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चीन के बहिष्कार की मुहिम में शामिल होने को तैयार नहीं ये दो सेक्टर, कहा- कहना आसान है

दुनिया के कई अन्य देशों की तरह भारत भी इलेक्ट्रोनिक कंपोनेंट्स और दवाईयों के इंग्रीडेंट्स के लिए चीन पर निर्भर है। दरअसल दुनिया में कहीं भी चीन से सस्ता सामान नहीं मिलता है।

देश की फार्मा और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री चीन पर काफी निर्भर है।

सीमा पर चीन के साथ जारी तनाव के बाद से ही देश में चीनी सामान के बहिष्कार की बात चल रही है। लेकिन बीती 15 जून को लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवानों की शहादत के बाद से देश में चीन के खिलाफ गुस्से का उबाल देखा जा रहा है। पीएम मोदी भी इंडस्ट्रीज से अपील कर चुके हैं कि वह चीन पर अपनी निर्भरता कम करें। हालांकि देश के दो अहम बिजनेस सेक्टर चीन के बहिष्कार की मुहिम में शामिल होने को फिलहाल तैयार नहीं है।

ये दो इंडस्ट्री हैं ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री। इन इंडस्ट्रीज का कहना है कि उनके लिए चीन के सामान का बहिष्कार कहना आसान है लेकिन करना उतना ही मुश्किल। बता दें कि दुनिया के कई अन्य देशों की तरह भारत भी इलेक्ट्रोनिक कंपोनेंट्स और दवाईयों के इंग्रीडेंट्स के लिए चीन पर निर्भर है। दरअसल दुनिया में कहीं भी चीन से सस्ता सामान नहीं मिलता है।

ऐसे में यदि चीन से आयात घटाने की कोशिश की जाती है तो उससे चीजों की कीमत बढ़ने की आशंका है, जिससे स्थानीय बिजनेस को खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है। रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के चेयरमेन आरसी भार्गव का कहना है कि “हम चीन से सामान इसलिए आयात नहीं करते हैं कि हमें पसंद है बल्कि इसलिए क्योंकि हमारे पास कोई विकल्प ही नहीं है।”

उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर कंपनियों को प्रोडक्शन करने के लिए बढ़ावा देने के लिए हमें अधिक प्रतिस्पर्धी और अन्य देशों के मुकाबले अपनी कीमत को कम रखने की जरुरत है। बता दें कि भारत ने वित्तीय वर्ष मार्च 2019 में चीन से 70 अरब डॉलर से ज्यादा का आयात किया है, जबकि भारत ने चीन को सिर्फ 16.7 बिलियन डॉलर का निर्यात किया है। इससे भारत को काफी ज्यादा घाटा सहना पड़ रहा है।

सरकार अब चीन से जारी तनाव के बीच उसके 1173 गैर जरुरी सामान पर टैरिफ बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही भारत ने चीन से आने वाले निवेश पर भी निगरानी बढ़ा दी है। हाल के समय में चीनी कंपनियों ने भारतीय कंपनियों में काफी निवेश किया है। यही वजह है कि अब सरकार ने निवेश से पहले सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया है।

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