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पैंगोंग सो में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई से दो हफ्ते पहले इंटेलीजेंस ने दे दी थी घुसपैठ की सूचना, पर सेना के पास पहुंची ही नहीं

भारतीय और चीनी सेना के बीच पहली बार पैंगोंग सो लेक के पास 5-6 मई को झड़प हुई थी, हालांकि भारत की खुफिया एजेंसी के पास चीन के बारे में अप्रैल के मध्य से ही इनपुट मौजूद था।

India, China, Intelligence agenciesभारतीय खुफिया एजेंसियों के पास अप्रैल मध्य में पहली बार एलएसी पर चीनी सेना के जुटने के इनपुट्स आ गए थे।

भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर तनाव की शुरू दो महीने पहले मई के महीने में हुई थी। चीनी सैनिकों ने एलएसी पार कर भारत का एक बड़ा हिस्सा हथियाने के लिए काफी पहले से कोशिशें शुरू कर दी थीं। इसका पहला खुफिया इनपुट इंटेलिजेंस एजेंसियों ने पहले अप्रैल के मध्य में ही दे दिया था। हालांकि, इसके बावजूद यह रिपोर्ट्स सेना तक पहुंचीं ही नहीं। सेना को पहली बार एलएसी पर चीन की तरफ से निर्माण कार्य शुरू किए जाने की खबर मई में मिली।

एक खुफिया अफसर ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि मध्य अप्रैल में पहली बार जो इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स आई थीं, उनमें डेमचोक के पार चीन की तरफ भारी सैन्य वाहनों के पहुंचने की बात कही गई थी। यह रिपोर्ट पैंगोंग सो में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई 5-6 मई की मुठभेड़ से करीब दो हफ्ते पहले ही आ गई थी।

इन रिपोर्ट्स से यह काफी हद तक साफ है कि पर्याप्त जानकारी मौजूद होने के बावजूद खुफिया विभाग ने चीन की इन गतिविधियों पर खास नजर नहीं डाली। हालांकि, सेना का कहना है कि चीन की ओर से एलएसी पर सेना इकट्ठा किए जाने के बाद उसकी तरफ से भी बराबर संख्या में सैन्यबल को भारतीय सीमा पर जुटाया गया। खासकर चीन के विश्वास तोड़ने की वजह से।

गौरतलब है कि भारत में पिछले काफी समय से सवाल उठ रहे हैं कि चीन की ओर से एलएसी पर तीन अलग-अलग जगहों पर बड़ी मात्रा में सैन्य साजो-सामान और टुकड़ियां जुट गईं, इसके बावजूद भारत की शुरुआती प्रतिक्रिया काफी धीमी रही। हालांकि, इस पर इंटेलिजेंस अफसर ने आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे के 15 मई के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सीमा पर यह सब रूटीन तौर पर होता रहता है और यह किसी बड़ी योजना का हिस्सा नहीं है। बता दें कि भारत और चीनी सेना के बीच पहली बार हाथापाई पैंगोंग सो में 5-6 मई को हुई थी, जबकि इसके बाद सिक्किम से लगी नाकू ला की सीमा पर भी सैनिकों के बीच झड़प हुई थी।

खुफिया विभाग के अफसर के मुताबिक, सेना की तरफ से हालात की गंभीरता पहली बार 17-18 मई के आसपास समझी गई, जब चीनी टुकड़ी पैंगोंग सो में फिंगर-4 एरिया के मुहाने पर पहुंच गई। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “अप्रैल तक हमारे पास चीन की ओर से एलएसी पर सैनिक इकट्ठा करने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। हमारे पास ऐसी पहली रिपोर्ट मई में आई, जिसमें चीन की ओर से सीमा पर निर्माण से जुड़े कार्य शुरू करने के बारे में बताया गया।”

अफसर ने कहा कि चीनी सेनाएं अकसर अप्रैल में एलएसी पर रूटीन ट्रेनिंग करती हैं, इसके बाद उन्हें वापस अपने बेस भेज दिया जाता है, अब तक यही नियम रहा था, लेकिन चीन ने अपनी ट्रेनिंग करने वाली टुकड़ियों को ही एलएसी पर भारत का आमना-सामना करने के लिए भेज दिया। चीनी सेना की ट्रेनिंग साइट और एलएसी की दूरी भी महज 200 किमी है, इसलिए इस काम में कोई दिक्कत भी नहीं हुई। यह पूरी तरह विश्वास तोड़ने का काम था।

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