दुनिया के नए नक्शे को लेकर भारत ने अपनी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत भारत के पूरा क्षेत्र दिखाने वाले आधिकारिक नक्शे के हिसाब से दिखाए जाने चाहिए। विदेश मंत्रालय ने कहा, “भारत के क्षेत्र को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना हमें मंजूर नहीं है, हमारी सीमाएं अटल हैं और इससे कोई समझौता नहीं हो सकता।”

बीते शुक्रवार को यूएन महासभा ने दुनिया के मैप को नए तरीके से दिखाने का प्रस्ताव पास किया। यूएन ने साफ किया था कि इस बदलाव से किसी देश या महाद्वीप का असली क्षेत्रफल नहीं बदलेगा, केवल नक्शे पर उनका आकार पहले से कुछ बड़ा या छोटा नजर आ सकता है।

भारत ने प्रस्ताव का किया समर्थन

भारत ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) महासभा के ‘इक्वल-एरिया’ (बराबर क्षेत्रफल वाले) वर्ल्ड मैप के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है। भारत ने इस दौरान यह भी साफ किया कि उसके समर्थन का मतलब यह बिल्कुल न समझा जाए कि उसने किसी खास मैप प्रोजेक्शन या राष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण को मंजूरी दे दी है।

भारत की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे में समय में आया है जब यूएन महासभा ने 4 सितंबर को नक्शा सही करना- ग्लोबल कार्टोग्राफिक चित्रण में संतुलन बनाना और दुनिया के क्षेत्रों, खासकर अफ्रीका के समान प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देना शीर्षक वाला एक प्रस्ताव अपनाया है। यह प्रस्ताव इक्वल एरिया मैप प्रोजेक्शन के इस्तेमाल को बढ़ावा देती है।

वोट देने की वजह भी बताई

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया है। उन्होंने वोट देने के पीछे की वजह भी बताई। उन्होंने इक्वल एरिया वाले नक्शों को बढ़ावा देने के सिद्धांत पर भी जोर दिया।

रणधीर जायसवाल ने कहा, “यह प्रस्ताव न तो किसी खास वर्ल्ड मैप को अपनाता है और न ही उसे सही ठहराता है। साथ ही, यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित इलाकों या जगहों के नामों जैसे राजनीतिक नक्शों से जुड़े मामलों पर भी बात नहीं करता है।”

‘भारत के आधिकारिक नक्शे के मुताबिक ही दिखाया जाना चाहिए’

भारत ने अपने इलाके को दिखाए जाने के तरीके पर भी अपना रुख साफ किया। भारत ने कहा कि उसके संप्रभु इलाके को भारत के आधिकारिक नक्शे के मुताबिक ही दिखाया जाना चाहिए। जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र-शासित प्रदेश भी शामिल है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, “किसी भी गलत या भ्रम पैदा करने वाले नक्शे को स्वीकार नहीं किया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर भारत का रुख “स्पष्ट, सुसंगत और ऐसा है जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”

यूएन का प्रस्ताव ‘इक्वल-एरिया प्रोजेक्शन’ (equal-area projections) के अधिक इस्तेमाल को बढ़ावा देना चाहता है। ये प्रोजेक्शन महाद्वीपों और देशों को उनके असल क्षेत्रफल के अनुपात में दिखाते हैं। यह प्रस्ताव बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले ‘मरकेटर प्रोजेक्शन’ (Mercator projection) पर रोक नहीं लगाता है और न ही देशों, स्कूलों, पब्लिशर्स या टेक्नोलॉजी कंपनियों को कानूनी रूप से कोई दूसरा नक्शा अपनाने के लिए मजबूर करता है।

यह भी पढ़ें: भारत ने सौ साल पुराने हिंदू मंदिर ध्वस्त करने पर पाकिस्तान को लगाई लताड़, कहा- जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए

भारत ने बुधवार को पाकिस्तान के नारोवाल इलाके में सौ साल पुराने एक हिंदू मंदिर को कथित तौर पर ढहा दिए जाने की कड़ी निंदा की और पाकिस्तानी सरकार से मांग की कि वह इस घटना की तुरंत जांच करे और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को पूरी तरह जवाबदेह ठहराए। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें