मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार ने भरोसा जताया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत के पास इस समय 25 दिनों का कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का भंडार मौजूद है। इसके अलावा 25 दिनों का पेट्रोल और डीजल का भी स्टॉक उपलब्ध है। कुल मिलाकर देश के पास करीब 8 हफ्तों का कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार है।
सरकारी सूत्रों ने एएनआई को बताया कि भारत का केवल 40 प्रतिशत कच्चा तेल ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है। बाकी 60 प्रतिशत कच्चा तेल अन्य स्रोतों से आयात किया जाता है। इससे आपूर्ति पर किसी एक मार्ग का पूरा असर नहीं पड़ता। भारत पहले की तरह अपने पुराने समझौतों के अनुसार रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखे हुए है। सरकार का कहना है कि देश एलपीजी और एलएनजी के मामले में भी आरामदायक स्थिति में है। सरकार मध्य पूर्व की बदलती स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान और कुवैत के शेख से बातचीत की
उधर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और कुवैत के युवराज शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से बात की और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान उनके देश पर हुए हमलों को लेकर चिंता जतायी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। टेलीफोन पर हुई बातचीत में, प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों नेताओं से वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों के कल्याण और सुरक्षा पर भी चर्चा की।
एक अधिकारी ने बताया, ”प्रधानमंत्री ने मंगलवार दोपहर बाद खाड़ी क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण नेताओं से बातचीत की। उन्होंने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक और कुवैत के युवराज शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह से फोन पर बातचीत की।” मोदी ने दोनों नेताओं से बातचीत के दौरान, उनके देश में हुए हमलों पर चिंता जताई और वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों के कल्याण और सुरक्षा पर चर्चा की। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए संयुक्त हमले के बाद फोन पर यह बातचीत हुई।
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ईरान-इजराइल तनाव के वजह से मंगलवार को तीसरे दिन भी तेल की कीमतें बढ़ीं। तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है और मिडिल ईस्ट के मुख्य प्रोडक्शन वाले इलाके से सप्लाई में रुकावट का डर बढ़ गया है। सरकारी टेलीविजन पर ईरानी ब्रिगेडियर जनरल इब्राहिम जबारी ने कहा “तेल की कीमत 81 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है और दुनिया निश्चित रूप से इसके कम से कम 200 डॉलर तक पहुंचने का इंतजार कर रही है।” पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
