पूर्वी लद्दाख में पीछे हटने को राजी हुआ चीन, टैंक और गोलबारूद लेकर फिंगर 8 में जाएगा वापस

6 महीने के तनाव के बाद आखिरकार चीनी सेना पैंगोंग लेक एरिया से वापस जाने को तैयार है। यह प्रस्ताव चीन की ही तरफ से आया है। हालांकि अभी औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है।

India China, India China faceoffपीछे हटने को तैयार हुई चीनी सेना।

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख सीमा पर लंबे समय से तनाव बरकरार था लेकिन दिवाली से पहले यह पेच सुलझ गया है। चीन की सेना पैंगोंग में पीछे हटने को तैयार हो गई है। 6 महीने पहले चीन की सेना एलओसी के 8 किलोमीटर पश्चिम में आ गई थी। अब पीएलए फिंगर 8 में जाने को तैयार है। चीन ने टैंक और गोला-बारूद के साथ पीछे जाने का प्रस्ताव रखा है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कोई समझौता नहीं हुआ है लेकिन भारत इसे एक ऑफर के तौर पर देख ऱहा है। अभी अन्य कुछ इलाकों पर बातचीत जारी है।

भारत और चीन के बीच तनाव को दूर करने के लिए कई बार बातचीत हुई लेकिन कोई हल नहीं निकल रहा था। भारत कह रहा था कि चीन की सेना वहीं चली जाए जहां अप्रैल से पहले थीं। लेकिन चीन इस बात को मानने को तैयार ही नहीं था। इसके बाद पैंगोंग में भारत ने भी अपनी सेना को तैनात कर दिया और टैंक, गोला-बारूद लगा दिए। दोनों सेनाओं में छह महीने से स्टैंडऑफ की स्थिति बनी हुई थी। सूत्रों का कहना है कि चीन पीछे हटने को तब तैयारा हुआ है जब भारत के लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन और चीन के मेजर जनरल लिउ लिन के बीच बातचीत हुई। यह बैठक 6 नवंबर को चुशूल में हुई थी।

सात राउंड में भारत और चीन के बीच बातचीत हुई थी लेकिन 6 नवंबर को कमांडरों ने आमने सामने बात की। सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि चीन के प्रस्ताव पर अब तक कोई समझौता नहीं हुआ है। जल्द कमांडर स्तर की बातचीत फिर हो सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह चीन की तरफ से प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि भारत की सेनाएं फिंगर 3 में धन सिंह थापा पोस्ट के पास तैनात रहेंगी। इस प्रस्ताव में फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच के एरिया को नो पट्रोलिंग जोन बनाने के भी प्रस्ताव है। जिससे कि किसी तरह का संघर्ष जन्म न ले।

पैंगोंग त्सो लेक के दक्षिण किनारे पर लगी चीनी सेना को वापस बुलाने के भी प्रस्ताव है। एक अधिकारी ने कहा कि अभी किसी भी बात पर औपचारिक सहमित पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। ये सारी बातें ग्रे जोन में हैं। उन्होंने कहा कि भारत फिर भी चीन से सावधान ही रहेगा क्योंकि विश्वास की कमी है। 15 जून को गलवान घाटी में हुए संघर्ष में 20 भारतीय सैनिकों की जान चली गई थी वहीं चीन के कई सैनिक मारे गए थे। भारत के मुताबिक एलएसी फिंगर 8 से होकर गुजरती है लेकिन मई में चीनी सेना 8 किलोमीटर अंदर फिंगर 4 में आ गई थी। जुलाई में बातचीत के बाद चीनी सेना फिंगर 5 में और भारतीय सेना फिंगर 3 में चली गई थी।

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