उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में ग्राम पंचायत सदस्य की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत में जनसंख्या वृद्धि के संबंध में महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। अदालत ने इस दौरान विंस्टन चर्चिल , ब्रिटिश दार्शनिक और नोबेल पुरस्कार विजेता बर्ट्रेंड रसेल और ब्रिटिश अर्थशास्त्री थॉमस रॉबर्ट द्वारा जनसंख्या वृद्धि पर दी गई चेतावनियों का हवाला दिया। उच्च न्यायालय ने दो बच्चों की नीति पर विंस्टन चर्चिल का हवाला देते हुए कहा कि भारत एक राष्ट्र नहीं है।

उड़ीसा उच्च न्यायालय ने दो बच्चों की वैधानिक सीमा से अधिक होने के कारण अयोग्य घोषित किए गए एक ग्राम पंचायत सदस्य की याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति कृष्णा श्रीपाद दीक्षित और चित्तरंजन डैश की खंडपीठ एक एकल न्यायाधीश के अयोग्यता आदेश के खिलाफ ग्राम पंचायत सदस्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

भारत एक राष्ट्र नहीं बल्कि मात्र एक जनसंख्या है- विंस्टन चर्चिल

अधिक जनसंख्या के नुकसान को उजागर करते हुए अदालत ने कहा, “देश के लोगों को कोविड-19 महामारी के दौरान स्थान की कमी के कारण जिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, उसकी यादें अभी तक धुंधली नहीं हुई हैं।” ऐतिहासिक फैसला देने वाले जस्टिस दीक्षित ने पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के शब्दों का हवाला देते हुए कहा, “भारत एक राष्ट्र नहीं बल्कि मात्र एक जनसंख्या है।”

पीठ ने आगे कहा कि चर्चिल ने यह बात विभाजन से बहुत पहले कही थी, जब अविभाजित भारत की तत्कालीन जनसंख्या लगभग 30 करोड़ थी अगर वे आज जीवित होते तो उन्होंने क्या तीखी टिप्पणी की होती, यह कोई कल्पना न कर पाए शायद। बढ़ती जनसंख्या के खतरे पर जोर देते हुए, न्यायाधीश ने ब्रिटिश दार्शनिक बर्ट्रेंड रसेल के इस कथन को कोट किया, “जनसंख्या विस्फोट हाइड्रोजन बम से भी ज्यादा खतरनाक है।”

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आदेश में जनसंख्या पर ब्रिटिश अर्थशास्त्री थॉमस रॉबर्ट माल्थस के कथन का हवाला देते हुए कहा गया है, “जनसंख्या वृद्धि का अनुपात, हालांकि जनसंख्या की अधिकतम क्षमता से कम है फिर भी अनुभव के आधार पर हम कहेंगे कि जनसंख्या जब अनियंत्रित रहती है तो हर पच्चीस वर्षों में दोगुनी हो जाती है या ज्यामितीय अनुपात में बढ़ती है।”

याचिकाकर्ता ने ग्राम पंचायत की सदस्यता से अपनी बर्खास्तगी को दी थी चुनौती

याचिकाकर्ता ने ओडिशा ग्राम पंचायत अधिनियम, 1964 की धारा 25(1)(v) (जो किसी व्यक्ति को सदस्य होने से अयोग्य ठहराती है, जैसे सरपंच, वार्ड सदस्य, यदि उनके दो से अधिक बच्चे हैं) के तहत ग्राम पंचायत की सदस्यता से अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने अधिनियम के एक प्रावधान के तहत संरक्षण की मांग की जो ऐसे व्यक्ति को छूट प्रदान करता है जिसके पास ओडिशा ग्राम पंचायत (संशोधन) अधिनियम, 1994 के लागू होने के समय पहले से ही दो से अधिक बच्चे हों, बशर्ते कि उन्होंने एक वर्ष की छूट अवधि के बाद अतिरिक्त बच्चे को जन्म न दिया हो। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि, हालांकि उनके मुवक्किल ने 1993 में तीसरा बच्चा और 1994 में चौथा बच्चा पैदा किया, उन्हें 1964 अधिनियम की धारा 25(1)(v) के तहत संरक्षण प्राप्त है।

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