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नेपाल भूकंप: राहत के लिए भारत ने झोंकी ताक़त

भूकम्प प्रभावित नेपाल मेंं राहत और बचाव अभियान ‘आॅपरेशन मैत्री’ तेज करते हुए भारत ने रविवार को दो दर्जन से ज्यादा विमानों और हेलिकॉप्टरों को तैनात किया। साथ ही सड़क मार्ग से बड़े पैमाने पर...
भारत ने विमानों और हेलिकॉप्टरों सहित एक हजार कर्मियों को लगाया (फ़ोटो-रॉयटर्स)

भूकम्प प्रभावित नेपाल मेंं राहत और बचाव अभियान ‘आॅपरेशन मैत्री’ तेज करते हुए भारत ने रविवार को दो दर्जन से ज्यादा विमानों और हेलिकॉप्टरों को तैनात किया। साथ ही सड़क मार्ग से बड़े पैमाने पर लोगों को निकाला जा रहा है। भारत ने कहा कि हिमालयी राष्ट्र में स्थिति ‘बहुत बहुत गंभीर है’। ऐसे में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के करीब 1,000 प्रशिक्षित कर्मचारियों को सेवा में लगाया गया है। शनिवार से करीब 1,000 लोगों को हवाई मार्ग से निकाला गया है।

गृह मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी के नेतृत्व में गठित एक अंतर-मंत्रालयीय टीम जल्दी ही नेपाल रवाना होगी और ‘आॅपरेशन मैत्री’ के तहत वहां राहत तथा बचाव कार्यों का समन्वय करेगी।

यहां प्रेस कांफ्रेस में विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा कि नेपाल में स्थिति और खराब हो सकती है क्योंकि अगले 48 घंटों में बहुत भारी वर्षा होने की आशंका है। इससे बचाव कार्य में बाधा आएगी। उन्होंने कहा कि नेपाल में राहत और बचाव कार्य हमारा प्राथमिक मिशन है। वहां स्थिति बहुत बहुत गंभीर है। प्रेस कांफ्रेंस में गृह सचिव एलसी गोयल, रक्षा सचिव आरके माथुर, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार के प्रमुख आरके जैन और भारत मौसम विज्ञान विभाग के प्रमुख एलएस राठौड़ भी मौजूद थे।

नेपाल से बचाए गए भारतीयों की जानकारी देते हुए विदेश सचिव जयशंकर ने बताया कि शनिवार को 546 लोगों को वहां से निकाला गया था जबकि रविवार को अभी तक 504 लोग वापस लाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बचावकर्मी अन्य देशों के नागरिकों को भी वहां से निकालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भारतीय पहली प्राथमिकता हैं।

अभी तक भारत ने दस टन कंबल, 50 टन पेयजल, 22 टन भोजन और दो टन दवाएं काठमांडो भेजी हैं। सेना के तीन फील्ड अस्पताल, इंजीनियरिंग टास्क फोर्स और असैन्य डॉक्टरों की मेडिकल यूनिट नेपाल भेजी गई है।

जयशंकर ने कहा कि ताजा झटकों से बचाव और राहत कार्य प्रभावित हुआ है क्योंकि काठमांडो हवाईअड्डा कई घंटे तक बंद रहा। हालांकि बाद में हवाईअड्डा खुल गया। सरकार ने नेपाल में फंसे हुए भारतीयों को निकालने के लिए 35 बसें लगाई हैं। इन्हें सोनौली और रक्सौल के रास्ते भारत-नेपाल सीमा से निकाला जाएगा। गृह सचिव ने कहा कि हम सड़क मार्ग से बड़े पैमाने पर लोगों को निकाल रहे हैं।

रक्षा सचिव ने कहा कि भूकम्प केंद्र के पास मकानों को क्षति पहुंची है। सैन्य हेलिकॉप्टर के हवाई सर्वेक्षण से यह जानकारी मिली है। हालांकि उन्होंने कहा कि घर बनाने में ग्रामीणों के हल्की सामग्री के इस्तेमाल के मद्देनजर भूकम्प के केंद्र के पास ज्यादा लोगों के हताहत होने की आशंका नहीं है। अधिकारियों ने फंसे हुए हजारों लोगों से धैर्य रखने का आग्रह करते हुए उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत विदेशी नागरिकों सहित जितने लोगों को संभव हो वहां से निकालेगा।

जयशंकर ने कहा कि उन्होंने काठमांडो स्थित भारतीय दूतावास से बसों और ड्राइवरों का तुरंत इंतजाम करने को कहा है। यह दोनोंं वहां तत्काल उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भूकम्प के बाद मलबों के ढेर के कारण यातायात की गति काफी धीमी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोग भारत की इस ‘बहुत त्वरित प्रतिक्रिया’ को पसंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती काठमांडो से आगे सुदूर इलाके हैं जहां खराब मौसम के कारण पहुंचना मुश्किल हो रहा है। जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से राहत व बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और उन्हें समय-समय पर सभी सूचनाओं से अवगत कराया जा रहा है।

उधर, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि राज्य सरकार को नेपाल में फंसे राज्य के करीब 400 लोगों की जानकारी मिली है और वे सुरक्षित हैं। फडणवीस ने बताया- हमें जो फोन कॉल मिले हैं, उनसे पता चलता है कि नेपाल में महाराष्ट्र के करीब 1,200 लोग फंसे हुए हैं। अब तक हमें उनमें से 400 लोगों की जानकारी मिली है। हम लगातार ताजा जानकारी हासिल कर रहे हैं। वे सभी सुरक्षित हैं और कोई प्रतिकूल खबर नहीं है।

उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश से निकाले गए राज्य के लोगों के ब्योरे मिलते ही उन्हें वापस भारत ले आया जाएगा। हम जरूरतमंद लोगों को ट्रेन टिकट भी उपलब्ध करा रहे हैं ताकि वे अपने घर पहुंच सकें। हमने महाराष्ट्र सदन (दिल्ली में) उन्हें ठहराने की भी व्यवस्था की है। दिल्ली में हवाईअड्डे पर पर्याप्त संख्या में वाहन भी तैनात किए गए हैं।

वहीं नेपाल से नई दिल्ली के लिए 47 लोगों के उड़ान भरने के बाद भी आंध्र प्रदेश के 380 नागरिकों के वहां फंसे होने की सूचना है। राज्य सरकार ने बताया कि भूकम्प के बाद नेपाल में लगभग 380 लोगों के फंसे होने की खबर है। पड़ोसी देश से तीन विमानों के जरिए बचाए गए 400 भारतीयों में से शनिवार की रात करीब 47 लोग (28 हैदराबाद और 19 विजयवाड़ा) नई दिल्ली आ गए।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अपने कैबिनेट सहयोगी वाइएस चौधरी और दिल्ली में आंध्र प्रदेश के विशेष प्रतिनिधि के राममोहन राव से यह सुनिश्चित करने को कहा कि राज्य के लोगों को उनके गंतव्य के लिए तत्काल उड़ानों में बैठाया जाए। दिल्ली स्थित आंध्र प्रदेश भवन के अधिकारी नेपाल दूतावास और भारतीय विदेश मंत्रालय के साथ संयोजन कर रहे हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर के एक पुलिस प्रवक्ता ने श्रीनगर में कहा कि काठमांडो में काम कर रहे सभी कश्मीरी सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार भूकम्प की वजह से काठमांडो में किसी भी कश्मीरी के मारे जाने की खबर नहीं है।

प्रवक्ता के मुताबिक हालांकि दो लोग जख्मी हुए हैं। जिनकी पहचान उमर और सज्जाद के रूप में हुई है। दोनों का इलाज किया जा रहा है और वे खतरे से बाहर हैं।

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