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फिंगर-4 पर अभी भी डटे हैं चीनी सैनिक, पर चुशुल सेक्टर में सेना ने ड्रैगन को पीछे जाने पर किया मजबूर

भारतीय जवानों ने फिंगर तीन की ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा कर रखा है और फिंगर चार के पश्चिमी हिस्से में मुस्तैदी बढ़ा दी है।

कश्मीर के गांदरबल जिले से लद्दाख की ओर जाते भारतीय सेना के जवान। (फोटो- Reuters)

भारतीय और चीनी ब्रिगेड कमांडरों ने बुधवार (02 सितंबर) को लगातार तीसरे दिन मुलाकात की। इससे पहले भारतीय सैनिकों ने चुशुल सेक्टर में चीनी चालों को नाकाम करते हुए पैंगोंग सो के दक्षिणी तट स्थित ऊंची पहाड़ियों और रेजांग ला के पास रेचिन ला पर कब्जा कर लिया।

भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग सो के उत्तरी किनारे पर स्थित पहाड़ियों के फिंगर 3 पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए मूवमेंट की और फिंगर 4 के पश्चिमी हिस्से पर कब्जा कर लिया। यहां चीन ने फिंगर 8 से आठ किलोमीटर दूर आकर रिजलाइन पर कब्जा कर रखा है, जिसे भारत भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा के रूप में चिह्नित करता आया है। इलाके में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। सूत्रों ने बताया कि तनाव घटाने के लिये दोनों पक्षों के सेना कमांडरों की बुधवार को हुई एक और दौर की वार्ता बेनतीजा रही। यह बातचीत करीब सात घंटे चली। सूत्रों ने यह भी बताया कि सोमवार और मंगलवार को छह घंटे से अधिक समय तक इसी तरह की वार्ता हुई, लेकिन कोई ‘‘ठोस नतीजा’’ नहीं निकल सका।

सूत्रों का मानना है कि भारतीय सैनिकों की यह कार्रवाई भारत-चीन के बीच मई में शुरू हुई मिलिट्री और डिप्लोमेटिक बातचीत में सहायक सिद्ध होगी।
पैंगोंग सो उत्तरी बैंक और गोगरा पोस्ट से चीनी सैनिकों के पीछे लौटने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाने के कारण जुलाई के मध्य से बातचीत बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी। भारत दोनों स्थानों पर अप्रैल की स्थिति में लौटने की यथास्थिति की मांग कर रहा है।

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को कहा कि पैंगोंग के दक्षिणी किनारे पर तनाव बढ़ने के कारण भारतीय सैनिकों ने 29 अगस्त और 30 अगस्त की मध्यरात्रि को तेजी से कदम बढ़ाए और चीनी सैनिकों को किसी भी स्थिति में जाने से रोकने के लिए ऊंची पहाड़ी पर पहुंचकर कब्जा कर लिया। अधिकारी ने कहा कि उत्तरी तट पर भी सेना ने अपनी अहम स्थिति बना ली है। हालांकि, अभी भी फिंगर-4 पर चीनी सैनिक डटे हुए हैं। इधर, भारतीय जवानों ने फिंगर तीन की ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा कर रखा है और फिंगर चार के पश्चिमी हिस्से में मुस्तैदी बढ़ा दी है।

सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच पैंगोंग झील के उत्तरी तट पर एक टकराव हुआ था, लेकिन इस तरह की घटना इसके दक्षिणी तट पर पहली बार हुई। सैन्य वार्ता में चीनी पक्ष ने क्षेत्र में सामरिक रूप से महत्वपूर्ण कुछ पर्वत चोटियों पर भारत के अपने नियंत्रण में करने पर आपत्ति जताई। लेकिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इस बात का जिक्र किया कि ये स्थान एलएसी के भारतीय सीमा के अंदर हैं।

भारत वार्ता के जरिये सीमा विवाद का हल चाहता है लेकिन साथ ही वह एलएसी पर चीन के किसी भी दुस्साहस से निपटने को भी तैयार है। चीनी कोशिशों के मद्देनजर भारतीय थल सेना ने 3,400 किमी लंबे एलएसी पर अपने सभी अग्रिम सैन्य ठिकानों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने के लिये अलर्ट कर दिया है। गलवान घाटी झड़प के बाद भारत ने अरूणाचल प्रदेश और सिक्किम सहित सभी सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त सैनिक एवं हथियार प्रणाली भेजी हैं।

सोमवार को भारतीय थल सेना ने कहा कि चीनी सेना ने 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात पैंगोंग झील के दक्षिण तट पर यथा स्थिति में एकतरफा तरीके से बदलाव करने के लिये ‘‘उकसाने वाली सैन्य गतिविधियां’’ की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्ताव ने मंगलवार को कहा था कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने सोमवार को एक बार फिर ‘‘उकसाने वाली कार्रवाई’’ की, जब दोनों पक्षों के कमांडर दो दिन पहले पैंगोंग झील इलाके में यथास्थिति बदलने की चीनी कोशिशों के बाद तनाव घटाने के लिये बातचीत कर रहे थे।

एक सूत्र ने कहा, ‘‘इलाके में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ’’बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने आरोप लगाया कि सीमा पर तनाव की पूरी जिम्मेदारी भारतीय पक्ष पर है। उन्होंने कहा, ‘‘चीन ने तनाव टालने के लिये बहुत संयम बरता है।’’

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को पूर्वी लद्दाख में स्थिति की व्यापक समीक्षा की। इस सिलसिले में चली बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे, वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया सहित अन्य शामिल हुए थे।

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