सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहले समलैंगिक न्यायाधीश को दी मंजूरी, जानें सौरभ कृपाल की पूरी कहानी; काफी दिनों से नाम पर हो रही थी चर्चा

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने देश के पहले समलैंगिक को दिल्ली हाईकोर्ट में जज के पद पर नियुक्ति के लिए हरी झंडी दिखा दी है। वरिष्ठ वकील सौरभ कृपाल देश के ऐसे पहले समलैंगिक व्यक्ति हैं जो अब जज का कार्यभार संभालने जा रहे हैं।

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देश के पहले समलैंगिक जज बनेंगे सौरभ कृपाल (फोटो- saurabh.kirpal facebook)

देश में पहली बार कोई समलैंगिक, अब न्यायधीश की कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं। वरिष्ठ वकील सौरभ कृपाल को अब सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के जज के रूप में नियुक्ति की मंजूरी दे दी है। सौरभ पिछले कई सालों से इसके लिए संघर्ष कर रहे थे।

इस तरह से हुई नियुक्ति- कई बार सीनियर एडवोकेट सौरभ कृपाल की उम्मीदवारी पर फैसला टालने के बाद, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने आखिरकार दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनके नाम की सिफारिश कर दी है। कॉलेजियम ने एक बयान में कहा कि यह फैसला 11 नवंबर को हुई बैठक में लिया गया। कृपाल समलैंगिक हैं और यदि उनका चयन किया जाता है, तो उनका उत्थान समलैंगिक अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा। कृपाल उस ऐतिहासिक मामले में दो याचिकाकर्ताओं के वकील थे, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था।

ये थी आपत्तियां- इंडियन एक्सप्रेस को पता चला है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने सरकार द्वारा बार-बार आपत्तियों के बावजूद कृपाल के नाम पर अपना स्टैंड लिया। केंद्र ने हितों के टकराव का दावा करते हुए उनकी पदोन्नति पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि उनका पार्टनर यूरोपीय है और स्विस दूतावास के साथ काम करता है।

कई बार टला फैसला- सीजेआई रमना के अलावा, हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लिए सिफारिशें करने वाले कॉलेजियम में सदस्य के रूप में जस्टिस यू यू ललित और ए एम खानविलकर हैं। एससी कॉलेजियम की सिफारिश 2018 में पहली बार कृपाल की उम्मीदवारी पर विचार करने के लगभग तीन साल बाद आई है। कॉलेजियम ने तब तीन अन्य अवसरों पर कृपाल की सिफारिश पर अपना फैसला टाल दिया था।

कानून मंत्री को लिखा गया था पत्र- बताया जाता है कि समलैंगिकता के कारण सौरभ को जज की नियुक्ति के लिए इतना इंतजार करना पड़ा है। खुद सौरभ कृपाल भी कुछ ऐसा ही एक इंटरव्यू में भी कह चुके हैं। फरवरी में, इन अटकलों के बीच कि कृपाल की नियुक्ति उनकी सेक्सुअलिटी के कारण रुकी हुई थी, तब सीजेआई एसए बोबडे ने तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र लिखकर खुफिया जानकारी पर स्पष्टीकरण मांगा था। सरकार ने कृपाल के पार्टनर की राष्ट्रीयता पर अपनी आपत्ति दोहराते हुए इसका जवाब दिया था।

कैम्ब्रिज से पढ़ाई- सौरभ कृपाल न्यायमूर्ति बीएन कृपाल के पुत्र हैं, जो मई 2002 से नवंबर 2002 तक भारत के 31 वें मुख्य न्यायाधीश थे। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद, लॉ की पढ़ाई के लिए ऑक्सफोर्ड चले गए। सौरभ कृपाल ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से कानून में मास्टर की भी डिग्री ली है।

संयुक्त राष्ट्र के साथ काम- भारत लौटने से पहले, सौरभ कृपाल ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के साथ कुछ समय के लिए काम किया। वह दो दशकों से अधिक समय से भारत में वकील के पेशे में हैं। उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्रों में नागरिक, वाणिज्यिक और संवैधानिक कानून शामिल है। सौरभ कृपाल समलैंगिक हैं और एलजीबीटीक्यू (LGBTQ) के अधिकारों के लिए मुखर रहे हैं। उन्होंने ‘सेक्स एंड द सुप्रीम कोर्ट’ नामक पुस्तक भी लिखी है। उनके पार्टनर निकोलस जर्मेन एक विदेशी नागरिक और स्विस मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। मार्च 2021 में, सौरभ कृपाल को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था। उस समय दिल्ली उच्च न्यायालय के सभी 31 न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से उनके वरिष्ठ पद के पक्ष में मतदान किया था।

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