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लड़ाकू विमान रफाल पर करार, कीमत पर मतभेद सुलझने की उम्मीद

भारत और फ्रांस ने 36 फ्रांसीसी लड़ाकू विमान ‘रफाल’ की ब्रिकी के संबंध में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए लेकिन कीमत को लेकर मतभेद अरबों डॉलर के इस सौदे को निष्कर्ष तक पहुंचाने की राह में आ गए।

Author नई दिल्ली | January 26, 2016 1:27 AM
भारत और फ्रांस ने 36 फ्रांसीसी लड़ाकू विमान ‘रफाल’ की ब्रिकी के संबंध में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। (फाइल फोटो)

भारत और फ्रांस ने 36 फ्रांसीसी लड़ाकू विमान ‘रफाल’ की ब्रिकी के संबंध में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए लेकिन कीमत को लेकर मतभेद अरबों डॉलर के इस सौदे को निष्कर्ष तक पहुंचाने की राह में आ गए। दोनों देशों के बीच हुए 14 समझौतों में रफाल का समझौता शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की यात्रा पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलौंद के बीच व्यापक व गहन विचार विमर्श के बाद ये समझौते हुए। इनमें आतंकवाद निरोधी, सुरक्षा व असैन्य परमाणु ऊर्जा में सहयोग को प्रमुखता दी गई है।

ओलौंद के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने कहा, ‘वित्तीय आयामों को छोड़ते हुए भारत और फ्रांस ने 36 लड़ाकू रफाल विमानों की खरीद के अंतर सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हमें उम्मीद है कि रफाल की खरीद से जुड़े वित्तीय आयामों को भी जितना जल्दी संभव होगा, सुलझा लिया जाएगा।’ आइजीए पर हस्ताक्षर को एक ‘निर्णायक’ कदम करार देते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति ओलौंद ने कहा कि कुछ वित्तीय मुद्दे हैं जिन्हें ‘कुछ दिनों के भीतर’ सुलझा लिया जाएगा।

मोदी की अप्रैल में फ्रांस यात्रा के दौरान इस सौदे की घोषणा के बाद से ही दोनों देश उड़ान भरने की स्थिति वाले 36 लड़ाकू रफाल विमानों की खरीद को लेकर आपस में बातचीत कर रहे थे। बहरहाल, दोनों देशों के बीच सौदे को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है क्योंकि दोनों पक्ष अब भी कीमत को लेकर बातचीत कर रहे हैं। यह सौदा करीब 59,000 करोड़ रुपए का होने का अनुमान है।

विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा, ‘सोमवार को जिस पर हस्ताक्षर किया गया वो सहमति पत्र था। जब हम इसके वित्तीय पहलुओं को सुलझा लेंगे तो निश्चित तौर पर आइजीए को संपूर्ण रूप से निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा।’ सरकार के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि कीमत को अंतिम रूप दिए जाने के बाद आइजीए पर हस्ताक्षर किया जाएगा। दोनों पक्षों को उम्मीद है कि इसमें चार सप्ताह का समय और लग सकता है।

सूत्रों के मुताबिक यूपीए की निविदा के तहत 36 रफाल विमानों की कीमत करीब 65,000 करोड़ रुपए बैठती है जो लागत बढ़ने व डॉलर की दर के संदर्भ में हैं। इस कीमत में विमान में भारत की ओर से की गई बदलाव की मांग पर आने वाली लागत भी शामिल है। उन्होंने कहा, ‘कोशिश यह है कि कीमत को आठ अरब यूरो (59,000 करोड़ रुपए) से नीचे लाया जाए।’

सूत्रों ने कहा, ‘कम से कम 50 फीसद राशि का अग्रिम भुगतान करना होगा जिसमें तत्काल 15 फीसद का भुगतान शामिल है।’ उन्होंने कहा कि इसमें फ्रांस की सरकार गारंटी देगी। रफाल की निर्माता कंपनी दसाल्त एविएशन ने एक बयान में कहा, ‘हम इस प्रगति से बहुत खुश हैं और हम अगले चार सप्ताह के भीतर इस समझौते को अंतिम रूप दिलाने में फ्रांसीसी सरकार को सक्रियता से सहयोग प्रदान कर रहे हैं।’

रक्षा सहयोग के अलावा दोनों नेताओं की बातचीत पिछले नवंबर में पेरिस में और इस महीने पठानकोट में हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि में आतंकवाद निरोधी सहयोग पर केंद्रित रही। मोदी ने कहा, ‘ पेरिस से पठानकोट तक हमने साझा चुनौती वाले आतंकवाद के भयानक चेहरे को देखा है। मैं ऐसे आतंकी हमलों के विरूद्ध आपके मजबूत संकल्प और कार्रवाई की सराहना करता हूं। राष्ट्रपति ओलौंद और मैं हमारे आतंकवाद निरोधी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने को सहमत हुए हैं जिससे कि हमारे समाज में कट्टरपंथ और आतंकवाद के खतरों से निपटने में मदद मिल सके।’

ओलौंद ने कहा, ‘दाएश (आइएस) ने हम पर हमला किया। आइएसआइएस हमें उकसा रहा है लेकिन हम उनके खिलाफ सही निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो हमारे बच्चों की हत्याएं करेगा। हम उस पर बार बार प्रहार करेंगे। इन कठिन परिस्थितियों में आपके समर्थन के लिए मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूं। फ्रांस कभी भूलेगा नहीं। हमने आतंकवाद के खिलाफ अपने सहयोग को मजबूत करने का निर्णय किया है।’

दोनों पक्षों ने हिंसक उग्रवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ व भर्तियों, आतंकवादी गतिविधियों और विदेशी आतंकी लड़ाकों के प्रवेश, आतंकवादियों के वित्त पोषण के स्रोतों, उनकी आधारभूत संरचना को ध्वस्त करने तथा इन्हें हथियारों की आपूर्ति रोकने के लिए संयुक्त प्रयास करने की दिशा में कदम उठाने का निर्णय किया है।

मोदी और ओलौंद के बीच चर्चा के अन्य मुद्दों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ‘ स्मार्ट सिटी से लेकर रेल इंजन, रेलवे ट्रैक और परमाणु ऊर्जा तक, ये सभी नए वाणिज्यिक गठजोड़ बनाने का आधार हैं।’ अपनी ओर से ओलौंद ने जोर दिया, ‘असैन्य परमाणु प्रौद्योगिकी साझा करने से अधिक भरोसे की और कोई बात नहीं हो सकती है और उम्मीद जताई कि जैतापुर परमाणु संयंत्र से जुड़े छह रिएक्टरों के बारे में मामलों का समाधान एक वर्ष के भीतर हो जाएगा।’

बयान में कहा गया है कि वर्ष 2008 में हुए असैन्य परमाणु करार के अलोक में दोनों नेताओं ने जैतापुर के छह परमाणु रिएक्टरों के निर्माण के लिए अपनी अपनी औद्योगिक कंपनियों को 2016 के अंत तक तकनीकी वाणिज्यिक वार्ताओं को पूरा करने को प्रेरित किया।

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