भ्रष्टाचार के मामले में भारत एक पायदान सुधरा

कोरोना महामारी के बीच व्यवस्थाओं से लड़ते हुए देश में भ्रष्टाचार की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

सांकेतिक फोटो।

गजेंद्र सिंह

कोरोना महामारी के बीच व्यवस्थाओं से लड़ते हुए देश में भ्रष्टाचार की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ओर से मंगलवार को जारी करप्शन परसेप्शन इनडेक्स (भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक) 2021 में बताया गया है कि 180 देशों के आंकड़ों के आधार पर बनाई गई रिपोर्ट के अनुसार भारत 85वें पायदान पर है। पिछले साल यह 86वें पायदान पर था। इस तरह भारत सिर्फ एक पायदान ऊपर आया है। वर्ष 2018 और 2019 में भारत के अंक 41 थे और यह 78वें व 80वें स्थान पर था।

अगम (एन इनिशिएटिव फार गुड गवर्नेंस) ने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के साथ यह सूचकांक जारी किया है। इस दौरान 180 देशों में भ्रष्टाचार की स्थिति का आकलन किया गया। एजंसी की ओर से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 2015 में भारत की स्थिति 168 देशों के मुकाबले अच्छी थी। उस समय 180 की जगह 168 देशों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया था और भारत 76वें पायदान पर था। 2016 में 176 देशों में हुए सर्वेक्षण के मुकाबले भारत की स्थिति बिगड़ी और यह 79वें पायदान पर खिसक गया।

2017 में 180 देशों में सर्वेक्षण शुरू हुआ और भारत 81वें पायदान पर रहा। 2018 में स्थिति थोड़ी बेहतर हुई और यह 78 पर आया, लेकिन 2019 से फिर भ्रष्टाचार की स्थिति बिगड़ती चली गई। अगम के वाइस प्रेसिडेंट बृजभूषण सिंह बताते हैं कि भारत में भले ही एक पायदान का सुधार हुआ हो, लेकिन अंक पिछले साल के जैसा ही है। इसे सुधार नहीं मान सकते, बल्कि अभी काम करना बाकी है।

पिछले कुछ सालों के मुकाबले भ्रष्टाचार की स्थिति भारत में खराब ही हुई है। उनका यह भी कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान विश्व के लगभग सभी देशों में सरकारी कामकाज काफी प्रभावित हुआ और स्तिथि बिगड़ी। इसका असर वहां की पारदर्शिता पर भी दिखा। उन्होंने बताया कि सूचकांक तैयार करने के लिए विभिन्न देशों की करीब 13 एजंसी के आंकड़ों का उपयोग किया गया है।

भारत के पड़ोसी देशों का हाल जानें तो बांग्लादेश में भ्रष्टाचार की स्थिति ने पिछले 15 सालों का रेकार्ड तोड़ दिया है। इस साल यह 26 अंकों के साथ 146वें पायदान पर है। वहीं, पाकिस्तान की हालत और बिगड़ी है। यह पिछले साल 31 अंकों के साथ 124वें पायदान पर था। अफगानिस्तान में हालात बद से बदतर हुए हैं। यहां तालिबानी हुुकूमत के आने और इससे पहले भी कुछ खास स्थिति नहीं थी। 180 देशों की सूची में इसका स्थान 16 अंकों के साथ 174वें पायदान पर है। ों के साथ 140 पर पहुंच गया है।

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