पीपी 15 को लेकर भारत-चीन के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रहने पर दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर लगाई तोहमत

इस वार्ता में अहम बिंदु पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 (पीपी-15) से सैनिकों की वापसी की रुकी हुई प्रक्रिया को पूरा करना था, लेकिन दोनों पक्षों ने इस स्थिति के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया।

India China standoff
भारत और चीन के बीच रविवार को हुई कोर कमांडर स्तर की वार्ता के 13वें दौर के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है। दोनों देशों के बीच गतिरोध जारी है। (Express photo)

भारत और चीन के बीच रविवार को हुई कोर कमांडर स्तर की वार्ता के 13वें दौर के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है। दोनों देशों के बीच गतिरोध जारी है।

इस वार्ता में अहम बिंदु पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 (पीपी-15) से सैनिकों की वापसी की रुकी हुई प्रक्रिया को पूरा करना था, लेकिन दोनों पक्षों ने सोमवार सुबह स्वतंत्र बयान जारी कर इस स्थिति के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया।

भारत ने कहा कि चीन द्वारा यथास्थिति को बदलने के एकतरफा प्रयासों की वजह से गतिरोध बना हुआ है। वहीं चीन का कहना है कि भारत की अनुचित मांगों से बातचीत में दिक्कत हो रही है।

भारतीय सेना ने बताया कि रविवार को चुशुल मोल्दो बॉर्डर मीटिंग प्वाइंट पर कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। दोनों पक्षों के बीच बचे हुए मुद्दों के समाधान पर चर्चा की गई, जिसमें पूर्वी लद्दाख में LAC का मुद्दा भी शामिल था।

भारतीय पक्ष का कहना है कि एलएसी पर स्थिति चीनी पक्ष की वजह से बिगड़ी क्योंकि उसने यथास्थिति को बदलने और द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन की कोशिश की। इसलिए यह आवश्यक है कि चीनी पक्ष शेष क्षेत्रों में उचित कदम उठाए, जिससे पश्चिमी क्षेत्र में एलएसी के साथ शांति बहाल हो सके।

सेना ने कहा कि दोनों पक्षों को शेष मुद्दों को जल्द से जल्द हल करना चाहिए। बैठक के दौरान, भारतीय पक्ष ने शेष मसलों को हल करने के लिए रचनात्मक सुझाव दिए, लेकिन चीनी पक्ष इससे सहमत नहीं हुआ और कोई दूसरा प्रस्ताव भी नहीं दे सका। इस वजह से बैठक से कोई हल नहीं निकल सका।

हालांकि सेना ने बताया है कि दोनों पक्ष अभी भी बातचीत और जमीनी स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हैं।

सेना ने कहा कि हमें उम्मीद है कि चीनी पक्ष द्विपक्षीय संबंधों को ध्यान में रखते हुए प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करेगा और बचे हुए मुद्दों को सुलझाने के लिए काम करेगा।

इस बैठक में शामिल होने से पहले भारतीय सेना को ये उम्मीद थी कि दोनों पक्ष पीपी 15 से अलग होने के लिए सहमत हो जाएंगे, लेकिन ताजा दौर की बातचीत के बाद ऐसा लगता है कि अभी ये मुद्दा सुलझने में समय लगेगा।

वहीं चीन एक अलग ही राग अलाप रहा है। चीन के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि चीनी पक्ष ने सीमा की स्थिति को सुलझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन भारतीय पक्ष अपनी बात पर अड़ा हुआ है। उनकी मांगें जायज नहीं हैं। इसी वजह से इस वार्ता में कठिनाई आई।

भारत की तरफ से इस वार्ता का नेतृत्व लेह स्थित XIV कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने किया। वहीं शिनजियांग सैन्य जिले के कमांडर मेजर जनरल लियू लिन ने चीनी पक्ष का नेतृत्व किया।

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