India-European Union Trade Deal: भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच व्यापारिक समझौता यानी FTA के संबंध में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत यूरोपीय देशों से प्रौद्योगिक संबंधी जानकारी और निवेश के साथ ही अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी विस्तार देने के लिए विचार कर रही है। इसीलिए ये ट्रेड डील व्यापार से कहीं ज्यादा व्यापक है।
मोदी सरकार में मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सच तो यह है कि यह (FTA) सिर्फ व्यापार से कहीं अधिक है। यह एक रणनीतिक और रक्षा साझेदारी है। इसके अलावा वित्तीय एकीकरण भी है। आगे चलकर, यह एक गतिशीलता वाली साझेदारी होगी, और उन्होंने (EU) कहा है कि हम एक निवेश संरक्षण समझौता करना चाहेंगे।
रणनीतिक रक्षा साझेदारी की
यूरोपीय देशों द्वारा रक्षा खर्च में की गई महत्वपूर्ण वृद्धि का जिक्र करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि हमने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी की है… अगले पांच वर्षों के लिए उनका बजट 800 अरब यूरो है।
पीयूष गोयल ने संकेत दिया कि यूरोपीय संघ इसके कुछ हिस्सों को आउटसोर्स करने पर विचार कर सकता है, जिससे भारत को अवसर मिल सकता है। यूरोपीय संघ की ‘रीआर्म यूरोप’ पहल 2030 तक रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए 800 अरब यूरो की रणनीति है।
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कार्बन फुटप्रिंट कम होगा
कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) के विवादास्पद मुद्दे पर गोयल ने कहा कि हम जो कार्बन टैक्स चुकाते हैं, उसे वहां मान्यता दी जाएगी। इसलिए उस हिस्से की भरपाई की जा सकती है। उदाहरण के लिए, हमारी ज़्यादा से ज़्यादा स्टील मिलें अब ज़्यादा कुशल होती जा रही हैं। वैसे भी, उनका कार्बन फुटप्रिंट कम होगा। इसलिए हमें बहुत ज़्यादा कार्बन टैक्स नहीं देना पड़ेगा।
सीबीएएम एक शुल्क या कर है जो यूरोप द्वारा उन वस्तुओं पर लगाया जाता है जिनका उत्पादन अन्य देशों में ऐसी प्रक्रियाओं द्वारा किया जाता है जिनसे कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है।
लग्जरी कैटेगरी की कारों का व्यापार
वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने कहा कि यूरोपीय संघ भारत को कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों में मदद कर रहा है। 500 मिलियन यूरो के संयुक्त कोष की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। यह तो बस शुरुआत है। पीयूष गोयल ने कहा कि ऑटोमोबाइल के संदर्भ में भारत में बिकने वाली छोटी कारों में से कोई भी प्रभावित नहीं हुई है, जो बाजार का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा हैं। उन्होंने आगे कहा कि जिन कारों के बाजार को हमने खोला है और श्रेणीबद्ध तरीके से कोटा दिया है, वे लग्जरी श्रेणी में आती हैं।
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चीन का विकल्प बन रहा भारत
यूरोपीय संघ के व्यापार समझौते से भारतीय विनिर्माण क्षेत्र को विस्तार करने और 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के लिए चीन के विकल्प के रूप में आपूर्तिकर्ता बनने का अवसर मिलता है। इसे दोनों पक्षों के लिए लाभकारी माना जा रहा है। पीयूष गोयल ने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए भारतीय उद्योग को अपनी क्षमताएं बढ़ानी होंगी।
उन्होंने कहा कि उद्योग को उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार करना होगा। मंत्री ने कहा कि भारत द्वारा हस्ताक्षरित कई मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों के बारे में उद्योग जगत से सरकार के संपर्क में न केवल बड़े उद्योग संघ शामिल हैं, बल्कि क्षेत्रीय और स्थानीय चैंबर भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई , चेन्नई , राजकोट, कोलकाता आदि के चैंबरों को संबोधित किया जा रहा है। कई लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) यह जानने के इच्छुक होंगे कि उनके क्षेत्र में टैरिफ कैसे कम हुए हैं।
पीयूष गोयल ने कहा, “मैंने यूरोपीय संघ से कहा देखिए अगर आपको सरकारी खरीद चाहिए, तो मुझे सभी 27 राज्यों से यह प्रतिबद्धता दिलाइए कि वे सरकारी खरीद की अनुमति देंगे। उन्होंने कहा, अरे! यह तो यूरोपीय सदस्य देशों का अधिकार क्षेत्र है। मैंने कहा, मैं आपको अपनी सरकारी खरीद क्यों दूं… पारस्परिकता इस सरकार का सिद्धांत है।” EU अध्यक्ष ने गिनाए फ्री ट्रेड डील के फायदे
