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चीन लद्दाख में लगातार अपना रहा आक्रामक रुख, जानें भारतीय वायु सेना की क्या है जवाबी तैयारी

किसी भी परिस्थिति में भारत-चीनी सेना का सीधा टकराव बिना विदेशी हस्तक्षेप के 10 दिनों से ज्यादा नहीं चल सकता है। जबकि भारतीय सेना के पास खुद का गोला-बारूद 40 दिनों और पारंपरिक गोला-बारूद 60 दिनों तक के लिए है।

India China, BJP, Ladakhविशेषज्ञों का मानना की अगर लड़ाई हुई तो दोनों तरफ से स्टैंड-ऑफ ( हवा में चलने वाले हथियार) वेपन से ही लड़ा जाएगा।

लद्दाख में चीनी सेना लगातार एलएसी (LAC) पर आक्रमक रूख बनाये हुए है।शांति के तमाम वादों के बावजूद चीन पीछे हटने को तैयार नहीं है। अब वह बड़ी मात्रा में विवादित स्थल पर सैनिकों और सैन्य शस्त्रों का जमावड़ा बढ़ा रहा है। भारतीय वायुसेना के उच्च सैन्य अधिकारी के अनुसार- बड़ी मात्रा में हथियार और मिसाइलों के साथ साथ 50000 हज़ार चीनी सैनिकों की पूर्वी लद्दाख और अक्साई चीन में तैनाती , न सिर्फ चीनी सैन्य सामान पर रूस का प्रभुत्व दिखाता बल्कि उनके युद्ध की तैयारियों और संचालन में भी रूसी प्रभाव दिखा रहा है।

अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा- अगर चीन आक्रमण करता है तो वह जमीन से हवा में वार करने वाली मिसाइलों के साथ साथ तोपची सेना के साथ आगे बढ़ेगा ,जिससे वो अपने सैन्य तंत्र को भारतीय वायुसेना की सीधे पहुच से दूर रख सके। यह युद्ध लड़ने का पुराना सोवियत तरीका है, जो गहराई वाले क्षेत्रों में सैनिकों को वायु रक्षा कवर प्रदान करता है,क्योंकि यहाँ चीनी होतन एयरबेस मुख्य सीमा से 320 किमी दूर है।कई विशेषज्ञों का मानना की अगर लड़ाई हुई तो दोनों तरफ से स्टैंड-ऑफ ( हवा में चलने वाले हथियार) वेपन से ही लड़ा जाएगा। अधिकारी ने बताया कि – भारतीय वायुसेना की ,”तितर-बितर ,आत्मसात ,क्षतिपूर्ति और प्रतिकार करना” नीति चीन की योजनाओं को ध्वस्त करने में पर्याप्त है।
किसी भी आक्रमक परिस्थितियों में भारतीय वायु सेना ,चीनी वायु सेना से ज्यादा शीघ्र कार्रवाई करने में सक्षम है। क्योंकि भारतीय एयरबेस एलएसी (LAC) से चीनी एयरबेस के मुकाबले काफी नजदीक है। भारतीय सेना चीन से किसी भी परिस्थिति के लिए तैयार है। सेना लगातार 10 दिन सघन युद्ध कर सकती है। 2016 उरी सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 बालाकोट सर्जिकल के बाद सरकार ने सेना को अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य उपकरण और मिसाइलों की तत्काल खरीद की अनुमति दी थी।उसके बाद भारतीय सेना तकनीकी तौर पर भी मजबूत हुई है।

किसी भी परिस्थिति में भारत-चीनी सेना का सीधा टकराव बिना विदेशी हस्तक्षेप के 10 दिनों से ज्यादा नहीं चल सकता है। जबकि भारतीय सेना के पास खुद का गोला-बारूद 40 दिनों और पारंपरिक गोला-बारूद 60 दिनों तक के लिए है। ये बताता है की भारतीय सेना दुनिया मे किसी से कम नहीं है।चार पांच अन्य राफाल विमान जिनपर फ्रांस में भारतीय पायलेट ट्रेनिंग कर रहे हैं अगले महीने अम्बाला स्क्वाड्रन में शामिल हो जाएंगे। उसके बाद भारतीय वायुसेना लगभग अजेय हो जाएगी।

पिछले हफ्ते, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में देश से कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत लद्दाख सेक्टर में भारतीय सेना को देश की सीमाओं पर गश्त करने से नहीं रोक सकती है। यह चीनी सेना को साफ संदेश था कि जिन स्थानों पर भारतीय सेना चीनी कार्रवाई के कारण गश्त नही कर पा रही वह ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला है।

पूर्व उप सेना प्रमुख , लेफ्टिनेंट जनरल एएस लांबा (retd)ने कहा: “भारत द्वारा गहन कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य कमांडरों (दोनों राष्ट्रों के बीच) की बातचीत के बावजूद LAC पर स्थिति बिगड़ रही है। चीन द्वारा किसी भी कार्रवाई का जवाब पूरी तत्परता और ताकत के साथ देने की आवश्यकता है। ”

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