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LAC पर 6 घंटे भारत-चीन में बात, देश ने उठाया PLA की तैनाती का मुद्दा; ‘ड्रैगन’ बोला- हम देखेंगे, पर इंडिया के निर्माण कार्य पर जताई आपत्ति

सूत्रों के अनुसार, बातचीत लंबी चलेगी और स्थिति को संभालने के लिए हमें छोटे-छोटे कदम उठाने पड़ेंगे। अब भारत और चीन के बीच ब्रिगेडियर लेवल और संयुक्त सचिव स्तर पर लगातार बातचीत होगी।

भारत चीन के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए बातचीत लंबी चल सकती है। (फाइल फोटो)

भारत चीन सीमा विवाद के बीच नई दिल्ली ने संकेत दिए हैं कि वह बीजिंग से लंबी बातचीत के लिए तैयार है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने रविवार को अपने एक बयान में कहा है कि ‘दोनों पक्ष मिलिट्री और डिप्लोमैटिक तरीके से बातचीत जारी रखेंगे और सीमावर्ती इलाकों में स्थिति को शांति से सुलझाएंगे।’ शनिवार को दोनों देशों के बीच चुसुल-मोल्डो बॉर्डर पर कमांडर लेवल की मीटिंग के बाद यह पहला बयान है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह मीटिंग ‘सकारात्मक माहौल’ में हुई।

सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों में खुले माहौल में बातचीत हुई। उनके अनुसार, बातचीत लंबी चलेगी और स्थिति को संभालने के लिए हमें छोटे-छोटे कदम उठाने पड़ेंगे। अब भारत और चीन के बीच ब्रिगेडियर लेवल और संयुक्त सचिव स्तर पर लगातार बातचीत होगी।

शनिवार को हुई कमांडर लेवल की बातचीत में भारत ने चीन को सीमा पर यथास्थिति बहाल करने की मांग रखी है। इस दौरान भारतीय सेना की तरफ से चीनी सेना की अप्रैल से एलएसी पर हुई तैनाती की पूरी जानकारी दी गई। बैठक के दौरान भारत ने पैंगोंग त्सो इलाके में चीनी सेना की घुसपैठ पर भी चर्चा की गई और उन्हें वापस लौटने और यथास्थिति बहाल करने को कहा गया है।

चीन की तरफ से बड़ी संख्या में एलएसी पर सैनिकों की तैनाती कर आक्रामक रुख अपनाया जा रहा है। भारतीय सेना ने इस पर भी आपत्ति जतायी। भारत ने सीमा पर पेट्रोलिंग जारी रखने की बात भी कही। वहीं इसके जवाब मं चीन ने कहा है कि ‘हम देखेंगे’ लेकिन उन्होंने सीमा पर भारत की तरफ से हो रहे निर्माण कार्यों पर आपत्ति जतायी।

भारत ने खासतौर पर गलवान घाटी में चीनी सेना की तरफ से बनाए जा रहे ठिकानों पर आपत्ति जाहिर की है और पीछे हटने को कहा है। दरअसल भारत के लिए यह चिंता की बात इसलिए है क्योंकि यहां से 255 किलोमीटर लंबे और रणनीतिक रूप से अहम दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड को खतरा है। इसी रोड से भारतीय सेना अपनी कराकोरम पास की अग्रिम चौकियों पर पहुंच पाती है।

शनिवार को दोनों सेनाओं के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बैठक कुल 6 घंटे चली, जिसमें 3 घंटे बातचीत हुई। इस बैठक का सकारात्मक पक्ष ये रहा कि दोनों पक्ष शांति से विवाद का निपटारा करने के लिए सहमत हो गए हैं। मीटिंग के बाद लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने आर्मी चीफ, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और पीएमओ को इसकी जानकारी दी।

इसी बीच सेना ने भी लद्दाख में ऊंचाई वाले ठिकानों पर अपनी सेना की तैनाती शुरू कर दी है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में चीन की सेना को जवाब दिया जा सके।

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