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देश में घोर जल संकट: 21 शहरों में आने वाली है ‘वाटर इमरजेंसी’, इन चार में सबसे ज्‍यादा खतरा, चेन्‍नई में बंद करने पड़ रहे होटल

चेन्नई में पानी को लेकर हालात इस कदर हो गए हैं कि आईटी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश दिया है। पानी के विवाद में हिंसक झड़प हो रही है। रेस्टूरेंट को बंद करना पड़ रहा है।

महाराष्ट्र के थाने में गहरे कुंए में उतरकर पानी निकालता एक व्यक्ति। (Express Photo by Deepak Joshi)

भारत में जल संकट की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिस गांव में पहले हैंडपंप से मिनटों में बाल्टियां भर जाती थी, अब वहां के लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं। बात बिहार के जहानाबाद जिले के किसी गांव की हो या फिर तमिलानाडु की राजधानी चेन्नई की, हर जगह हालात एक समान हो रहे हैं। यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में देश के 21 शहरों में ‘वाटर इमरजेंसी’ आने वाली है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित दिल्ली, गुरुग्राम, मेरठ और फरीदाबाद होंगे। रेडिफ डॉट कॉम से बात करते हुए मैग्सेसे अवार्ड विजेता राजेंद्र सिंह ने इस संकंट से संबंधित कई पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “आज नागपुर में एक फ्रेंच कंपनी विलोलिया इंडिया पानी उपलब्ध करवा रही है। यह कंपनी देश के 18 शहरों में पानी उपलब्ध करवाना चाहती है। जल्द ही वे देश के पानी पर कब्जा कर लेंगे।”

जल संकट पर राजनीतिक पार्टियों के रूख पर राजेंद्र सिंह ने कहा, “आप यदि किसी भी पार्टी का घोषणापत्र उठाकर देखते हैं तो यह पाएंगे कि पानी उनके लिए कोई मुद्दा ही नहीं है। उनकी आंखों का पानी सूख चुका है। वे पानी के बारे में उसी समय बोलते हैं, जब वे इसका निजीकरण करना चाहते हैं। लेकिन यह कैसे संभव है? यहां तो पानी ही नहीं बचा है।”

सिंह ने कहा, “जब पानी सरकार की प्राथमिकता में शामिल थी तो बड़े-बड़े डैम बनवाए गए। सिर्फ महराष्ट्र में 42 बड़े डैम हैं। आज हमारे देश के राजनेताओं के पास पानी के लिए कोई विजन नहीं है। वे सिर्फ इसके नाम पर वोट लेना चाहते हैं और निजी क्षेत्र के माध्यम से इसका समाधान करने की सोचते हैं। जब तक लोग इसके समाधान के लिए नहीं सोचेंगे, पानी की समस्या दूर होने वाली नहीं है। जल्द ही देश के 21 शहरों में जीरो वाटर डे हो जाएगा। नलों से पानी आने बंद हो जाएंगे। लोगों को इसके लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगना होगा। यदि सरकार जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो इन शहरों का हश्र केप टाउन जैसा होगा, जहां पानी ही नहीं है। दिल्ली, गुरुग्राम, मेरठ और फरीदाबाद सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चेन्नई में पानी को लेकर हालात इस कदर हो गए हैं कि आईटी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को घर से काम करने का निर्देश दिया है। पानी के विवाद में हिंसक झड़प हो रही है। रेस्टूरेंट को बंद करना पड़ रहा है। अवैध रूप से पानी खिंचने वाले कनेक्शन को राज्य सरकार द्वारा चिन्हित कर बंद किया जा रहा है। हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। सरकारी वाटर टैंकर से पानी लेने के लिए घंटों लाइन में लगे रहने की वजह से लोग हिंसक हो रहे हैं। चेन्नई के तंजावुर टाउन में जब एक व्यक्ति ने प्लास्टिक के बड़े बैरल में ज्यादा पानी भरने की कोशिश की तो दूसरे ने धारदार हथियार से हमला कर दिया।

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