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सदस्‍य बनाने पर राजी हुआ MTCR, अब भारत भी खरीद सकेगा उच्‍चस्‍तरीय मिसाइल तकनीक

अतंर्राष्‍ट्रीय संबंधों में एक कदम आगे बढ़ाते हुए भारत को MICR का सदस्‍य बनाने पर सबकी सहमति मिल गई है।

Author वाशिंगटन | June 7, 2016 8:35 PM
भारत अभी रूस के साथ मिलकर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइज ‘ब्रहमोस’ बनाता है। (Twitter)

भारत को सदस्‍य बनाने को लेकर मिसाइल टेक्‍नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) ने सहमति जताई है। यह एक प्रसार विरोधी समूह है। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी राष्‍ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात से पहले इसे मोदी की जीत माना जा रहा है।

MTCR में शामिल होने से भारत उच्‍चस्‍तरीय मिसाइल तकनीक खरीद सकेगा। साथ ही इससे आतंरिक सुरक्षा के लिए सर्विलांस ड्रोन्‍स भी खरीदे जा सकेंगे। भारत अभी रूस के साथ मिलकर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइज ‘ब्रहमोस’ बनाता है ताकि उसे अन्‍य देशों को बेचा जा सके। MTCR का सदस्‍य बनने पर भारत को कुछ नियमों का पालन करना पड़ेगा जैसे अधिकतम 300 किलोमीटर से कम रेंज वाली मिसाइल बनाना, ताकि हथियारों की होड़ को रोका जा सके।

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इस मामले से जुड़े राजनयिकों से कहना है कि भारत की सदस्‍यता को लेकर 34 सदस्‍यों वाले समूह की आपत्तियां ग्रहण करने का समय सोमवार को खत्‍म हो गया। किसी भी देश ने भारत की सदस्‍यता पर आपत्ति नहीं जताई है।

बराक ओबामा से मिलने वाशिंगटन पहुंचे मोदी ने कई देशों को न्‍यूक्लियर सप्‍लायर्स समूह में भारत को जोड़ने पर सहमत कर लिया है। अभी तक भारत को इस समूह में इसलिए शामिल नहीं किया गया है क्‍योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्‍ताक्षर नहीं किए हैं। भारत का कहना है कि अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार विकसित करना उसका हक है।

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