पाकिस्तान इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है। दिल्ली ने होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलने के मुद्दे पर क्षेत्र के प्रमुख भागीदारों ओमान से लेकर यूएई और सऊदी अरब से लेकर कतर तक सभी से संपर्क करना शुरू कर दिया है।

यह ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान के साथ युद्धविराम, लेबनान में ईरान के सहयोगी हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल के बढ़ते हमले को देखते हुए बहुत नाजुक प्रतीत हो रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर गुरुवार को मॉरीशस के पोर्ट लुइस पहुंचे। यहां पर वे नौंवे हिंद महासागर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और दो दिन तक हिंद महासागर के देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

ओमान, सऊदी अरब और मिस्र जैसे पश्चिम एशियाई देशों के मंत्रियों, श्रीलंका, मालदीव, सेशेल्स, मेडागास्कर और तंजानिया जैसे साझेदार देशों, थाईलैंड, सिंगापुर और कंबोडिया जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों और पड़ोसी देशों भूटान व बांग्लादेश के मंत्रियों के साथ होने वाली ये बैठकें 40 दिनों के संघर्ष के बाद पैदा हुई चुनौतियों को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

11 अप्रैल को यूएई जाएंगे जयशंकर

सम्मेलन के दौरान ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बदर हमद अल बुसैदी, सऊदी अरब के विदेश मामलों के उप मंत्री वलीद एलखेरेजी और मिस्र के अफ्रीकी मामलों के उप विदेश मंत्री मोहम्मद अबू बक्र के साथ बैठकें होने की उम्मीद है। 11 अप्रैल को जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात की दो दिवसीय यात्रा पर रवाना होंगे।

संयुक्त अरब अमीरात अमेरिकी सैन्य ठिकानों और कर्मियों पर ईरानी हमलों के साथ-साथ अपने खुद के आर्थिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस युद्ध में आम नागरिकों की भी जान गई है। यूएई में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात के नेतृत्व से मुलाकात करेंगे ताकि सहयोग की समीक्षा की जा सके और दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और गहरा किया जा सके।

हरदीप पुरी कतर के लिए रवाना

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी गुरुवार को दो दिवसीय दौरे पर कतर के लिए रवाना हो रहे थे। खाड़ी देश कतर भारत के लिए एलएनजी और एलपीजी का सबसे बड़ा स्रोत है। कतर में पुरी की चर्चाओं के एजेंडे में भारत को एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता देना सबसे ऊपर रहने की संभावना है।

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि मंत्री के कतर से लौटने के बाद उनकी यात्रा के बारे में जानकारी दी जाएगी। पुरी का यह दौरा तेहरान के उस बयान के एक दिन बाद हुआ, जिसमें कहा गया था कि होर्मुज जलमार्ग से जहाजों का सुरक्षित गुजरना ईरान की सेना के साथ समन्वय और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखकर संभव है। भारत अपनी प्राकृतिक गैस की जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा पूरा करने के लिए एलएनजी आयात पर निर्भर है और इसका 55-60% हिस्सा पश्चिम एशिया से होर्मुज जलमार्ग के माध्यम से आता है।

भारत के एलएनजी आयात का 2/5 (two-fifths ) हिस्सा अकेले कतर से आता है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2024-25 में 27 मिलियन टन एलएनजी आयात किया। इसमें से 11.2 मिलियन टन यानी 41.4%, कतर से आया। भारत का कतर एनर्जी के साथ 8.5 मिलियन टन प्रति वर्ष का एलएनजी कॉन्ट्रैक्ट है, भारत स्पॉट मार्केट से भी कतर से एलएनजी खरीदता है। एलपीजी की बात करें तो, भारत की आयात पर निर्भरता लगभग 60% है और 90% आयात जलमार्ग के माध्यम से होता है, जिसमें कतर 20% से ज्यादा हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

होर्मुज जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावी रूप से रुकने से भारत को एलपीजी और एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित हुई है, मार्च की शुरुआत से फारस की खाड़ी से कोई भी एलएनजी टैंकर देश में नहीं आया है और जलमार्ग से केवल आठ भारतीय झंडे वाले एलपीजी टैंकर ही गुजरे हैं।

एलपीजी के मामले में आपूर्ति पर ज्यादा गंभीर प्रभाव पड़ा

आपूर्ति प्रभावित होने के मद्देनजर, सरकार ने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कुछ उद्योगों को प्राकृतिक गैस का आवंटन भी कम कर दिया। एलपीजी के मामले में आपूर्ति पर ज्यादा गंभीर प्रभाव पड़ा। इसके अलावा, कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हुए हमलों के कारण एलएनजी आपूर्ति संबंधी चिंताएं और बढ़ गईं। इसमें कतर एनर्जी की विशाल एलएनजी सुविधा का एक हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया। भारत द्वारा कतर से आयात की जाने वाली लगभग सभी एलएनजी रास लाफान से ही आती है।

इस बीच, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने अमेरिकी वाणिज्य विभाग में उद्योग और सुरक्षा ब्यूरो के अवर सचिव जेफरी केसलर और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के अवर सचिव विलियम किम्मिट से मुलाकात की। चर्चा द्विपक्षीय व्यापार और रणनीतिक एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश को बढ़ावा देने और उभरते निर्यात नियंत्रण ढांचों पर विचारों के आदान-प्रदान पर केंद्रित थी।”

मिसरी ने अमेरिका के उप सचिव (US Under Secretary of War) एलब्रिज कोल्बी से भी बातचीत की। इसमें पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर चर्चा हुई और नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच रक्षा औद्योगिक और प्रौद्योगिकी को और ज्यादा मजबूत करने के तरीकों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। कोल्बी पिछले महीने भारत में थे।

शहबाज शरीफ ने एक्स पर पोस्ट किया था युद्धविराम का संदेश

अमेरिका-ईरान सीजफायर से पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने एक्स पर मंगलवार को जो पोस्ट किया था, उसकी जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय को पहले से थी। पाक पीएम ने यह पोस्ट व्हाइट हाउस से मंजूरी मिलने के बाद ही एक्स पर पोस्ट की थी। अमेरिका स्थित न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की रिपोर्ट ने ऐसा दावा किया। इसके बाद यह सवाल खड़ा हो गया कि क्या वाशिंगटन ने युद्धविराम की घोषणा करने से पहले इस्लामाबाद का इस्तेमाल एक संकेत के रूप में किया था। पढ़ें पूरी खबर…