चिंता किए हुए प्रधानमंत्री नाराज होंगे या खुश होंगे, अपनी बात साफ साफ कहते हैं, उनसे बहस करते हैं।’ जोशी ने बताया कि रेड्डी इंद्र कुमार गुजराल की सरकार में मंत्री बनने के बाद भी फोरम के विचारों को पीएम के समक्ष रखने के लिए राजी हुए।

जोशी के मुताबिक, जब रेड्डी से उनके विचार पूछे गए तो उन्होंने बिना किसी संकोच, साफ शब्दों में माना कि वह फोरम के प्रस्तावों से सहमत हैं। संयोग की बात है कि जोशी 1991 से 1993 के बीच बीजेपी के अध्यक्ष रहे। उस वक्त उन्होंने कन्याकुमारी से कश्मीर तक एकता यात्रा निकाली थी। उस वक्त नरेंद्र मोदी इस यात्रा के कॉर्डिनेटर थे।

बता दें कि मंगलवार को रेड्डी की याद में आयोजित इस कार्यक्रम में वाइस प्रेसिडेंट एम वेंकैया नायडू और विभिन्न पार्टियों के राजनेता भी शामिल हुए। इनमें पूर्व पीएम मनमोहन सिंह भी शामिल थे। सिंह ने कहा कि रेड्डी पूरे जीवन सच्चाई के लिए लड़ते रहे और हर चीज का विरोध किया जो उन्हें गलत महसूस होता था। कार्यक्रम में सीताराम येचुरी, डी राजा, शरद यादव और अभिषेक मनु सिंघवी ने भी संबोधित किया।

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