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गायों की देखभाल करने वाली जर्मन महिला को पद्मश्री, कभी भारतीय नागरिकता के लिए हेमा से की थी सिफारिश

फ्रेडरिक इरीना की गौशाला में 1,200 गायें और बछड़े हैं। 60 लोग काम करते हैं, जिनका परिवार भी गौशाला से ही चलता है। हर महीने गौशाला पर करीब 25 लाख रुपये खर्च, यह पैसा वे अपनी पैतृक संपत्ति से मिलने वाले सालाना किराए और यहां से मिलने वाले दान से जुटाती हैं।

फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग जर्मनी की नागरिक हैं लेकिन पिछले कई सालों से भारत में गायों की देखभाल कर रही हैं।(फोटो सोर्स- फेसबुक, @Save cow, help cows)

भारत सरकार ने 70वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। विभिन्न क्षेत्रों के 112 लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इनमें 4 लोगों को पद्म विभूषण, 14 को पद्म भूषण और 94 को पद्मश्री सम्मान किया जाएगा। सम्मान पाने वालों में 21 महिलाएं और 11 विदेशी, पीआईओ और एनआरआई श्रेणी में शामिल हैं। पद्मश्री पाने वालों में तीन को गौ सेवक भी शामिल हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, मथूरा के हिंदू संत रमेश बाबा जी महाराज, शब्बीर सैयद और फ्रेडरिक इरीना शामिल हैं। गोवर्धन, राधाकुंड निवासी महिला फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग वैसे तो जर्मनी की नागरिक हैं लेकिन पिछले कई सालों से भारत में गायों की देखभाल कर रही हैं। अब वे देश में गौरक्षों को के लिए बड़ी मिसाल बन चुकी हैं और यहां के लोग उन्हें प्यार से सुदेवी माताजी के नाम से भी पुकारते हैं।

फ्रेडरिक इरीना ने अपना जीवन बेसहारा और बीमार गायों की सेवा में बिताने का फैसला लिया है। गायों की देखरेख के लिए उन्होंने सुरभि गौसेवा निकेतन नाम से गौशाला शुरू किया है। मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि, ‘उनकी गौशाला में 1,200 गायें और बछड़े हैं। गौशाला में 60 लोग काम करते हैं, जिनका परिवार भी गौशाला से ही चलता है। हर महीने गौशाला पर करीब 25 लाख रुपये खर्च होते हैं। यह धनराशि वह बर्लिन में अपनी पैतृक संपत्ति से मिलने वाले सालाना किराए और यहां से मिलने वाले दान से जुटाती हैं।’

बता दें कि फ्रेडरिक इरीना सन 1978 से गोवर्धन में निवास कर रही है। जानकारी के मुताबिक वे 1978 में भारत घूमने के लिए आई थीं। इसी दौरान मथुरा में गायों के प्रति उनका लगाव काफी बढ़ गया और एक गाय खरीद ली। गाय की देखभाल करते हुए धीरे-धीरे इरीना का लगाव इतना गहरा हो गया कि उन्होंने गाय से संबधित किताबें पढ़ना और हिंदी बोलना शुरू किया। हालांकि इसके बाद इरीना के पिता कई बार गोवर्धन आकर उन्हें जर्मनी चलने की मिन्नतें कर चुके हैं लेकिन उन्होंने ब्रज प्रेम ने अपने देश-दुनिया के सभी नाते रिश्ते परे रख दिए हैं।

इरीना के इसी जज्बे और काम की वजह से उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा। वे बहुत पहले भारत की नागरिकता चाहती हैं, जिसके लिए उन्होंने मथुरा (उत्तर प्रदेश) की सांसद हेमा मालिनी से अपना वीजा बढ़वाए जाने की सिफारिश की मांग भी की थी। स्थानीय लोग इरीका को स्नेह और सम्मान से देखते हैं। अगर उन्हें भारत की नागरिकता मिलती है तो लोगों को काफी खुशी होगी।

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